एक क़दम आगे या दो क़दम पीछे

चैम्पियंस ट्रॉफ़ी के लिए संभावित खिलाड़ियों की सूची में राहुल द्रविड़ को शामिल करना हैरान करने वाला है.

Image caption द्रविड़ वनडे टीम का हिस्सा नहीं थे

यह उनका क़द और उपलब्धि ही है, जिसके कारण लोग इस क़दम को पीछे हटने वाले नहीं कर रहे हैं.

मुझे नहीं पता कि ख़ुद राहुल द्रविड़ इस बारे में क्या सोच रहे होंगे. क्योंकि वे ज़िंदगी में आगे बढ़ चुके थे और अब एकाएक उन्हें अपने भविष्य के रास्तों में कुछ बदलाव करना पड़ रहा होगा.

भारत एक ऐसे खिलाड़ी के पास क्यों जा रहा है, जिससे उसने भविष्य के टीम का गठन करने के लिए पीछे छुड़ा लिया था. और तो और बाद में सौरभ गांगुली को भी नहीं बख़्शा गया.

हममें से किसी ने भी इन बदलावों की आलोचना नहीं की क्योंकि भारतीय टीम में नए और प्रतिभाशाली क्रिकेटरों की आवश्यकता थी ताकि समय के साथ आगे बढ़ा जा सके.

पिछले एक वर्ष के दौरान भारतीय टीम का बेहतरीन रिकॉर्ड दिलीप वेंगसरकर के उस फ़ैसले को सही साबित करता है, जिसके तहत उन्होंने कुछ लक्ष्य तय किए थे और इन्हें हासिल करने के लिए कड़े फ़ैसले भी लिए थे.

लेकिन अब ऐसा लगता है कि एक बार फिर हम हड़बड़ा गए हैं. लेकिन क्यों? क्या इसलिए क्योंकि हमने ट्वेन्टी-20 विश्व कप में अच्छा नहीं किया?

कहीं ऐसा तो नहीं कि शॉर्ट पिच गेंदों पर भारतीय टीम की कमज़ोरी खुल कर सामने आने के बाद चयनकर्ताओं ने मजबूरी में द्रविड़ के नाम पर विचार किया, ताकि मध्यक्रम में थोड़ी स्थिरता आ सके.

ये सब ऐसे समय में हो रहा है जब हम सभी ये मान चुके थे कि शॉर्ट पिच गेंदों पर भारतीय टीम की परेशानी ख़त्म हो चुकी है.

अगर मामला ये है तो इस क़दम को व्यावहारिक कहा जा सकता है, लेकिन सवाल फिर भी है कि ट्वेन्टी-20 विश्व कप में जो भी हुआ उससे हम इतने क्यों विचलित हो गए.

हम उन बल्लेबाज़ों पर भरोसा क्यों नहीं कर रहे जो पिछले एक साल से भारत को क़रीब-क़रीब हर सिरीज़ जितवा रहे हैं.

ये सच बात है कि गौतम गंभीर या रोहित शर्मा को टीम में अपनी जगह पक्की नहीं समझनी चाहिए. क्रिकेट की दुनिया ये भी जानती है कि सुरेश रैना को उठती हुई गेंदे परेशान करती हैं.

लेकिन द्रविड़ की वापसी एक अस्थायी समाधान हो सकता है. इससे दीर्घकालिक उद्देश्य पूरे नहीं होते. श्रीकांत के चयन आयोग ने आगे बढ़ने के दौर में एक क़दम पीछे हटा लिया है.

वो भी ख़ासकर उस समय जब यही लोग हमें ये बताते नहीं थकते कि भारत में युवा प्रतिभा की कमी नहीं है.

तो क्यों नहीं हम इस समस्या की जड़ तक जाकर जवाब ढूँढ़ने की कोशिश करते हैं. लेकिन इसकी बजाए एक ऐसे खिलाड़ी को वापस बुला रहे हैं, जो ख़ुद भी इसे एक रहस्य समझ रहा होगा कि वो वनडे टीम में वापस आ गया है.

हममें से कुछ लोग तो यह भी मान रहे होंगे कि अगर चयन समिति का प्रमुख दक्षिण का व्यक्ति नहीं होता या फिर भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) का सर्व शक्तिशाली सचिव इसी राज्य से नहीं होता, तो द्रविड़ की वापसी नामुमकिन थी.

लेकिन ये सब कहते हुए कि हमें खिलाड़ियों पर भरोसा करना चाहिए ख़ासकर वैसा खिलाड़ी जो द्रविड़ जैसी प्रतिभा से भरा हुआ है.

उन्होंने आने वाले क्रिकेटरों के लिए उच्च मानदंड स्थापित किए हैं. और इसकी कोई वजह नहीं कि वे दोबारा सफल नहीं होंगे.

ेकिन अगर द्रविड़ चूक गए तो यह काफ़ी शर्मनाक होगा. वो भी ऐसे समय में जब ये खिलाड़ी अपने करियर की संध्या वेला में है.