भारत का नाम रोशन करने वाले खिलाड़ी

गौतम गंभीर

बीजिंग ओलंपिक में कांस्य जीतने वाले विजेंदर सिंह, टेनिस स्टार लिएंडर पेस और सोमदेव देवबर्मन जैसे कुछ खिलाड़ियों ने वर्ष 2009 में खेल की दुनिया में भारत का नाम रोशन किया.

सोमदेव देवबर्मन (टेनिस)

24 वर्षीय सोमदेव देवबर्मन की प्रतिभा का अंदाज़ा पिछले साल जापान के ख़िलाफ़ डेविस कप मैच के दौरान ही लगा लिया गया था. लेकिन सोमदेव ने एटीपी चेन्नई ओपन के फ़ाइनल में जगह बनाकर इतिहास रच दिया. वे ऐसा करने वाले भारत के पहले खिलाड़ी बने. यूनिवर्सिटी ऑफ़ वर्जीनिया से ग्रेजुएट सोमदेव ने चेन्नई ओपन के फ़ाइनल में पहुँचने का रास्ता शानदार अंदाज़ में तय किया और कार्लोस मोया और इवा कार्लोविच को मात दी. चायनीज़ ताइपे के ख़िलाफ़ दूसरे दौर की जीत में सोमदेव ने भारतीय चुनौती का नेतृत्व किया जबकि दक्षिण अफ़्रीका को हराकर वर्ल्ड ग्रुप में जगह बनाने में भी उन्होंने अहम भूमिका निभाई. इस साल उन्होंने यूएस ओपन के सिंगल्स में खेलने का गौरव भी हासिल किया. सात साल बाद किसी भारतीय खिलाड़ी को ये मौक़ा मिला.

चिन्नास्वामी मुनियप्पा (गोल्फ़)

बचपन में एक रुपए के लिए कैडी की भूमिका निभाने वाले मुनियप्पा के लिए इंडियन ओपन जीतना एक सपना जैसा था. इस जीत के साथ ही मुनियप्पा रुकी ऑफ़ द ईयर चुने गए.

गौतम गंभीर (क्रिकेटर)

भारतीय सलामी बल्लेबाज़ गौतम गंभीर के लिए वर्ष 2009 शानदार रहा है. उन्होंने अक्तूबर में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद का प्रतिष्ठित सम्मान आईसीसी टेस्ट प्लेयर ऑफ़ द ईयर हासिल किया. इस साल एक बार वे टेस्ट खिलाड़ियों की रैंकिंग में नंबर वन भी बने. उन्होंने न्यूज़ीलैंड में दो शतक लगाए. श्रीलंका के ख़िलाफ़ सिरीज़ में उन्होंने अहमदाबाद और कानपुर टेस्ट में शतक लगाया. चार लगातार टेस्ट शतक लगाकर उन्होंने अपना नाम राहुल द्रविड़ और सुनील गावसकर के साथ शामिल कर लिया.

लिएंडर पेस (टेनिस)

उम्र के साथ-साथ लिएंडर पेस का खेल निखरता जा रहा है. वर्ष 2009 में उनके प्रदर्शन से कम से कम तो यही साबित होता है. 35 वर्षीय लिएंडर पेस ने अपने पार्टनर चेक गणराज्य के लूकास ड्लोही के साथ मिलकर फ़्रेंच ओपन टेनिस का ख़िताब अपने नाम किया. पेस और ड्लोही ने फ़ाइनल में दक्षिण अफ़्रीका के वेस्ली मूडी और बेल्जियम के डिक नॉर्मन की जोड़ी को मात दी. विंबलडन में पहले ही दौर में बाहर हो जाने वाले पेस और ड्लोही की जोड़ी ने यूएस ओपन में भी ख़िताबी जीत हासिल की. उन्होंने फ़ाइनल में महेश भूपति और मार्क नोल्स को हराया. ये लिएंडर पेस का 10वाँ ग्रैंड स्लैम ख़िताब था. यूएस ओपन में ही मिक्स्ड डबल्स में भी वो अपनी पार्टनर कारा ब्लैक के साथ ख़िताब के क़रीब आ गए थे लेकिन फ़ाइनल में वे हार गए.

सुब्रत पॉल (फ़ुटबॉल)

भारतीय टीम के इस गोलकीपर ने उतार-चढ़ाव से भरपूर अपना अब तक का करियर भूलते हुए भारत को नेहरू कप में जीतने में अहम भूमिका निभाई. भारत ने नेहरू कप के फ़ाइनल में सीरिया को पेनल्टी शूटआउट में 6-5 से मात दी. इस जीत के साथ भारत ने न सिर्फ़ अपने ख़िताब की रक्षा की बल्कि देश को एक नया हीरो भी मिल गया. सुब्रत पॉल वही गोलकीपर हैं जो डेम्पो के स्ट्राइकर क्रिस्टियानो जूनियर से टकरा गए थे, क्रिस्टियानो पहले तो बेहोश हुए फिर उनकी मौत भी हो गई. लेकिन नेहरू कप के प्रदर्शन ने सुब्रत पॉल के करियर में नई जान फूँक दी. उन्हें इस साल ञल इंडिया फ़ुटबॉल फ़ेडरेशन ने साल का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी भी चुना. किसी गोलकीपर को पहली बार इस सम्मान के लिए चुना गया.

विजेंदर सिंह (मुक्केबाज़ी)

पिछले साल बीजिंग ओलंपिक में कांस्य पदक जीतने वाले विजेंदर सिंह ने इस साल यह साबित कर दिया कि बीजिंग में उनका प्रदर्शन कोई तुक्का नहीं था. इस साल सितंबर में विश्व चैम्पियनशिप में कांस्य पदक जीतकर उन्होंने अपने आलोचकों को शांत कर दिया. इस चैम्पियनशिप में भारत की ओर से पदक जीतने वाले वे पहले खिलाड़ी बने. बाद में विजेंदर ने अपनी उपलब्धि में एक और अध्याय उस समय जोड़ा जब वे 75 किलोग्राम श्रेणी में दुनिया के नंबर वन मुक्केबाज़ बने. उन्हें इस साल बीजिंग ओलंपिक में कांस्य पदक जीतने वाले सुशील कुमार और विश्व चैम्पियन महिला मुक्केबाज़ मेरी कोम के साथ संयुक्त रूप से राजीव गांधी खेल रत्न से सम्मानित किया गया.

सुरंजॉय सिंह (मुक्केबाज़ी)

मणिपुर के इस मुक्केबाज़ ने भारत को 15 साल बाद एशियन चैम्पियनशिप में स्वर्ण पदक दिलाया. लेकिन 22 वर्षीय सुरंजॉय मिलान में हुए विश्व चैम्पियनशिप में यह कारनामा नहीं दिखा सके. इस चैम्पियनशिप में पहले ही दौर में उन्हें बाहर होना पड़ा. लेकिन माइक टाइसन के प्रशंसक सुरंजॉय ने मेहनत जारी रखी और उन्हें इसका नतीजा भी मिला. उन्होंने दिसंबर में प्रतिष्ठित एआईबीए प्रेसिडेंट्स कप में स्वर्ण पदक हासिल करके अपनी मंशा ज़ाहिर कर दी.

साइना नेहवाल (बैडमिंटन)

वर्ष 2008 में बीजिंग ओलंपिक के दौरान साइना क्वार्टर फ़ाइनल तक पहुँच गई थी. साइना ने अपना शानदार फ़ॉर्म इस वर्ष भी जारी रखा. 19 वर्षीय साइना ने इस साल जून में उस समय इतिहास रचा जब वे सुपर सिरीज़ ख़िताब जीतने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी बनीं. जुलाई में उनकी रैंकिंग छह तक पहुँच गई. साइना को उनकी उपलब्धियों के कारण इस साल अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया.

वलियावीटिल डीजू और ज्वाला गुट्टा (बैडमिंटन)

एक साल के अंतराल के बाद इन दोनों खिलाड़ियों ने मिक्स्ड डबल्स जोड़ी के रूप में वर्ष 2008 में फिर से खेलना शुरू किया और इस बार इन्होंने शानदार प्रदर्शन करके भारत का नाम रोशन किया. अपने शानदार प्रदर्शन की बदौलत इस जोड़ी ने वर्ल्ड रैंकिंग के टॉप टेन में अपनी जगह बनाई और फिर हैदराबाद में हुई विश्व चैम्पियनशिप में खेलने का मौक़ा भी हासिल किया. इस प्रतियोगिता में ये जोड़ी क्वार्टर फ़ाइनल तक पहुँची. इस साल अगस्त में इन्होंने चाइनीज़ ताइपे ओपन में जीत हासिल की. मलेशिया में हुए वर्ल्ड सुपर सिरीज़ में ये जोड़ी फ़ाइनल तक पहुँची थी.

पंकज आडवाणी (स्नूकर)

भारतीय खेल की दुनिया में अगर उपलब्धियों की बात होगी, तो पंकज आडवाणी की अनदेखी नहीं की जा सकती. पंकज आडवाणी ने वर्ष 2008 में ग्रैंड डबल हासिल किया था. यानी उन्होंने प्वाइंट्स और टाइम दोनों प्रारूपों में आईबीएसएफ़ वर्ल्ड बिलियर्ड्स चैम्पियनशिप जीती थी. आडवाणी ऐसा करने वाले पहले खिलाड़ी हैं, जो 2005 में भी ये कारनामा कर चुके थे. वर्ष 2009 में भी उन्होंने अपना शानदार प्रदर्शन जारी रखा. इस साल पंकज आडवाणी ने लीड्स में आयोजित वर्ल्ड प्रोफेशनल बिलियर्ड्स चैम्पियनशिप में जीत हासिल की.

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