निशानेबाज़ी: दिल्ली में चली भारत की बुलेट क्या टोक्यो में निशाना भेदेगी?

  • आदेश कुमार गुप्त
  • बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
मनु भाकर और सौरव चौधरी की फ़ाइल फोटो

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मनु भाकर और सौरव चौधरी दुनिया के नंबर एक निशानेबाज़ों में से एक हैं और उनसे पदक की उम्मीद की जा रही है (फ़ाइल फोटो)

इन दिनों दिल्ली की डॉक्टर करणी सिंह शूटिंग रेंज दुनियाभर के 53 देशों के तीन सौ निशानेबाज़ों से गुलज़ार है.

यहां आईएसएसएफ यानी इंटरनेशनल शूटिंग स्पोर्ट्स फेडरेशन शूटिंग वर्ल्ड कप का आयोजन किया जा रहा है. यह शूटिंग वर्ल्ड कप 18 मार्च से शुरू हुआ और इसका समापन 29 मार्च को होगा.

वैसे इस शूटिंग वर्ल्ड कप का आयोजन पिछले साल मई में दिल्ली में ही होना था लेकिन कोरोना महामारी के कारण इसे टालना पड़ा. पिछले साल कोविड के कारण लगे लॉकडाउन के बाद यह पहला अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट है जिसमें शॉटगन, राइफ़ल और पिस्टल निशानेबाज़ों ने हिस्सा लिया.

इस वर्ल्ड कप में भारत अपनी पूरी ताक़त के साथ उतरा है जिसका अंदाज़ा इसी से लगाया जा सकता है कि इसमें वे सभी पंद्रह निशानेबाज़ शामिल हैं जिन्होंने टोक्यो ओलंपिक के लिए टिकट हासिल किया है.

भारत के 57 निशानेबाज़ इस विश्व कप में हिस्सा ले रहे है. टोक्यो ओलंपिक 23 जुलाई से आठ अगस्त तक होगा. इसका आयोजन पिछले साल 2020 में होना था लेकिन कोरोना महामारी के कारण इसे टालना पड़ा.

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घर में होने से मिला फ़ायदा और अनुभव

ओलंपिक से पहले भारत में शूटिंग वर्ल्ड कप के होने का फ़ायदा भारतीय निशानेबाज़ों को मिला.

इसी का परिणाम था कि शुक्रवार तक ही भारत के खाते में बारह स्वर्ण सात रजत और छह कांस्य पदक सहित 21 पदक आ चुके थे.

दूसरे पायदान पर अमेरिका था जिसके पास दो स्वर्ण पदक सहित केवल छह पदक थे.

इस वर्ल्ड कप में जापान, चीन, ऑस्ट्रेलिया, न्यूज़ीलैंड, मलेशिया और कुवैत के निशानेबाज़ों ने हिस्सा नहीं लिया.

भारत की यशस्विनी देसवाल, एश्वर्य प्रताप सिंह, मनु भाकर, सौरव चौधरी, अभिषेक वर्मा, चिंकी यादव और दूसरे खिलाड़ी अपने व्यक्तिगत, टीम और मिश्रित मुक़ाबलों में स्वर्ण पदक जीतकर अपना आत्मविश्वास बढ़ाने में कामयाब रहे.

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टोक्यो ओलंपिक से पहले इस वर्ल्ड कप की कितनी अहमियत

इस शूटिंग वर्ल्ड कप में भारतीय निशानेबाज़ों को मिली कामयाबी को सीधे टोक्यो ओलंपिक से जोड़ा जा रहा है, लेकिन क्या ऐसा सोचना सही है.

कुछ ऐसे ही सवालों के जवाब तलाशने के लिए हमने वरिष्ठ खेल पत्रकार जी राजारमन से बातचीत की जिनकी पैनी नज़र इस वर्ल्ड कप पर थी तो उन्होंने कहा कि दस से अधिक स्वर्ण पदक जीतना अपने आप में बताता है कि भारतीय निशानेबाज़ों ने कैसा प्रदर्शन किया.

जी राजारमन कहते हैं कि इस प्रदर्शन से ख़ुशी तो होनी चाहिए साथ ही मन में यह सवाल भी आना चाहिए कि इसमें बहुत से वो इवेंट भी हैं जो टोक्यो में नहीं होंगे. अगर उसे नज़रअंदाज़ कर दिया जाए तो भी भारत का प्रदर्शन दमदार रहा.

"कोविड काल में इस वर्ल्ड कप का आयोजन होना बहुत बड़ी उपलब्धि है. भारतीय खिलाड़ी भी अपने प्रदर्शन से खुश हैं लेकिन ओलंपिक पदक जीतने के लिए उन्हें और भी कड़ी मेहनत करनी होगी."

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चिंकी यादव 25मी पिस्टल की खिलाड़ी हैं. 23 साल की चिंकी यादव ने इस वर्ल्ड कप में टीम स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता है. उनका यह पहला ओलंपिक है

क्या चीन और जापान जैसे देशों के इस टूर्नामेंट के हटने से भारत को अधिक पदक मिले?

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इस सवाल के जवाब में जी राजारमन कहते हैं कि यह एक वजह भी हो सकती है कि कुछ बड़ी टीमें नहीं आई लेकिन यह उनकी सोच और रणनीति है कि कोरोना काल है और अधिक यात्रा नहीं करनी है. यह वर्ल्ड कप है और मानना पड़ेगा कि यहां भारत का प्रदर्शन सही रहा."

"विशेष रूप से भारत उन देशों में शामिल है जो निशानेबाज़ी में बेहतरीन माने जाते है. कोरोना काल से पहले भी साल 2019 में हुए वर्ल्ड कप के सबसे अधिक पदक भारत के ही नाम थे. भारत की इस कामयाबी को कमतर नहीं मानना चाहिए. चीन जैसे देशों का इस टूर्नामेंट में ना होना ठीक नहीं है लेकिन यह कहीं से भी भारतीय शूटरों के प्रदर्शन को कम नहीं करता."

भारतीय खिलाड़ियों ने व्यक्तिगत स्पर्धा से ज़्यादा पदक टीम या मिश्रित युगल में जीते. क्या यह ख़तरे की घंटी है?

इस सवाल को सिरे से नकारते हुए जी राजारमन कहते हैं, "ऐसा नहीं है, निशानेबाज़ हमसे अधिक जानते हैं. यहां प्रतियोगिता का स्तर बहुत ऊंचा नहीं था लेकिन कोरोना के बाद ये पहला अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट था. इससे पहले नेशनल चैंपियनशिप भी नहीं हुई, इसके बावजूद सीधे वर्ल्ड कप में जाकर अगर प्रदर्शन सही होता है तो ये क़ाबिले तारीफ़ है."

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जी राजारमन एक उदाहरण के माध्यम से बताते हैं कि महिला निशानेबाज़ अंजुम मोदगिल से इस वर्ल्ड कप के एक महिने पहले उनकी बात हुई तो अंजुम का कहना था कि वह पहले जैसा महसूस करना चाहती है. एक साल से कोई टूर्नामेंट नहीं होने से वह घर में ही अभ्यास कर रही थी.

"कुछ ट्रायल चल रहे थे जिनमें प्रतियोगिता जैसा अहसास नहीं होता. इसे देखते हुए अंजुम मोदगिल वर्ल्ड कप के क्वालिफ़ाइंग में दूसरे स्थान पर रहते हुए अगर फ़ाइनल खेल गई तो इससे उनका आत्मविश्वास भी बढ़ा ही होगा."

वर्ल्ड कप के दौरान बारिश और तेज़ हवा भी चली. क्या इस अनुभव का लाभ टोक्यो में मिलेगा ?

इस सवाल के जवाब में जी राजारमन कहते हैं कि अच्छे निशानेबाज़ों को ऐसे हालात का सामना करना ही पड़ता है. 50 मीटर वाले इवेंट में थोड़ा आउटडोर का माहौल बन जाता है. थोड़ी बारिश हुई, तेज़ हवा भी चली इससे निशानेबाज़ों की तैयारी अच्छी हुई. ऐसे हालात अगर टोक्यो में भी मिले तो भारतीय निशानेबाज़ यहां के अनुभव के आधार पर स्टीक निशाने लगा सकते है.

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इस वर्ल्ड कप के बाद भारतीय निशानेबाज़ी संघ टोक्यो ओलंपिक के लिए खिलाड़ियों के नाम का एलान करेगा. क्या कुछ नाम बदलेंगे?

राजारमन कहते हैं कि निशानेबाज़ी संघ ने अभी तक नहीं कहा कि चयन कैसे होगा. यह अजीब सा खेल है जिसमें कोटा खिलाड़ी लाता है, लेकिन वह कोटा देश को मिलता है खिलाड़ी को नहीं. खिलाड़ियों को चुनना आसान नहीं है और कुछ इवेंट में महिलाए शानदार प्रदर्शन कर रही है.

"दस मीटर एयर राइफ़ल में अंजुम मोदगिल, अपूर्वी चंदेला और इस समय दुनिया की नम्बर एक रैंकिंग वाली इलावेनिल वनरिवन है, अब इनमें से दो को ही चुनना होगा. लेकिन ऐसा लगता नहीं है कि जो खिलाड़ी कोटा लेकर आए हैं उन्हें बदला जाए. जो पंद्रह खिलाड़ी कोटा लाए हैं वह टोक्यो ज़रूर जाएंगे. अगर कोई खिलाड़ी दबाव में भी दमदार प्रदर्शन कर रहा है तो उसे कैसे नज़रअंदाज़ किया जा सकता है?"

टोक्यो ओलंपिक में भारत की उम्मीदों को लेकर जी राजारमन कहते हैं कि आजकल के युवा निडर होकर खेलते हैं. वह पहले के खिलाड़ियों की तरह केवल ओलंपिक में भागीदारी करने नहीं वरन पदक जीतने के उद्देश्य से जाते है. मनु भाकर और सौरव चौधरी दुनिया के नंबर एक निशानेबाज़ों में से एक हैं और उनसे पदक की उम्मीद की जा सकती है. इनके अलावा अगर उस दिन निशाने सही लगे तो और निशानेबाज़ भी पदक दिलाने की क्षमता रखते है.

नियमों में बदलाव को लेकर जी राजारमन कहते हैं कि यह तो सब देशों के लिए है. अंतराष्ट्रीय निशानेबाज़ी महासंघ ने शायद टेलिविज़न के दर्शकों को ध्यान में रखकर भी यह बदलाव किए हैं ताकि निशानेबाज़ी आकर्षक लग सके. यह खिलाड़ियों के लिए मुश्किल की बात है लेकिन खेल के लिए ठीक है.

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खिलाड़ी ख़ुद क्या कहते हैं

इस वर्ल्ड कप के दौरान हमें भी कुछ खिलाडियों से बातचीत करने का अवसर मिला. दस मीटर एयर पिस्टल में स्वर्ण पदक जीतने वाली यशस्विनी देसवाल ने कहा कि इस स्वर्ण पदक से उनका मनोबल बढ़ा है. मनु भाकर जैसी स्टार शूटर को पीछे छोड़ने से पहले क्या उन पर कोई दबाव था. इसे लेकर यशस्विनी ने कहा कि सब अपनी अपनी तैयारी करके आते है.

इसी वर्ल्ड कप में दस मीटर एयर पिस्टल टीम में स्वर्ण पदक जीतने वाले अभिषेक वर्मा ने जो कि 31 साल के हैं और ओलंपिक कोटा भी उनके पास है, उन्होंने बड़ी दिलचस्प बात बताई कि उन्होंने 27 साल की उम्र में निशानेबाज़ी शुरू की.

युवा सौरव चौधरी ने बताया कि जब से वह भारत के लिए खेल रहे हैं तब से वह एक के बाद एक टूर्नामेंट खेल रहे हैं और उन्हें घर जाने का भी बेहद कम मौक़ा मिलता है. सौरव चौधरी का सबसे बड़ा सपना ओलंपिक पदक जीतना है.

टोक्यो में पदक की सबसे बड़ी दावेदार मनु भाकर मानती हैं कि इस वर्ल्ड कप से उन्हें अपनी कमियों को जानने का अवसर मिला और अब वह अपने कोच के साथ मिलकर उन्हें दूर करने की कोशिश करेंगी.

स्कीट पुरुष टीम में स्वर्ण पदक जीतने वाले भारत के सबसे अनुभवी निशानेबाज़ों में से एक मेराज अहमद खान ने कहा कि यहां स्वर्ण पदक जीतने से उन्हें अपनी फ़ॉर्म का अहसास हुआ है और जब वह टोक्यो ओलंपिक में शूटिंग रेंज पर उतरेंगे तो उनके मन में इस स्वर्ण पदक की यादें होंगी. मेराज अहमद खान ने आगे कहा कि स्वर्ण पदक स्वर्ण पदक ही होता है चाहे आप जहां भी जीतें.

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भारतीय स्कीट टीम के चीफ़ कोच पूर्व निशानेबाज़ मनशेर सिंह ने कहा कि इस समय भारतीय निशानेबाज़ किसी भी देश की चुनौती का सामना करने के लिए तैयार है.

बेहद अनुभवी निशानेबाज़ संजीव राजपूत ने कहा कि वह फ़ाइनल में अपने स्कोर को बेहतर करने के लिए काम करेंगे. वह थोड़े बदलाव के साथ मेहनत करना चाहते हैं.

भारतीय निशानेबाज़ी संघ के अध्यक्ष रनिंदर सिंह ने कहा कि अब तो बस इसका इंतज़ार है कि टोक्यो ओलंपिक शुरू हो और खिलाड़ी ख़ुद दिखाए कि उनकी तैयारी कैसी है.

पिछली बार भी दिल्ली में चमके थे निशानेबाज़

दिल्ली इससे पहले साल 2019 में भी आईएसएसएफ़ शूटिंग वर्ल्ड कप का आयोजन कर चुकी है. तब भी अपनी मेज़बानी में भारत ने 21 स्वर्ण 6 रजत और तीन कांस्य सहित तीस पदक जीते थे.

इन पंद्रह निशानेबाज़ों की नज़र होगी पदक पर

टोक्यो ओलंपिक के लिए भारत के पंद्रह निशानेबाज़ों ने क्वालिफ़ाई किया है. उनके बारे थोड़ा बहुत जानना बहुत ज़रूरी है.

1. मनु भाकर केवल 19 साल की हैं लेकिन टोक्यो में पदक की उम्मीद का भार उन्हीं के कंधों पर सबसे ज़्यादा है. यह उनका पहला ओलंपिक है. वह 2018 के गोल्डकोस्ट राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीत चुकी है. शूटिंग वर्ल्ड कप में तो उनके नाम नौ स्वर्ण और एक रजत पदक है. मनु भाकर 10मी. पिस्टल में उतरेंगी.

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मनु भाकर: बीबीसी इंडियन स्पोर्टवुमन ऑफ़ द ईयर नॉमिनी

2. यशस्विनी देसवाल भी 10मी. पिस्टल स्पर्धा में हिस्सा लेंगी. उन्होंने इस वर्ल्ड कप में मनु भाकर को पीछे छोड़ते हुए स्वर्ण पदक जीतकर ख़ूब सुर्खियां बटोरी. वह 23 साल की हैं और पहली बार ओलंपिक खेलेंगी. इससे पहले उन्होंने 2019 में रियो में हुए विश्व कप में एक स्वर्ण और एक रजत पदक जीता था.

3. चिंकी यादव 25मी पिस्टल की खिलाड़ी हैं. 23 साल की चिंकी यादव ने इस वर्ल्ड कप में टीम स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता है. उनका यह पहला ओलंपिक है.

4. राही सरनोबत भी 25मी. पिस्टल में अपना दमख़म दिखाएंगी. तीस साल की राही सरनोबत 2010 के दिल्ली और 2014 के ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक के अलावा 2018 के जकार्ता एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक जीत चुकी है.

5. सौरव चौधरी 10मी. पिस्टल के माहिर है. 18 साल के सौरव चौधरी पर तमाम भारत की नज़र लगी है. वह मीडिया से दूरी रखना पसंद करते हैं और हॉ, ही, हूं में यानी बेहद संक्षिप्त जवाब देते है. वह 2018 के एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक के अलावा शूटिंग वर्ल्ड कप में नौ स्वर्ण पदक जीत चुके हैं.

6. अभिषेक वर्मा 31 साल के हैं और उनका इवेंट भी 10मी. पिस्टल है. वह 2018 के एशियन गेम्स में कांस्य पदक और पिछले शूटिंग वर्ल्ड कप में दो स्वर्ण पदक जीत चुके हैं.

7. दिव्यांश सिंह पंवार केवल 18 साल के हैं और 10मी. राइफ़ल उनका इवेंट है. उन्होंने कांस्य पदक के साथ इस शूटिंग वर्ल्ड कप में भारत का खाता खोला था. जूनियर वर्ल्ड कप में दो स्वर्ण पदक जीतकर वह सुर्ख़ियों में आए. वह विभिन्न वर्ल्ड कप में चार स्वर्ण पदक जीत चुके हैं.

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क़रीब 6 महीने बाद होने वाले टोक्यो ओलंपिक खेलों की क्या है तैयारी

8. दीपक कुमार भी 10मी. राइफ़ल के खिलाड़ी है. 33 साल के दीपक कुमार ने 2018 के एशियन गेम्स में रजत 2017 में हुई कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीता है.

9. अपूर्वी चंदेला भी 10मी. राइफ़ल की खिलाड़ी हैं. 28 साल की अपूर्वी चंदेला ने कॉमनवेल्थ गेम्स में साल 2014 में स्वर्ण और 2018 में कांस्य पदक जीता है.

10. अंजुम मोदगिल भी 10मी. राइफ़ल में अपनी महारथ रखती हैं. 27 साल की अंजुम मोदगिल 2018 के कॉमनवेल्थ गेम्स में रजत पदक पर निशाना साध चुकी हैं.

11. संजीव राजपूत राइफ़ल थ्री पोज़ीशन में हिस्सा लेंगे. 40 साल के संजीव राजपूत कॉमनवेल्थ गेम्स में साल 2006 में कांस्य, 2014 में रजत और 2018 में स्वर्ण पदक जीत चुके है.

12. एश्वर्य प्रताप सिंह भी राइफ़ल थ्री पोज़ीशन के खिलाड़ी है. 20 साल के एश्वर्य इस वर्ल्ड कप में एक स्वर्ण, एक रजत और एक कांस्य पदक जीतने में कामयाब रहे. उनके पास एशियन शूटिंग चैंपियनशिप के दो कांस्य पदक भी हैं.

13. तेजस्विनी सावंत भी राइफ़ल थ्री पोज़ीशन की बेहद अनुभवी खिलाड़ी हैं. उनके पास कॉमनवेल्थ गेम्स के तीन स्वर्ण, तीन रजत और एक कांस्य पदक है. 40 साल की तेजस्विनी ने इस वर्ल्ड कप में संजीव राजपूत के साथ मिलकर मिश्रित टीम में स्वर्ण पदक जीता.

14. मेराज अहमद खान स्कीट खिलाड़ी है. 45 साल की उम्र बताती हैं कि वह कितना अनुभव रखते हैं. उन्होंने इस वर्ल्ड कप में स्कीट के टीम मुक़ाबले में गुरजोत खंगूरा के साथ मिलकर स्वर्ण पदक जीता.

15. अंगदवीर सिंह बाजवा भी स्कीट शूटर है. 25 साल के अंगदवीर एशियन शूटिंग चैंपियनशिप में तीन स्वर्ण और एक रजत पदक जीतने का अनुभव रखते है.

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