लीज़ा स्टालेकर: पुणे के अनाथ आश्रम से आईसीसी हॉल ऑफ फ़ेम तक का सफ़र

लीज़ा स्टालेकर: पुणे के अनाथ आश्रम से आईसीसी हॉल ऑफ हेम तक का सफ़र

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पूर्व ऑस्ट्रेलियाई कप्तान लीज़ा स्टालेकर को इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल हॉल ऑफ फ़ेम में शामिल किया गया है.

41 वर्षीय स्टालेकर हॉल ऑफ फ़ेम में शामिल होने वाली 9वीं महिला हैं.

पूर्व ऑस्ट्रेलियाई कप्तान स्टालेकर ने अपने सुनहरे करियर में 2005 और 2013 का वर्ल्ड कप जीता. साथ ही टेस्ट और वनडे में बैटिंग और बोलिंग दोनों ही टॉप रैंकिंग हासिल की.

हॉल ऑफ फ़ेम में शामिल किए जाने पर उन्होंने कहा, "मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि मुझे खिलाड़ियों के इतने शानदार समूह का हिस्सा बनने का मौका मिलेगा."

ऑल राउंडर स्टालेकर 2013 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से रिटायर हो गई थीं लेकिन वो अब भी न्यू साउथ वेल्स के लिए घरेलू क्रिकेट खेलती हैं. उनका अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट करियर 12 साल का रहा.

भारत से नाता

लीज़ा स्टालेकर ने 2013 में ऑस्ट्रेलिया को वर्ल्ड कप जितवाया था. फ़ाइनल मैच मुंबई में खेला गया था जिसमें ऑस्ट्रेलिया ने वेस्ट इंडीज़ को हराया था.

लीज़ा के एक शानदार कैच की बदौलत ही आईसीसी विमेंस वर्ल्ड कप 2013 ऑस्ट्रिलिया के नाम हुआ था. इस मैच में उन्होंने दो बड़े विकेट भी लिए थे.

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इस यादगार मैच के साथ ही उन्होंने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर को विराम दे दिया था.

तब उन्होंने दुनिया को ये बताया था कि भारत से जुड़ी ये उनकी पहली याद नहीं है, बल्कि उनकी ज़िंदगी आज जिस मुक़ाम पर पहुंची है, उसकी शुरुआत भारत से ही हुई थी.

आईसीसी की वेबसाइट के मुताबिक़, स्टालेकर का जन्म 13 अगस्त 1979 को हुआ था. दरअसल उन्हें पुणे के किसी अनाथ आश्रम में छोड़ दिया गया था. तब तीन हफ़्ते की उस छोटी-सी बच्ची को स्टालेकर परिवार ने गोद लिया था.

cricket.com.au के मुताबिक़, पुणे में पैदा हुई स्टालेकर को जन्म के वक़्त लैला नाम दिया गया था. लेकिन उनकी परवरिश कर पाने में अक्षम उनके जन्म देने वाले मां-बाप ने उन्हें श्रीवत्स अनाथालय में छोड़ दिया था.

लेकिन फिर उस छोटी सी बच्ची की किस्मत के रास्ते मिशिगन के एक दंपति से जा मिले- हरेन जो ख़ुद मुंबई में पैदा हुए थे और उनकी पत्नी सोए स्टालेकर.

स्टालेकर दंपति ने छह साल पहले भी एक बच्ची को गोद लिया था. वो एक और बच्ची गोद लेकर अपना परिवार पूरा करना चाहते थे.

उन्होंने जब लैला (अब लीज़ा) को गोद लिया तब वो सिर्फ तीन हफ़्तों की थीं. फिर वो अपने नए परिवार के साथ अमरीका आ गईं.

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'खून में क्रिकेट को लेकर दीवानगी'

लीज़ा स्टालेकर ने एक इंटरव्यू में बताया था, "मैं भारत के पुणे मैं पैदा हुई थी. वहां से मुझे गोद लिया गया. उसके बाद मैं दो साल के लिए अमरीका चली गई. फिर दो साल केन्या में रही और आख़िर में हम ऑस्ट्रेलिया आकर बस गए. मेरे पिता भारतीय हैं और मेरी मां इंग्लिश."

एक इंटरव्यू में लीज़ा स्टालेकर ने कहा था कि "एक भारतीय के तौर पर सब जानते हैं कि हम क्रिकेट को लेकर दीवाने होते हैं. मुझे निश्चित रूप से लगता है कि मेरे ख़ून में भी यही है."

उनके पिता डॉ. हरेन स्टालेकर ने बताया था कि नौ साल की उम्र में लीज़ा स्टालेकर ने कहा था कि वो क्रिकेट खेलना चाहती हैं. उनके पिता याद करते हैं, वो घर के पीछे क्रिकेट खेला करती थीं और बहुत अच्छा क्रिकेट खेला करती थीं.

लीज़ा स्टालेकर ने इस साल की शुरुआत में एससीजी पॉडकास्ट को बताया था कि वह स्थानीय क्लब में 600 लड़कों के बीच दाखिला लेने वाली अकेली लड़की थीं.

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क्रिकेट करियर की शुरुआत

स्टालेकर के करियर की शुरुआत उस वक़्त की ज़्यादातर लड़कियों की तरह हुई यानी लड़कों के साथ खेलते हुए और इस बात से बेख़बर कि महिलाएं अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेल सकती हैं.

लेकिन जब 13 साल की उम्र में उन्हें गॉर्डन विमेंस क्रिकेट क्लब से इंट्रोड्यूस कराया गया, तब उन्हें पता चला कि महिलाएं भी अपने देश के लिए क्रिकेट खेल सकती हैं. उन्होंने एक वेबसाइट से कहा था, "तब महिला क्रिकेट टीवी पर नहीं दिखता था. उस बारे में कोई लेख नहीं छपता था. बस खिलाड़ियों के परिवार और दोस्तों को महिला क्रिकेट के बारे में पता होता था."

आईसीसी की वेबसाइट के मुताबिक़, लीज़ा स्टालेकर ने 29 जून 2001 में ऑस्ट्रेलिया की तरफ से इंग्लैंड के ख़िलाफ़ एक मैच में डेब्यू किया था.

वो दाएं हाथ से बैटिंग और बाएं हाथ से स्पिन बोलिंग करती हैं.

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स्टालेकर ने रिटायर होने से पहले 125 वनडे मैच खेले जो किसी भी ऑस्ट्रेलियाई महिला द्वारा खेले गए दूसरे सबसे ज़्यादा मैच हैं.

इसके अलावा उन्होंने आठ टेस्ट और 54 टी20 मैच भी खेले.

वो चार सफल विमेंस वर्ल्ड कप चैम्पियंस में शामिल रहीं- दो वनडे और दो टी20. उन्होंने तीन अंतरराष्ट्रीय शतक अपने नाम किए थे.

2008-09 में जब आईसीसी रैंकिंग इंट्रोड्यूस हुई तो लीज़ा स्टालेकर को उसमें दुनिया की लीडिंग ऑल-राउंडर के तौर पर रेट किया गया.

वो वनडे मैचों में 1000 रन और 100 विकेट लेने वाली पहली महिला क्रिकेटर रहीं.

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में उन्होंने 3,913 रन बनाए और 229 विकेट लिए.

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जब वो रिटायर हुईं तो महिला एक दिवसीय मैचों में 10वें नंबर की सबसे अधिक रन बनाने वाली खिलाड़ी थीं और ऑस्ट्रेलिया की तीसरे नंबर की सबसे ज़्यादा रन बनाने वाली खिलाड़ी.

उन्होंने वनडे में 146 विकेट लिए थे जो उस वक़्त तीसरे नंबर पर सबसे ज़्यादा था और अब भी टॉप 10 में हैं.

जब वो रिटायर हुई तो उनके टी20 मैचों में लिए 60 विकेट दूसरे नंबर पर सबसे ज़्यादा थे.

रिटायर होने के बाद लीज़ा स्टालेकर ने एक कमेंटेटर के तौर पर नई पारी की शुरुआती की.

हॉल ऑफ फ़ेम में लीज़ा स्टालेकर के साथ दो पुरुष खिलाड़ियों के नाम जुड़े हैं- ज़हीर अब्बास और जाक कालिस.

मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर ने तीनों को इस उपलब्धि की बधाई दी. उन्होंने ट्वीट किया, "खेल... सीमाओं से परे दुनिया को एकजुट कर सकता है और आप सभी ने इसमें अपना योगदान दिया है."

इस मौक़े पर ऑस्ट्रेलिया की विमेंस क्रिकेट टीम ने उनके योगदान को याद किया.

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