'खेलों की तैयारी में देरी नहीं'

  • 14 सितंबर 2009
कॉमनवेल्थ की तैयारी

भारतीय ओलंपिक संघ के अध्यक्ष सुरेश कलमाडी ने कहा है कि दिल्ली में अगले साल होने वाले कॉमनवेल्थ खेलों की तैयारी को लेकर देरी की जो बातें कही जा रही हैं, वे बेबुनियाद हैं.

उन्होंने कहा है कि खेल की तैयारी में कोई भी देरी या कमी नहीं रखी जा रही है और खेल के लिए ज़रूरी काम और तैयारियों को समय पर पूरा कर लिया जाएगा.

कलमाडी का बयान ऐसे समय में आया है जब कॉमनवेल्थ गेम्स फेडरेशन के प्रमुख माइक फ़ेनेल ने कॉमनवेल्थ खेल की तैयारियों पर असंतोष जताते हुए इस संबंध में भारतीय प्रधानमंत्री से मिलने की इच्छा जताई थी.

फ़ेनेल ने कहा था कि दिल्ली कॉमनवेल्थ गेम्स लगभग एक साल दूर रह गए हैं और अधूरी तैयारियों को देखकर लगता है कि ऐसे में भारतीय प्रधानमंत्री को सूचित किया जाना आवश्यक है.

सोमवार को पत्रकारों से बातचीत करते हुए कलमाडी ने कहा, "खेलों के दौरान इस्तेमाल होने वाले अधिकतर भवनों, प्रांगणों को तैयार करने का काम दिसंबर तक पूरा करने का प्रयास है. अगले साल मार्च तक पूरी तरह से तैयारी हो जाएगी."

हालांकि उन्होंने कहा कि खेल के लिए फिलहाल जारी तैयारी का ज़िम्मा उनपर नहीं, बल्कि निर्माण कार्य में लगी संस्थाओं पर है. उन्होंने कहा कि उनकी भूमिका निर्माण कार्य पूरा होने के बाद शुरू होती है.

उन्होंने यह भी माना कि खेल समन्वय समिति की मई महीने में जो बैठक हुई थी उसमें खेलों की तैयारी को लेकर कुछ मुद्दे उठाए गए थे. कलमाडी कहते हैं कि ऐसे बड़े आयोजनों के दौरान कुछ मुद्दे तो सामने आते तो हैं पर इसका यह मतलब नहीं है कि तैयारी में कुछ छूट रहा है. समय पर और सही ढंग से खेलों का आयोजन होगा.

सुरक्षा पर गंभीर

सुरेश कलमाडी ने बताया कि खेल की तैयारी के लिए जो काम चल रहा है और जो प्रयास किए जा रहे हैं, उनमें केंद्रीय खेल मंत्री, दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की ओर से पूरा सहयोग मिल रहा है.

कलमाडी ने कहा कि इस वक़्त एक बड़ी चिंता खेल के दौरान सुरक्षा को लेकर भी है. इस सिलसिले में 12 सितंबर को गृहसचिव के साथ आयोजन समिति की एक अहम बैठक भी हुई है.

देश की कई उच्च सुरक्षा एजेंसियों के सुरक्षा कमांडरों की इस सिलसिले में 23 और 24 सितंबर को बैठक होनी है जिसमें इस रणनीति पर विचार किया जाएगा कि किस तरह खेलों का आयोजन सुरक्षित और चुस्त निगरानी के बीच संपन्न कराया जाए.

दरअसल, पिछले कुछ दिनों के दौरान मैट्रो हादसों से लेकर खेल परिसरों के निर्माण की रफ़्तार को लेकर गुणवत्ता और समय पर पूरे होने के सवाल उठाए जा रहे हैं.

कुछ जानकारों का मानना है कि जिस गति से परियोजनाओं को पूरा करने का काम किया जा रहा है, उससे इस बात की आशा कम होती नज़र आती है कि अगले वर्ष कॉमनवेल्थ खेलों के आयोजन तक निर्माण और बाकी तैयारियों का काम पूरा किया जा सकेगा.

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