टोक्यो ओलंपिक का टलना भारत के लिए कैसा

  • 25 मार्च 2020
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आख़िरकार वहीं हुआ जिसका डर था. कोरोना वायरस के कारण टोक्यो ओलंपिक खेलों के आयोजन को एक साल तक के लिए टाल दिया गया है.

इस ख़बर की पुष्टि खुद जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने मंगलवार को की. आबे ने कहा कि वो अंतराष्ट्रीय ओलंपिक समिति के अध्यक्ष थॉमस बाख के ओलंपिक खेलों को टालने की सलाह से सहमत हैं.

टोक्यो ओलंपिक खेलों का आयोजन 24 जुलाई से 9 अगस्त तक होना था. जब से दुनिया भर में कोरोना वायरस से मरने और संक्रमित होने वाले व्यक्तियों और देशों की संख्या लगातार बढ़ती चली जा रही है तभी से जापान पर ओलंपिक खेलों को टालने का दबाव बढ़ता जा रहा था.

यहां तक कि कनाडा कोरोना वायरस संक्रमण के कारण टोक्यो ओलंपिक खेलों से अपना नाम वापस लेने वाला पहला देश भी बना. इससे पहले जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने सोमवार को संसद में कहा था कि जापान खेलों को कराने के लिए प्रतिबद्ध है. उन्होंने अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति से तुरंत फ़ैसला लेने को भी कहा था.

कोरोना वायरस के कारण पिछले एक महीने के भीतर ही दुनिया भर के बड़े से बड़े खेल आयोजन रद्द हो गए. इनमें भारत में होने वाला आईपीएल 15 मार्च तक के लिए टल गया है. इसके अलावा शु्क्रवार से होने वाली इंडियन ग्रा.प्री रद्द कर दी गई है. इसके ज़रिए भारतीय एथलीटों के पास टोक्यो ओलंपिक खेलों में क्वॉलिफ़ाई करने का मौक़ा था. फ़ॉर्मूला वन रेस पर भी ब्रेक लगा. अब यह मार्च और अप्रैल में बंद रहेगी.

इंग्लैंड ने भी प्रीमियर लीग और इंग्लिश फुटबॉल लीग के मुक़ाबले 30 अप्रैल तक बंद करने का फ़ैसला किया. कोरोना की मार टेनिस पर भी पड़ी. पुरुष और महिला पेशेवर टेनिस टूर्नामेंट सात जून तक स्थगित कर दिए गए हैं.

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अब सवाल यह कि जब एक के बाद एक टूर्नामेंट रद्द हो रहे थे या टल रहे थे तो जापान ओलंपिक खेलों को सही समय पर कराने की ज़िद्द पर क्यों अड़ा था.

इसके जवाब में खेल समीक्षक अयाज़ मेमन ने कहा कि अगर जापान पहले ही ओलिंपिक खेलों को रद्द करने या टालने की घोषणा कर देता तो इससे उन खिलाड़ियों के मनोबल पर बुरा असर पड़ता जो बरसों से इन खेलों की तैयारी कर रहे हैं.

नहीं भूलना चाहिए कि इन खेलों में हिस्सा लेने वाले देश चार नहीं वरन दसियों साल से तैयारी करते है. जापान ने अपना बहुत सारा पैसा इन खेलों को कामयाब बनाने के लिए स्टेडियमों पर लगाया है, लेकिन अब अगर यह खेल अगले साल के लिए टल गए है तो अच्छा ही है क्योंकि खेल किसी की जान से बढ़कर नहीं है.

भारतीय बैडमिंटन टीम के राष्ट्रीय कोच पुलेला गोपीचंद भी कुछ दिन पहले बीबीसी से ख़ास बातचीत में कह चुके हैं कि अभी जिस तरह के हालात पूरी दुनिया में हैं उसे देखते हुए ओलंपिक खेलों को तय समय पर नहीं कराया जाना चाहिए.

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पुलेला गोपीचंद की बात का समर्थन करते हुए राष्ट्रमंडल खेलों के स्वर्ण पदक विजेता और लंदन ओलंपिक की कांस्य पदक विजेता साइना नेहवाल के पति पी कश्यप कहते हैं कि जब सभी ट्रेनिंग सेंटर बंद हैं और भय का माहौल है तो भला कैसे खिलाड़ी बिना तैयारी के इन खेलों में भाग ले सकते हैं.

पिछले महीने दिल्ली में हुई एशियन कुश्ती चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतने वाली महिला पहलवान दिव्या काकरान ने भी बीबीसी से बातचीत में कहा कि हालाँकि यह ख़बर अच्छी नहीं है लेकिन पूरी तरह निराशाजनक भी नहीं है क्योंकि यह खेल अब अगले साल होंगे. इससे उन्हें तैयारी का मौक़ा मिल गया है क्योंकि उन्हें अभी ओलंपिक के लिए क्वॉलिफ़ाई करना है.

टोक्यो ओलंपिक खेलों में भारत के लिए स्वर्ण पदक की सबसे बड़ी उम्मीद मनु भाकर का मानना है कि ट्रायल्स और प्रतियोगिताएँ स्थगित ही होनी चाहिए क्योंकि दूसरी बेहद महत्वपूर्ण चीज़ें हैं जिससे दुनिया को निबटना है.

दो बार राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीत चुकीं और 48 किलो भार वर्ग में में भाग लेने वाली महिला भारोत्तोलक मीराबाई चानू भी कह चुकी है कि अगर ओलंपिक नहीं हुए तो उनकी चार साल की मेहनत बेकार चली जाएगी.

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अब इतना तो तय ही है कि टोक्यो ओलंपिक खेलों के अगले साल तक स्थगित होने से खिलाड़ियों का मनोबल पूरी तरह से टूटने से बच गया है लेकिन अब उन्हें अलग तरह से तैयारी करनी पड़ेगी. पर ज़रा सोचिए अगर टोक्यो ओलंपिक रद्द ही हो जाते तो क्या होता?

मेज़बान जापान को एक अनुमान के अनुसार 603 बिलियन येन यानी 416 अरब रुपए का नुक़सान होता. इसका असर 203 देशों के 11000 से अधिक एथलीटों पर पड़ता जो पदक की आस में बरसों से जी-जान एक कर रहे है. वैसे टोक्यो ओलंपिक खेलों के अगले साल तक स्थगित किए जाने की आहट तब साफ़ सुनाई दे रही थी जब पिछले सप्ताह गुरुवार को युनान से टोक्यो के लिए खेलों की मशाल को रवाना किया गया.

यह सब आयोजन एथेंस में बंद दरवाज़ों के बीच ख़ाली स्टेडियम में हुआ. विश्व एथलेटिक्स संस्था के प्रमुख सेबेस्टियन को ने भी तब स्वीकार किया था कि टोक्यो ओलंपिक खेलों को इस साल के अंत तक स्थगित किया जा सकता है. वह सब आशंकाएँ अब सच साबित हो गई है. पर यह भी सच है जान है तो जहान है और खेल ही खेल में क्यों जान पर बन आए.

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