हॉकी में आए दुर्दशा के दिन

  • 26 दिसंबर 2009
भारतीय टीम

एक क़दम आगे और तीन क़दम पीछे. वर्ष 2009 में भारतीय हॉकी की यही कहानी रही.

भारतीय हॉकी फ़ेडरेशन का भंग होना और हॉकी इंडिया को अंतरिम काम सौंपने के कारण इस खेल में ऐसी राजनीति गरमाई कि खेल गौड़ हो गया.

पुरुषों की एशिया कप हॉकी में भारतीय टीम पाँचवें स्थान पर रही तो जूनियर विश्व कप में टीम नौवें स्थान पर पहुँच गई.

भारतीय महिला हॉकी टीम ने ज़रूर एशिया कप में दूसरा स्थान हासिल करके वर्ष 2010 के विश्व कप में जगह बना ली.

भारतीय पुरुष टीम ने इस वर्ष सुल्तान अज़लानशाह कप ज़रूर जीता. इस प्रतियोगिता की अन्य टीमें थीं- न्यूज़ीलैंड, पाकिस्तान, मलेशिया और मिस्र.

काफ़ी उठा-पटक के बाद स्पेन के होसे ब्रासा को भारतीय टीम का कोच बनाया गया. लेकिन भारतीय टीम अगले साल होने वाली चैम्पियंस ट्रॉफ़ी के लिए क्वालीफ़ाई नहीं कर पाई.

स्थिति

अर्जेंटीना में क्वालीफ़ाइंग चैम्पियंस चैलेंज के दौरान भारतीय टीम को तीसरा स्थान तो ज़रूर मिला, लेकिन चैम्पियंस ट्रॉफ़ी के लिए क्वालीफ़ाई न कर पाने से इसका अंदाज़ा हो जाता है कि टीम किस स्थिति में है.

अर्जेंटीना दौरे से ठीक पहले संदीप सिंह को हटाकर राजपाल सिंह को टीम का कप्तान बना दिया गया और इसके लिए कोई वजह भी नहीं बताई गई.

भारतीय टीम ने कनाडा और अर्जेंटीना में कुछ मैच खेले लेकिन टीम को इसका कितना फ़ायदा मिला, इस पर कई सवाल हैं.

इस बीच हीरो होंडा वर्ष 2010 में होने वाले विश्व कप हॉकी को प्रायोजित करने को तैयार तो हो गया लेकिन अंतरराष्ट्री हॉकी फ़ेडरेशन ने भारत को 18 नवंबर तक हॉकी इंडिया के लिए चुनाव कराने की समयसीमा दे दी. जो विश्व कप आयोजित करने के लिए शर्त थी.

यहाँ भी समस्याएँ आ पड़ीं और अब समयसीमा 28 फरवरी तक कर दी गई है.

कुल मिलाकर इस साल भारतीय हॉकी की स्थिति डवाँडोल ही रही.

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