बहादुर और अद्वितीय हैं सचिन

  • 13 नवंबर 2009
सचिन तेंदुलकर
Image caption क्रिकेटर अब्दुल क़ादिर के अनुसार सचिन जैसे खिलाड़ी बार-बार पैदा नहीं होते.

सचिन तेंदुलकर ने अपने जीवन का पहला अंतरराष्ट्रीय टेस्ट मैच कराची में खेला, ये बात वर्ष 1989 की है. मुझे याद पड़ता है कि उनके ख़िलाफ़ पहली गेंद काफ़ी तेज़ फेंकी गई थी वो गेंद खेलने से सचिन चूक गए. लेकिन एक खिलाड़ी जिसकी उम्र काफ़ी कम थी उसने जिस बहादुरी के साथ आगे बढ़कर खेलने की कोशिश की उससे मुझे अंदाज़ा हो गया था कि आगे चलकर वह बड़ा खिलाड़ी बनेगा.

मैं किसी खिलाड़ी का इस बुनियाद पर हौसला नहीं बढ़ाता था कि वो किस देश का है या जूनियर खिलाड़ी है. मेरी आदत थी कि अगर किसी जूनियर खिलाड़ी के अंदर आत्मविश्वास में कमी देखी तो उसकी मदद करता. इसी तरह कराची टेस्ट के दौरान जब भी आते-जाते मैदान पर सचिन से मुलाक़ात होती थी, मैं उन्हें शाबाशी देता और कहता था कि तुम अच्छा खेल रहे हो और आगे चलकर नाम करोगे.

कराची के बाद पेशावर में वनडे मैच था पर बारिश की वजह से मैच को रद्द करना पड़ा. लेकिन दर्शकों की भीड़ को देखकर मैनेजमैंट ने दोनों टीमों के बीच दोस्ताना मुक़ाबला कराने का फ़ैसला किया. मैच खेला गया. भारत की ओर से श्रीकांत के साथ सचिन सलामी बल्लेबाज़ के रुप में आए. मैंने पहला ओवर मेडन फेंका. लेकिन मैंने अपने दूसरे ओवर के लिए आने से पहले सचिन से कहा कि तुम एकदम नहीं सोचना कि एक बड़े गेंदबाज़ के खिलाफ़ खेल रहे हो और छक्का मारने की कोशिश करना.

फिर वैसा ही हुआ. मेरी पहली ही गेंद पर सचिन ने छक्का जड़ दिया. उसके बाद उसने एक और छक्का मार दिया. फिर क्या, तीसरा छक्का मारा जिसका कैच अज़ीम अफ़ीस से छूट गया. उसके बाद उसने एक और छक्का लगा दिया. इस तरह उसने मेरे एक ओवर में चार छक्के लगा दिए.

यादगार छक्के

Image caption अब्दुल क़ादिर के अनुसार सचिन की तकनीक अनूठी है

लेकिन यहाँ ये बात स्पष्ट करना बहुत ही ज़रूरी है कि मैंने कोई लूज़ गेंद नहीं फेंकी थी, बल्कि अपने तजुर्बे और तकनीक के मुताबिक़ सही ढंग से गेंद डाली थी. लेकिन सचिन ही था जिसने मेरे एक ओवर में चार छक्के मारे. न उसके बाद और न उससे पहले मेरे एक ओवर में किसी और खिलाड़ी ने चार छक्के लगाए.

लेकिन सचिन यहीं नहीं रुके, उन्होंने अगले ओवर में मुश्ताक़ के एक ओवर में भी चार छक्के लगा दिए.

मैं समझता हूँ कि सचिन जैसे खिलाड़ी बार-बार पैदा नहीं होते. मेरी अपनी राय है कि सचिन के बारे में कुछ कहने के लिए शब्द का दामन तंग नज़र आता है. सचिन एक महान खिलाड़ी होने के साथ-साथ एक अच्छे इंसान भी हैं.

जहाँ तक लोग पूछते हैं कि मेरी गेंद पर सचिन के छक्के लगाने के बाद मेरे करियर पर बुरा असर पड़ा तो मैं कहना चाहता हूँ कि ऐसा बिल्कुल नहीं हुआ. सच तो यह है कि जब सचिन पाकिस्तान में सीरिज़ खेलकर चले गए तो मैं उनके लिए दुआएं करता था कि या अल्लाह उसे ऊँचा मुक़ाम दे.

मैंने देखा कि अगले दो-तीन साल में उसका नाम हो चुका था.

जहाँ तक एक बल्लेबाज़ और खिलाड़ी के रुप में सचिन की ख़ासियत की बात है तो उनकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वो बहादुर हैं. उनकी तकनीक काफ़ी अच्छी है. वो अद्वितीय हैं.

मैं समझता हूँ कि उनकी तकनीक की कोई आलोचना नहीं कर सकता. हालाँकि दुनिया में ऐसे कई बड़े खिलाड़ी हुए हैं जिनके प्रदर्शन पर तो बात नहीं होती लेकिन तकनीक पर सवाल उठाए जाते हैं. लेकिन सचिन उससे परे हैं और शायद वो एक परिपूर्ण खिलाड़ी हैं.

(बीबीसी हिंदी के खेल संपादक मुकेश शर्मा से बातचीत पर आधारित)

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