भारत ने भी दिखाया अपना दम

भारतीय टीम

नेहरू कप और सैफ़ चैम्पियनशिप जीतना, दो दशक बाद राष्ट्रीय फ़ुटबॉल संगठन में किसी नए व्यक्ति का आना और भारतीय कप्तान बाइचुंग भूटिया को क्लब से निष्कासित करना, भारतीय फ़ुटबॉल जगत की प्रमुख घटना रही.

लेकिन नि:संदेह साल की सबसे प्रमुख उपलब्धि रही नेहरू कप जीतना. भारत ने अगस्त में हुए नेहरू कप के फ़ाइनल में सीरिया को हराकर ख़िताब पर क़ब्ज़ा किया.

भारतीय टीम राउंड रॉबिन मैच में लेबनॉन और सीरिया से हार गई थी. लेकिन फ़ाइनल में टीम ने शानदार प्रदर्शन किया और टाई ब्रेकर में जीत हासिल कर ली.

इस जीत से गदगद भूटिया और टीम के कोच बॉब हॉटन ने यहाँ तक ऐलान कर दिया कि अब भारतीय फ़ुटबॉल टीम में इतना दमख़म है कि वो एशिया की किसी भी शीर्ष टीम को मात दे सके.

भूटिया

इस प्रतियोगिता में ही भूटिया ने एक और रिकॉर्ड अपने नाम किया. वे पहले भारतीय फ़ुटबॉल खिलाड़ी बने, जिन्होंने देश के लिए 100 मैच खेले हों.

लेकिन इसी साल जून में उनके क्लब मोहन बगान ने उन्हें छह महीने के लिए निलंबित कर दिया. कारण था एक प्रदर्शनी मैच में शामिल न होना और टीम की ट्रेनिंग में शामिल न होना.

बाद में भूटिया ने ईस्ट बंगाल के साथ अनुबंध साइन किया हालाँकि मोहन बगान के साथ उनका एक साल का क़रार बचा हुआ है.

इस मामले को लेकर कड़वी क़ानूनी लड़ाई चली और भूटिया को अंतरिम राहत मिली कि वे उस समय तक अपनी पसंद के क्लब से खेल सकते हैं, जब तक कि कोई फ़ैसला नहीं आ जाता.

साल के आख़िर में भारत की अंडर-23 टीम ने बांग्लादेश में हुए सैफ़ फ़ुटबॉल टूर्नामेंट में ख़िताब जीत लिया. फ़ाइनल में भारत ने मालदीव को हराया.

पिछले साल भूटिया के नेतृत्व में भारत की सीनियर टीम इस प्रतियोगिता के फ़ाइनल में मालदीव से हार गई थी.

इस साल ऑल इंडिया फ़ुटबॉल फ़ेडरेशन की कमान वर्षों से उपाध्यक्ष रहे प्रफुल्ल पटेल को सौंप दी गई. उन्होंने प्रियरंजन दासमुंशी का स्थान लिया, जो बीमार हैं और पिछले साल अक्तूबर से ही कोमा में हैं.

सहायता

प्रफुल्ल पटेल ने कमान संभालते ही भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) से 25 करोड़ रुपए की सहायता राशि ली.

इन सब उपलब्धियों और चर्चाओं के बावजूद भारत के हिस्से में काफ़ी कम अंतरराष्ट्रीय मैच आए और उसकी रैंकिंग 142वीं ही बनी रही.

नेहरू कप के अलावा भारत ने अंतरराष्ट्रीय मैच के नाम पर हांगकांग के साथ मैत्री मैच खेला जिसमें वे 1-2 से हार गए.

गोवा में भारती एयरटेल के साथ मिलकर फ़ुटबॉल एकेडेमी बनाने की योजना ज़मीन विवाद के कारण रद्द हो गई. हरियाणा ने अपनी रुचि तो दिखाई, लेकिन उसे भी ज़मीन नहीं मिली.

भारतीय फ़ुटबॉलर सुनील छेत्री का इंग्लैंड के प्रोफ़ेशनल लीग में खेलने का सपना पूरा न हो सका. पहले तो कोवेन्ट्री सिटी ने उन्हें टीम में नहीं लिया और दूसरी बार उन्हें वर्क परमिट नहीं मिल पाया, जबकि क्वींस पार्क रेंजर्स के लिए वे चुन लिए गए थे.

ये साल भारतीय महिला फ़ुटबॉल टीम के लिए शर्मनाक रहा क्योंकि उन्हें फ़ीफ़ा की रैंकिंग से हटा दिया गया.

कारण था पिछले 18 महीनों में उनका एक भी अंतरराष्ट्रीय मैच न खेलना. इस मामले में फ़ुटबॉल फ़ेडरेशन की भी काफ़ी आलोचना हुई.

घरेलू फ़ुटबॉल के मोर्चे पर 2008-09 के सत्र में आई-लीग चैम्पियन बनी चर्चिल ब्रदर्स की टीम. तमिलनाडु में हुए संतोष ट्रॉफ़ी नेशनल चैम्पियनशिप का ख़िताब गोवा ने जीता.

देश की दो अन्य प्रतिष्ठित प्रतियोगिताओं डूरंड कप और आईएफ़ए शील्ड का ख़िताब भी चर्चिल ब्रदर्स ने जीता.

अंतरराष्ट्रीय फ़ुटबॉल

वर्ष 2009 फ़ुटबॉल की दुनिया में रिकॉर्ड का साल माना जाएगा. बार्सिलोना ने कमाल दिखाया तो रियाल मैड्रिड ने क्रिस्टियानो रोनाल्डो के लिए रिकॉर्ड ट्रांसफ़र फ़ीस दी.

जबकि यूरो 2008 की चैम्पियन टीम स्पेन ने लगातार 35 मैच में न हारने के ब्राज़ील के रिकॉर्ड की बराबरी की.

क्लब के स्तर पर देखें तो यह साल बार्सिलोना के नाम जाता है. पेप ग्वारडियोला ने बार्सिलोना को सफलता की ऊँचाई दिखाई.

टीम ने किंग्स कप भी जीता, साथ ही चैम्पियंस लीग का ख़िताब भी अपने नाम कर लिया. साल के अंत में बार्सिलोना ने वर्ल्ड क्लब कप भी जीत लिया.

बार्सिलोना ने इंग्लिश प्रीमियर लीग की शीर्ष टीमों चेल्सी और मैनचेस्टर यूनाइटेड को मात देकर चैम्पियंस लीग का ख़िताब जीता.

बार्सिलोना के स्टार रहे अर्जेंटीना के लियोनेल मेसी, जिन्होंने चैम्पियंस लीग फ़ाइनल में शानदार प्रदर्शन किया. उन्हें दिसंबर में दुनिया का सर्वश्रेष्ठ फ़ुटबॉलर चुना गया.

संबंधित समाचार