'भूपति और मैं साथ खेलते तो अच्छा रहता'

  • 12 सितंबर 2009
पेस
Image caption यूएस ओपन के डबल्स के फ़ाइनल में पेस और भूपति का मुक़ाबला होगा

भारतीय टेनिस खिलाड़ी लिएंडर पेस को इस बात का मलाल है कि वो और महेश भूपति एक साथ नहीं खेल रहे हैं. यूएस ओपन में डबल्स फ़ाइनल में उनका मुकाबला है महेश भूपति और उनके जोड़ीदार से है.

बारिश के कारण खेल रद्द कर दिया गया है और अब शनिवार को ये फ़ाइनल खेला जाएगा.

मैने उनसे उनके यूएस ओपन के मैचों और भारतीय टेनिस के भविष्य के बारे में उनके विचार जानने चाहे.

पेश हैं लिएंडर पेस के साथ हुई बातचीत के कुछ अंश.

लिएंडर पेस इस बार यूएस ओपन कैसा रहा आपके लिए?

बहुत अच्छा लग रहा है इस बार भी. मुझे लगता है कि यह तीसरी या चौथी बार है कि मैं या तो फ़ाइनल में पहुंचा हूं या खिताब भी जीता हूं. इसलिए काफ़ी खुश हूं कि मैं फिर डबल्स के फ़ाइनल में पहुंचा हूं लेकिन अभी थोड़ा काम बाकी है.

और इस बार शायद पहली बार आप और महेश आमने सामने हैं फ़ाइनल मुक़ाबले में?

बहुत साल पहले जब मैंने महेश को डबल्स पार्टनर के रूप में चुना था तो यही मकसद था कि दोनों साथ खेलेंगे तो अच्छा रहेगा और देश का नाम होगा.

हम लोगों ने साथ खेलकर काफ़ी मैच भी जीते लेकिन अब ऐसा हो गया है कि हम दोनों ही दूसरे जोड़ीदारों के साथ खेल रहे हैं. मैं समझता हूं कि अगर हम दोनों साथ खेलें तो भारत के लिए अच्छा होगा.

आप और महेश भूपति के बाद भारतीय टेनिस कैसा होगा, उभरते हुए खिलाड़ियों से आपको क्या उम्मीदें हैं?

सानिया मिर्ज़ा का तो प्रदर्शन कुछ ख़राब हो गया है. लेकिन सोमदेव देववर्मन तो बहुत अच्छे से खेल रहे हैं. उन्होंने यूएस ओपन में क्वालिफ़ाइंग मैच खेलकर मेन ड्रा में भी अच्छा प्रदर्शन किया. उनकी रैंकिंग भी बढ़ती जा रही है. वह काफ़ी सोच समझकर योजनाबद्ध तरीके से खेल रहे हैं. उन्होंने अच्छा फ़िटनेस ट्रेनर रखा है, अच्छा कोच है, वह बहुत अच्छी टीम बनाकर खेल रहे हैं. इसीलिए उनका प्रदर्शन भी बहुत अच्छा है.

जूनियर्स में यूकी भांभरी काफ़ी अच्छे जा रहे हैं. उन्हें अभी एक दो साल लगेगा सीनियर्स के स्तर पर पहुंचने में. लेकिन उनका खेल बहुत अच्छा है, उनका कद भी लंबा है जो उनको काफ़ी मदद देगा.

मैं समझता हूं कि अगर वह अपनी ट्रेनिंग और फ़िज़िकल फ़िटनेस पर अभी से ध्यान दें तो वह बहुत ही अच्छे खिलाड़ी बनेंगे. मैं आपको यह बता दूं कि भारतीय टेनिस का भविष्य हैं यूकी भांभरी.

भारत में अभी जैसे नए खिलाड़ी आ रहे हैं तो क्या आप संतुष्ट हैं भारतीय टेनिस के विकास से?

देखिए, पहले तो भारत में सात या आठ वर्षों में एक अच्छा टेनिस खिलाड़ी पैदा होता था. लेकिन अब तो हमारे पास पाँच या छह अच्छे खिलाड़ी मौजूद हैं. यह अच्छी बात है और इन खिलाड़ियों से हमें खुश होना चाहिए. और इस बात की ज़रूरत है कि इनको हम ज़बरदस्त ट्रेनिंग दें और उनके फ़ोकस को बनाए रखने के लिए उनकी सहायता करें. इससे उनका प्रदर्शन अच्छा होगा.

वे अच्छा खेलेंगे तो उनका नाम होगा और भारत का भी नाम होगा और साथ ही अन्य युवा भी फिर टेनिस की ओर रूचि लेंगे.

चूंकि उनको लगेगा कि हां टेनिस में भी शोहरत है, पूरी दुनिया घूम सकते हैं, और अच्छा पैसा कमा कर अपने घर वालों की देखभाल भी कर सकते हैं. तो यह ज़रूरी है कि इन खिलाड़ियों को प्रोफ़ेशनल ट्रेनिंग दी जाए.

तो आपको क्या लगता है कि भारत में टेनिस खिलाड़ियों के लिए अच्छी सुविधाएं हैं और क्या सही ट्रेनिंग उनको मिल पा रही है?

भारत में पिछले 10 से 15 वर्षों में सुविधओं में काफ़ी बेहतरी आई है. कई टेनिस स्टेडियम, फ़िटनेस सेंटर, जिमनेज़ियम जैसी सुविधाओं में बहुत बेहतरी हुई है. और खिलाड़ियों में फ़िटनेस बढ़ाने औऱ खान-पान का ध्यान रखने से संबंधित मामलों में जागरूकता भी बढ़ी है.

लेकिन मैं समझता हूं कि भारत में खिलाड़ियों में प्रोफ़ेशनल ट्रेनिंग की कमी है.

हमारे देश में प्रतिभा की कमी नहीं है. बस उनको सही ट्रेनिंग देने की बात है. इसीलिए आप देखिए ज़्यादातर अच्छे खिलाड़ी अमरीका और यूरोप के देशों में जाकर ट्रेनिंग लेते हैं. जितने खिलाड़ी हैं भारत में उनको अच्छी ट्रेनिंग दी जाए तो बहुत अच्छे खिलाड़ी उभरेंगे.

तो भारत में टेनिस खिलाड़ियों को दी जाने वाली ट्रेनिंग और अमरीका और यूरोप के देशों में जो ट्रेनिंग दी जाती है, उनमें क्या फ़र्क़ होता है?

भारत में शुरू से ही खिलाड़ियों पर ज़ोर दिया जाता है कि वह बस मैच जीतें. उनको सही तकनीक शुरू से ही नहीं सिखाते और फ़िटनेस पर ध्यान नहीं देते.

अमरीका में मसलन शुरू से ही तकनीक भी सिखाते हैं और फ़िटनेस औऱ खान-पान पर भी पूरा ध्यान दिया जाता है. इसीलिए सीनियर्स तक आते आते उनकी फ़िटनेस भी बेहतर होती है और तकनीक भी धारदार होती जाती है. और यह सब प्रोफ़ेशनल ट्रेंनिंग के साथ ही किया जा सकता है.

अच्छा यह भी बताइए कि अभी कितने साल और खेलते रहने का इरादा है?

अभी तो बहुत जान है इन पैरों में, अभी तो कई साल तक खेल सकते हैं...हा हा हा...

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