डोपिंग से बचना बहुत ज़रूरी

  • 1 अगस्त 2009
महेंद्र सिंह धोनी
Image caption भारतीय क्रिकेटर नहीं चाहते कि वाडा के नियम उन पर लागू हों

भारत के क्रिकेट खिलाड़ियों ने विश्व एंटी डोपिंग एजेंसी (वाडा) की मान्यता को स्वीकार करने से साफ़ इनकार कर दिया है.

भारतीय क्रिकेट बोर्ड भी इस मामले को गंभीरता से नहीं ले रहा है. इसीलिए तो 31 जुलाई की अंतिम तारीख़ होने के बावजूद इस बात पर विचार करने के लिए बोर्ड की बैठक दो अगस्त को रखी गई है.

ग़ौरतलब है कि डोपिंग मामले को लेकर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) बहुत चिंतित है. कारण स्पष्ट है. अगर क्रिकेट को खेलों की दुनिया में अपनी जगह बनाए रखनी है तो उसे नियमों का भी पालन करना पड़ेगा. तभी तो दुनिया के सभी खेल संघ वाडा के नियमों को मानते हुए ही अपने-अपने खेलों का संचालन कर रहे हैं.

भारतीय खिलाड़ियों की आपत्ति का कारण भी बहुत बेजान है. सुरक्षा और असुविधा की बात तो वाडा कभी मानता ही नहीं है. इस बारे में फीफा समेत कई खेल संघ वाडा से मुक़ाबला कर चुके हैं लेकिन आख़िर सभी को बात माननी ही पड़ी.

वाडा केवल यही चाहता है कि खिलाड़ी अपने पूरे दिन में से सिर्फ़ एक घंटे के लिए उन्हें बताए की वह कहाँ हैं. ताकि वाडा को उनकी ज़रूरत हो तो उनसे संपर्क स्थापित किया जा सके और वर्जित दवाओं के लिए परीक्षण की सुविधा तैयार करवाई जा सके. खिलाड़ी कब कहाँ होगा इस बात की जानकारी वाडा के चुने हुए अधिकारियों के अलावा किसी के पास नहीं होती.

आपत्ति

खिलाड़ियों का यह कहना बेबुनियाद है कि उन पर बेबात पाबंदियां लगाई जा रही हैं. क्रिकेट को अगर दुनिया में अन्य खेलों के बीच अपनी साख बनाए रखनी है तो उसे नियम तो मानने ही पड़ेंगे. तभी यह बात लागू की जा रही है.

भारतीय क्रिकेट बोर्ड ने भी इसे गंभीरता से नहीं लिया है. तभी तो बोर्ड वाडा की समयसीमा ख़त्म होने के बाद अपनी बैठक रखी है. बोर्ड को इस बात की जानकारी छह महीने पहले से ही थी.

Image caption शेन वार्न प्रतिबंधित दवाओं के दोषी पाए गए थे और उन पर एक साल का प्रतिबंध लगा था

खिलाड़ियों से भी न्यूज़ीलैंड दौरे से पहले बातचीत हुई थी और जिन खिलाड़ियों का नाम वाडा की सूची में है उन्हें भी यह बात पता थी. फिर भी जुलाई से पहले किसी ने इसकी परवाह नहीं की.

अब आईसीसी के लिए मुश्किल ये है कि उन्हें जब क्रिकेट के लिए विश्व में अपनी बात कहनी होगी तो तुरंत ही वाडा के नियम नहीं मानने का इल्जाम लगेगा और फिर प्रायोजक खोजना भी मुश्किल हो सकता है.

डोप का दाग

आखिर क्रिकेट में वर्जित दवाओं का प्रयोग कोई नई बात नहीं है. ऑस्ट्रेलिया के शेन वार्न और पाकिस्तान के मोहम्मद आसिफ़ तो पकड़े भी गए और उन्होंने सज़ा भी भुगती.

वाडा का कहना स्पष्ट है कि खिलाड़ी को इतनी सी जानकारी देनी है कि वो सुबह छह बजे से रात 11 बजे के बीच किसी एक घंटे के लिए कब उपलब्ध है.

ये जानकारी गुप्त तो रखी ही जाती ही साथ ही इसमें एक दिन पहले तक बदलाव की भी गुंजाइश है. ये सारी बातें सिर्फ़ उस समय के लिए लागू हैं जब खिलाड़ी अपने खेल से दूर छुट्टी मना रहा होता है.

वाडा के नियम उल्लंघन के मामले में बहुत सख्त हैं. मैनचेस्टर यूनाइटेड के पूर्व खिलाड़ी एंडी कोल का ही उदाहरण लीजिए. वे अपना घर बदलने के बाद वाडा को अपने नए घर का पता देना भूल गए.

तीन बार उनकी खोज हुई और नहीं मिलने पर उनके क्लब को निलंबन का नोटिस आ गया. तब जाकर सभी को ग़लती का अहसास हुआ और वाडा से माफ़ी मांगी गई.

क्रिकेट को भी अपनी छवि साफ़ रखने के लिए वाडा के नियम लागू करने की सख्त ज़रूरत है, लेकिन भारतीय खिलाड़ी अगर नहीं माने तो सब कुछ पर पानी फिर जाएगा.

शायद भारतीय बोर्ड के अधिकारी भी यही चाहते हैं ताकि खेल पर उनकी पकड़ कमज़ोर न पड़े. क्योंकि अगर ऐसा हुआ तो फिर बोर्ड के पैसे का लोहा कौन मानेगा.

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