Women T20 World Cup: इन दो लड़कियों पर क्यों फिदा है आगरा

  • समीरात्मज मिश्र
  • बीबीसी हिंदी के लिए
पूनम यादव, दीप्ती शर्मा

इमेज स्रोत, Getty Images

आठ मार्च यानी अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर भारतीय महिला क्रिकेट टीम टी-20 विश्व कप के फ़ाइनल मुक़ाबले में मेज़बान ऑस्ट्रेलियाई टीम के साथ भिड़ने जा रही है.

भारत समेत दुनिया भर की निग़ाहें इस मैच पर हैं, लेकिन ताज नगरी आगरा में ख़ास उत्साह है क्योंकि इस शहर की दो खिलाड़ी इस मैच में अपने हुनर का प्रदर्शन कर रही हैं.

आगरा में कैंट इलाक़े की अवधपुरी कॉलोनी में इस मैच को देखने की ज़ोरदार तैयारियां हैं.

पूरी कॉलोनी एक पार्क में बड़ी सी स्क्रीन पर मैच देखने की तैयारी कर रही है. इसी कॉलोनी में महिला क्रिकेट की हरफ़नमौला खिलाड़ी दीप्ति शर्मा का घर है.

दीप्ति शर्मा के बड़े भाई और उनके कोच सुमित शर्मा कहते हैं कि कॉलोनी वालों ने मिलकर ये सारी तैयारी की है और सभी के दिमाग़ में बस एक ही बात चल रही है कि इस बार ये विश्व कप भारत के ही पास आएगा.

वहीं ईदगाह कॉलोनी में भी लोगों में ज़बरदस्त उत्साह है.

आगरा में उत्साह का माहौल

यहां तो वे लोग भी आठ मार्च को होने वाले इस मैच को देखने के लिए उत्साहित हैं जो आमतौर पर क्रिकेट नहीं देखते.

इमेज स्रोत, Samiratmaj Mishra/BBC

इमेज कैप्शन,

दीप्ति शर्मा अपने परिवार के साथ

ऐसे ही एक बुज़ुर्ग रामनाथ कहते हैं कि वो मैच सिर्फ़ इसलिए देखेंगे क्योंकि उनके पड़ोस में ही रहने वाली पूनम यादव इसमें खेल रही हैं.

पूनम यादव ने टी 20 विश्व कप के भारत के पहले मैच में ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ ज़ोरदार प्रदर्शन करते हुए चार विकेट चटकाए थे जबकि दीप्ति शर्मा ने शानदार 49 रनों की पारी खेली थी.

दीप्ति शर्मा के पिता भगवान शर्मा रेलवे में नौकरी करते थे और अब रिटायर हो चुके हैं.

घर में क्रिकेट खेलने का कोई माहौल नहीं था लेकिन जब बड़े बेटे सुमित शर्मा शौक़िया क्रिकेट खेलने लगे और फिर नेशनल टूर्नामेंट्स के लिए उनका चयन होने लगा तो घर के छोटे बच्चों में भी क्रिकेट के प्रति लगन बढ़ी.

इमेज स्रोत, Samiratmaj Mishra/BBC

इमेज कैप्शन,

दीप्ति शर्मा का परिवार

छोड़कर पॉडकास्ट आगे बढ़ें
पॉडकास्ट
बात सरहद पार

दो देश,दो शख़्सियतें और ढेर सारी बातें. आज़ादी और बँटवारे के 75 साल. सीमा पार संवाद.

बात सरहद पार

समाप्त

इसका नतीजा यह हुआ कि उनकी बेटी दीप्ति शर्मा आज न सिर्फ़ राष्ट्रीय टीम का हिस्सा हैं बल्कि टीम की जीत में अक़्सर उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रहती है.

बीबीसी से बातचीत में सुमित शर्मा कहते हैं, "दीप्ति मुझे क्रिकेट खेलते देखती थी तो उसे अच्छा लगता था. फिर वो मुझसे स्टेडियम साथ ले जाने की ज़िद करने लगी. जब आठ साल की थी तब पहली बार मैं उसे प्रैक्टिस के दौरान स्टेडियम ले गया था. उसके बाद कई बार मेरे साथ गई और फिर देखते-देखते वह ख़ुद खेलने लगी और मैं ही उसका कोच बन गया. पहले मैं नौकरी करता था लेकिन अब ख़ुद की एकेडमी चलाता हूं जिसमें कई बच्चों को क्रिकेट का प्रशिक्षण दे रहा हूं."

आगरा में ही शम्साबाद क़स्बे के मूल निवासी भगवान शर्मा की ख़ुद क्रिकेट में कोई दिलचस्पी नहीं थी लेकिन जब बच्चों में उन्होंने इसके प्रति लगन देखी तो हमेशा प्रोत्साहित किया.

सुमित बताते हैं, "घर में क्रिकेट का माहौल नहीं था और लड़कियों के लिए तो वैसे भी खेल का माहौल छोटे शहरों में नहीं रहता. लेकिन मुझे देखकर जब दीप्ति में क्रिकेट को लेकर दिलचस्पी बढ़ी तो पिता जी ने उसे काफ़ी प्रोत्साहित किया और मुझे भी उसे सिखाने के लिए कहा."

पूनम के पिता के लिए भावुक पल

टी 20 विश्व कप के पहले मैच में भारत की जीत में अहम भूमिका निभाने वाली और 'प्लेयर ऑफ़ द मैच' रहीं पूनम यादव के घर का हाल भी कमोवेश वैसा ही था जैसा कि दीप्ति का.

सेना में नौकरी कर रहे पूनम के पिता लड़की को पढ़ाना-लिखाना तो चाहते थे लेकिन उसे क्रिकेटर बनाने की चाह उन्हें कभी नहीं थी.

यहां तक कि घरवालों ने पूनम को क्रिकेट खेलने से रोकने की भी कोशिश की लेकिन उसके जुनून और जज़्बे के आगे उन्हें झुकना पड़ा.

इमेज स्रोत, Samiratmaj Mishra/BBC

इमेज कैप्शन,

पूनम यादव का परिवार जश्न मनाते हुए

बेटी की ज़िद के आगे अपनी हार पर सेना के रिटायर्ड सूबेदार मेजर रघुबीर यादव को गर्व है.

बीबीसी से बातचीत में रघुबीर यादव बताते हैं, "आठ साल की उम्र में पूनम ने क्रिकेट खेलने के लिए स्टेडियम जाने की ज़िद की थी. उसे स्टेडियम भेजना शुरू किया तो लोग ताना मारने लगे कि बेटी बड़ी हो रही है. मैं भी लोगों की बातों में आकर उसका स्टेडियम जाना बंद करा दिया. फिर एक दिन पूनम अपनी कोच हेमलता काला को लेकर घर आ गई. कोच ने समझाया कि आप ग़लत कर रहे हैं. खेल में लड़कियां आगे जा रही हैं और घर-परिवार-समाज के अलावा देश का भी नाम रोशन कर रही हैं. फिर मैंने उसे खेलने की पूरी आज़ादी दे दी."

पुरानी बातों को याद करके रघुबीर यादव भावुक हो जाते हैं और कहते हैं कि यदि उस समय मैंने पूनम को खेलने से रोक दिया होता तो मेरे लिए ये कितना बड़ा अपराध होता, मैं सोच भी नहीं सकता हूं.

रघुबीर यादव कहते हैं, "बचपन से ही उसे लड़कों की तरह रहना और खेलना पसंद था. शुरुआत में वह बास्केटबॉल खेलती थी लेकिन लंबाई कम होने के चलते इस खेल में उसे दिक़्क़त हो रही थी. उस समय भारतीय टीम में प्रीति और हेमलता दिवाकर खेल रही थीं. उन्हें देखकर पूनम को भी लगा कि वो भी इस खेल में कुछ अच्छा कर सकती है."

रघुबीर यादव को उम्मीद है कि भारतीय टीम में खेल रही सभी बेटियां अपने बेहतरीन प्रदर्शन से विश्व कप जीतेंगी और देश का नाम रोशन करेंगी.

पूनम के घर वाले विश्व कप के उसके अब तक के प्रदर्शन से काफ़ी ख़ुश हैं और फ़ाइनल में भी उन्हें ऐसे ही प्रदर्शन की उम्मीद है.

इमेज स्रोत, Samiratmaj Mishra/BBC

इमेज कैप्शन,

पूनम अपने पिता के साथ

'जो ताने मारते थे, वो अब बधाई देते हैं'

पूनम की मां मुन्नी देवी भी फ़ाइनल मैच को लेकर ख़ासी उत्साहित हैं.

वो कहती हैं, "जब भी टीवी पर उसका मैच आता है, मैं सब काम छोड़कर मैच ही देखती हूं. पहले उसके खेलने पर जो लोग ताने मारते थे, अब मैच जीतने पर सबसे पहले बधाई देने आते हैं. मैं तो सभी मां-बाप से कहना चाहती हूं कि बेटियों को उनके मन-मुताबिक पढ़ने और खेलने की आज़ादी दें तो ज़रूर अच्छा करेंगी. पूनम और दीप्ति जैसी लड़कियां कम सुविधाओं और छोटे शहरों में रहकर इतना आगे जा सकती हैं तो देश की हर लड़की ऐसा कर सकती है."

पूनम यादव अंडर-19 टीम की कप्तान भी रह चुकी हैं. साल 2013 में बांग्लादेश के ख़िलाफ़ वड़ोदरा में हुए टी-20 इंटरनेशनल मैच से उन्होंने अपने करियर की शुरुआत की.

इमेज स्रोत, Samiratmaj Mishra/BBC

इमेज कैप्शन,

पूनम यादव, राष्ट्रपति कोविंद के साथ

करियर के पहले वनडे मैच में ही पूनम ने 15 रन देकर 3 विकेट लिए थे.

भारतीय महिला टीम का मुक़ाबला दक्षिण अफ्रीकी टीम को सेमी फ़ाइनल में हराने वाली ऑस्ट्रेलियाई टीम से होगा.

सेमी फ़ाइनल में ऑस्ट्रेलिया ने डकवर्थ लुइस नियम से दक्षिण अफ्रीका को पांच रन से शिकस्त दी थी जबकि भारत ने इंग्लैंड से बिना सेमी फ़ाइनल मैच खेले ही फ़ाइनल में जगह बना ली.

यह मैच बारिश में धुल गया था और ग्रुप ए में पहले नंबर पर होने की वजह से भारत में फ़ाइनल में पहुंच गया.

यह भी पढ़ें:

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)