टोक्यो ओलंपिक: भारत को पहलवानी में सुमित मलिक से पदक की उम्मीद

  • राखी शर्मा,
  • बीबीसी हिंदी के लिए
सुमित मलिक

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ओलंपिक खेलों में भारत ने हॉकी के बाद सबसे ज़्यादा पाँच मेडल कुश्ती में हासिल किए हैं. 1952 में केडी जाधव से शुरू हुआ मेडल जीतने का सिलसिला पिछले ओलंपिक में साक्षी मलिक ने जारी रखा. इस बार इन खेलों का आयोजन टोक्यो में होना है, जहाँ भारत का अबतक का सबसे बड़ा आठ पहलवानों का दल हिस्सा लेने जा रहा है.

उसी दल में से एक हैं हैवी वेट कैटेगरी के सुमित मलिक. सुमित 125 किलो ग्राम वर्ग में भारत की चुनौती पेश करेंगे. हैवी वेट कैटेगरी में भारत की नुमाइंदगी ओलंपिक में बहुत कम पहलवानों ने की है और उसे अब भी इसमें मेडल का इंतज़ार है.

मलिक कहते हैं, "हेवीवेट में इंडिया की तरफ से बहुत की कम अच्छी परफॉर्मेंस आती हैं. बारह साल बाद इस वेट कैटेगरी में मेरा क्वालिफिकेशन हुआ है. इस बात की काफ़ी ख़ुशी है."

भारतीय फ्री स्टाइल कुश्ती कोच जगमिंदर सिंह भी टोक्यो में मेडल को लेकर पूरी तरह से आ्श्वस्त हैं. उनके मुताबिक़ टोक्यो जाने वाला हर पहलवान मेडल का दावेदार है.

बीबीसी से बात करते हुए उन्होंने कहा, "इन पहलवानों की विश्व में रैंकिंग ही इस बात का प्रमाण है कि ओलंपिक में भी ये अच्छी पोज़िशन हासिल करेंगे."

"जब मैं 1980 के ओलंपिक खेलों में भाग लेने गया था, वहाँ एक बोर्ड पर लिखा था- ओलंपिक्स तक आना बहादुरी का काम है, और यहाँ से मेडल ले जाना क़िस्मत का. किसी भी कैटेगरी के 16 पहलवान विश्व के बेस्ट होते हैं. कोई भी किसी पर भारी पड़ सकता है."

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आसान नहीं था ओलंपिक का टिकट हासिल करना

सुमित के लिए ओलंपिक का टिकट हासिल करना बेहद मुश्किल रहा. बुल्गारिया में पिछले दिनों हुए क्वालिफिकेशन में उनके पास आख़िरी मौक़ा था, लेकिन तभी उनके पैर की पुरानी चोट उभर आई. टोक्यो में क्वालिफाई करने के लिए उन्हें सेमीफाइनल में जीतना ज़रूरी था, और सामने थे वेनेज़ुएला के पहलवान जोस डिएज़.

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बाउट में पेनकिलर्स लेकर उतरे सुमित ने एक पाँव के सहारे उन्हें 5-0 से चित किया और ओलंपिक में जाने का अपना सपना पूरा किया. टूर्नामेंट के फ़ाइनल में सुमित पहुँचे ज़रूर, लेकिन चोट की गंभीरता को देखते हुए उन्होंने फाइनल में नहीं उतरना ही मुनासिब समझा.

"इंजरी की वजह से मैंने फाइनल में नहीं उतरने का फ़ैसला किया. मेरी चोट काफ़ी बढ़ गई थी और मैं दो महीने बाद होने वाले ओलंपिक को देखते हुए किसी भी तरह की लापरवाही से बचना चाहता था."

सुमित से कोच जगमिंदर को भी उम्मीदें हैं, ज़ाहिर हैं सुमित में उन्हें मेडलिस्ट नज़र आता है.

वो कहते हैं, "सुमित हमारा बहुत अच्छा पहलवान है. उन्हें एशियन क्वॉलिफिकेशन में ही कोटा हासिल करना था लेकिन 10 दिन पहले ही उन्हें इंजरी हो गई. बुल्गारिया में भी वो ज़्यादा फिट नहीं थे लेकिन फिर भी उन्होंने क्वालिफाई किया."

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कॉमनवेल्थ खेलों में जीत चुके हैं पदक

2018 में अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित 28 वर्षीय सुमित रोहतक के कारोर गाँव से आते हैं. सुमित अपने मामा को पहलवानी करते देख बड़े हुए और उन्हीं से प्रभावित होकर उन्होंने छत्रसाल स्टेडियम में ट्रेनिंग लेना शुरू किया. सुमित ने अपनी ट्रेनिंग द्रोणाचार्य पुरस्कार से सम्मानित कोच महाबलि सतपाल और दो बार ओलंपिक मेडलिस्ट सुशील से हासिल की है.

2018 के कॉमनवेल्थ खेलों में सुमित ने 125 किलोवर्ग में गोल्ड मेडल जीता था, जबकि इन्हीं खेलों में सुशील कुमार ने 74 किलोवर्ग में गोल्ड जीता. सुमित अपनी कामयाबी का श्रेय भी सुशील कुमार को ही देते हैं.

"2018 कॉमनवेल्थ खेलों में उनके साथ गोल्ड मेडल जीतना बेहद ख़ास था. उन्होंने मुझे बहुत कुछ सिखाया है. मैं आज जो हूँ उन्हीं की बदौलत हूँ"

चोट की वजह से सुमित कुछ हफ़्तों तक प्रैक्टिस से दूर रहेंगे, लेकिन दो महीने बाद होने वाले टोक्यो ओलंपिक की तैयारियों के लिए वो एक पल भी गँवाना नहीं चाहते. इसलिए मैट से दूर होकर भी वो खुद को तैयार कर रहे हैं.

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वो कहते हैं, "ख़ाली वक़्त में मैं ईरान और रूस के पहलवानों की बाउट देखता हूँ. वो कौन से दांव लगाते हैं, उनके कौन से दांव से बचना है इसकी प्लानिंग चलती रहती है."

टोक्यो में 2020 में होने वाले ओलंपिक्स, कोरोना महामारी के चलते इस साल 23 जुलाई से खेले जाएँगे. अंतिम चरण की तैयारियों के लिए भारतीय पहलवानों का दल विदेश रवाना होगा.

ऐसे में खिलाड़ियों पर महामरी के असर के बारे में कोच जगमिंदर का कहते हैं, "कोराना के कारण तैयारियों पर असर सिर्फ़ भारतीय खिलाड़ियों पर ही नहीं, विदेशी पहलवानों पर भी होगा. हमारे पहलवान इस इवेंट की तैयारी पिछले 4-5 साल से कर रहे हैं."

"मैं बिना किसी दबाव के कह सकता हूँ कि कुश्ती में भारत का मेडल ज़रूर आएगा."

सुमित के अलावा टोक्यो के लिए पुरुष पहलवानों में बजरंग पूनिया, दीपक पूनिया और रवि दहिया के नाम शामिल हैं.

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