बीबीसी रिसर्च: भारतीय महिला खिलाड़ियों के बारे में आठ बातें

  • दिव्या आर्य
  • बीबीसी संवाददाता
पीवी सिंधु

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बीबीसी ने भारत में स्पोर्ट्स और महिला खिलाड़ियों के बारे में लोगों की धारणा समझने के लिए 14 राज्यों में एक विस्तृत रिसर्च की है.

रिसर्च में 10 हज़ार लोगों से बात की गई और इससे आठ प्रमुख बातें सामने आईं, जो कुछ इस तरह हैं:

1.कितने भारतीय कोई खेल खेलते हैं?

भारत ऐसा देश नहीं है जहां स्पोर्ट्स खेलना या शारीरिक व्यायाम जीवनशैली का हिस्सा हो. बीबीसी की रिसर्च से पता चलता है कि इसमें हिस्सा लेने वाले सिर्फ़ एक तिहाई भारतीय ही कोई स्पोर्ट्स खेलते हैं.

बाकी दुनिया को देखें तो फ़िनलैंड, डेनमार्क और स्वीडन जैसे देशों में लगभग दो तिहाई आबादी खेलों में हिस्सा लेती है. वहीं, पूरे यूरोप का औसत आधे से थोड़ा ज़्यादा है.

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2. भारतीय स्पोर्ट्स में हिस्सा क्यों नहीं लेते?

रिसर्च के दौरान लोगों ने बताया कि स्कूल में खेलने की सुविधाओं की कमी और स्कूल द्वारा स्पोर्ट्स पर ज़ोर न दिया जाना इसकी बड़ी वजहें हैं.

रिसर्च के पुरुष और महिला दोनों प्रतिभागियों ने बीबीसी को बताया कि उनके माता-पिता का ज़ोर पढ़ाई में अच्छे प्रदर्शन था और उन्हें लगता था कि खेलना वक़्त का अच्छा इस्तेमाल नहीं है.

हालांकि ओलंपिक जैसी अंतरराष्ट्रीय खेल स्पर्धाओं में भारत का प्रदर्शन धीरे-धीरे बेहतर हुआ है और खिलाड़ियों को 'हीरो' की तरह देखने की संस्कृति विकसित हुई है. लेकिन इसके बावजूद भारतीयों की स्पोर्ट्स के बारे में सोच नहीं बदली है.

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3. ओलंपिक जैसी अंतरराष्ट्रीय खेल स्पर्धाओं में कितनी भारतीय महिलाओं ने हिस्सा लिया है?

भारत ने ओलंपिक गेम्स में अब तक कुल 28 मेडल जीते हैं और इनमें से 14 पिछले 25 वर्षों में जीते गए हैं.

अभिनव बिंद्रा ओलंपिक में गोल्ड मेडल जीतने वाले अकेले भारतीय हैं. उन्होंने साल 2008 में निशानेबाजी में गोल्ड मेडल जीता था.

महिलाओं ने ओलंपिक में पांच मेडल जीते हैं और ये सारी जीत पिछले दो दशक में दर्ज की गई है.

पिछले ओलंपिक गेम्स में भारत ने दो मेडल जीते और दोनों मेडल इसे महिला खिलाड़ियों ने जीते. पीवी सिंधु ने बैडमिंटन में सिल्वर मेडल और साक्षी मलिक ने कुश्ती में ब्रॉन्ज़ मेडल जीता था.

कई लोगों का मानना है कि ओलंपिक में प्रदर्शन के आधार पर भारत में खेलों की स्थिति नहीं आंकी जा सकती क्योंकि भारत का पसंदीदा खेल ओलंपिक में खेला ही नहीं जाता.

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4. भारत के पसंदीदा खेल कौन से हैं?

बीबीसी रिसर्च में हिस्सा लेने वाले 15 फ़ीसदी लोगों का पसंदीदा खेल क्रिकेट है.

चौंकाने वाली बात ये है कि क्रिकेट के बाद सबसे ज़्यादा 13 फ़ीसदी लोगों ने कबड्डी को अपना पसंदीदा खेल बताया. वहीं, छह फ़ीसदी लोगों ने योग को अपना पसंदीदा शारीरिक व्यायाम बताया.

शतरंज को तीन फ़ीसदी लोगों ने अपना फ़ेवरेट स्पोर्ट बताया और हॉकी को सिर्फ़ दो फ़ीसदी लोगों ने.

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5. कितनी लड़कियां क्रिकेट खेलती हैं?

क्रिकेट खेलने वाली महिलाओं की संख्या बहुत कम है. अगर पुरुषों से तुलना करें तो 25 फ़ीसदी पुरुषों की तुलना में सिर्फ़ पांच फ़ीसदी महिलाएं क्रिकेट खेलती हैं. इसके बावजूद भारत की महिला क्रिकेट टीम धीरे-धीरे ऊंचाई पर पहुंच रही है.

पुरुष क्रिकेट टीम वनडे क्रिकेट में दो बार वर्ल्ड चैंपियन रह चुकी है और टी-ट्वेंटी क्रिकेट में एक बार.

वहीं, महिला क्रिकेट टीम वनडे वर्ल्ड कप में दो बार फ़ाइनल तक पहुंची थी और इस बार टी-ट्वेंटी वर्ल्ड कप में ऑस्ट्रेलिया का मुकाबला कर रही है. यह मैच रविवार को मेलबर्न में खेला जाएगा.

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6. कबड्डी कितनी महिलाएं खेलती हैं?

क्रिकेट के मुक़ाबले कबड्डी में जेंडर गैप काफ़ी कम है. 15 फ़ीसदी पुरुषों की तुलना में 11 फ़ीसदी महिलाएं कबड्डी खेलती हैं जो क्रिकेट से बेहतर है.

कबड्डी भारतीय उप महाद्वीप का अपना खेल है. भारतीय पुरुष और महिला कबड्डी टीम दोनों ही विश्व चैंपियन रहे हैं.

कबड्डी एशियाई खेलों का हिस्सा है. कबड्डी वर्ल्ड कप भी होता है और प्रो-कबड्डी लीग भी.

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7. महिलाओं के खेल कौन देखता है?

रिसर्च में हिस्सा लेने वालों ने बताया कि जितने लोग वीमेन्स स्पोर्ट्स देखते हैं, उससे लगभग दोगुनी संख्या में वो पुरुषों के खेल देखने जाते हैं.

वहीं, कइयों ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में समाचार और खेल चैनलों पर महिलाओं का टी-20 गेम देखकर उनकी महिलाओं के खेल में दिलचस्पी बढ़ी है.

इससे यह समझ आता है कि महिलाओं के खेलों में लोगों की दिलचस्पी बढ़ाने के लिए उनके टूर्नामेंट को टीवी पर ब्रॉडकास्ट किए जाने की ज़रूरत है.

हालांकि, सिर्फ़ ऐसा करने से ही महिलाओं के खेल में दिलचस्पी बढ़ जाएगी, ऐसा भी नहीं है क्योंकि आज भी महिलाओं के खेल से 'मनोरंजन' की उम्मीद की जाती है.

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8. महिला खिलाड़ियों के बारे में लोग क्या सोचते हैं?

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दो देश,दो शख़्सियतें और ढेर सारी बातें. आज़ादी और बँटवारे के 75 साल. सीमा पार संवाद.

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समाप्त

रिसर्च में हिस्सा लेने वाले लगभग आधे लोगों ने कहा कि महिलाओं के खेल उतने 'मनोरंजक' नहीं होते जितने पुरुषों के.

इसके साथ ही महिलाओं के खेल के साथ कुछ अन्य धारणाएं भी जुड़ी हुई हैं जैसे, 'महिला खिलाड़ियों का शरीर कम आकर्षक' दिखता है. ऐसी धारणाओं की साथ महिला खिलाड़ियों के लिए 'कैज़ुअल सेक्सिज़्म' बढ़ जाता है.

रिसर्च में हिस्सा लेने वाले ज़्यादातर लोगों ने कहा कि वो लड़कों और लड़कियों को स्पोर्ट्स में हिस्सा लेने के लिए समान रूप से उत्साहित करेंगे. मगर इसके साथ ही कम से कम एक तिहाई लोगों ने ये भी कहा कि स्पोर्ट्स की वजह से महिलाओं के मां बनने की क्षमता पर असर पड़ सकता है.

महिला खिलाड़ियों के लिए ऐसे विचार सिर्फ़ भारत तक ही सीमित नहीं है. ब्रिटेन में पिछले फ़ुटबॉल वर्ल्ड कप से पहले किए गए एक सर्वे में पता चला खेल के मैदान से बाहर महिला खिलाड़ियों को उनकी ख़ूबसूरती से ही आंकने का चलन है.

औरतों की बराबरी के बारे में लोगों की सोच ही खेल में उनकी भागीदारी के प्रति रवैय्या तय करती है.

जैसे-जैसे महिलाओं के लिए शिक्षा, करियर और अपनी ज़िंदगी के फ़ैसले ख़ुद लेने में सक्षम हो जाएंगी और लोग इसे स्वीकार करने लगेंगे, वैसे-वैसे खेल में भी उनकी भागीदारी सुधर जाएगी.

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