'हम अपने खर्चे पर विश्व कप खेलेंगे'

भारतीय हॉकी खिलाड़ी
Image caption भारतीय हॉकी खिलाड़ियों ने पैसे के मसले पर एकजुटता दिखाई है

भारतीय हॉकी खिलाड़ियों और प्रबंधन के बीच विवाद बढ़ता ही जा रहा है. जहां हॉकी प्रबंधन ने कहा है कि खिलाड़ी पैसे के पीछे भाग रहे है वहीं खिलाड़ियों का कहना है कि उनके लिए देश पहले है पैसा नहीं.

इसके बाद देर शाम भारतीय खेल मंत्री एमएस गिल ने बयान जारी करके कहा कि इस समय कोई दीर्घकालिक उपाय नहीं निकल सकता इसलिए सभी खिलाड़ियों को प्रशिक्षण फिर से शुरू करना चाहिए. गिल के मुताबिक़ विश्व कप के बाद नए हॉकी महासंघ के साथ खेल मंत्रालय बात करके सभी मसलों को सुलझाने की दिशा में काम करेगा.

दोनों पक्षों के बीच मंगलवार को पुणे में बातचीत हुई थी लेकिन ये बातचीत विफल रही. मंगलवार को हॉकी इंडिया के अध्यक्ष एके मट्टू ने कहा कि अगर खिलाड़ी 48 घंटे के अंदर नहीं लौटे तो विश्व कप के लिए नए खिलाड़ियों का चुनाव किया जाएगा.

मटटू का कहना था कि खिलाड़ी पैसों के लिए खेल रहे हैं और उनके लिए देश के कोई मायने नहीं है.

हॉकी इंडिया की प्रेस कांफ्रेंस के तुरंत बाद खिलाड़ियों ने प्रेस को बुलाया और कहा कि वो अपने खर्चे पर विश्व कप खेलने के लिए तैयार हैं.

हालांकि ये साफ़ नहीं है कि खिलाड़ी किस तरह अपने पैसे पर विश्व कप खेलेंगे. ऐसे में यह दबाव की रणनीति माना जा सकता है लेकिन अगर ये टीम विश्व कप में नहीं खेलती है तो भारत का प्रदर्शन विश्व कप में अत्यंत ख़राब होगा.

खिलाड़ियों में से एक एड्रियन डिसूजा का कहना था, ''अगर हॉकी इंडिया के पास पैसे नहीं है तो हम अपने खर्चे पर विश्व कप खेलने के लिए तैयार हैं. हम पैसे नहीं चाहते. हमने बस अपने अधिकार की बात कही है. हमें कहा गया कि अगर हम विश्व कप जीतेंगे तो एक एक करोड़ मिलेगा लेकिन पिछले साल हमने इतना बढ़िया खेला जिसका कोई पैसा नहीं मिला है.''

हॉकी टीम के कप्तान राजवीर सिंह का कहना था, ''हमने अपने बड़ों से कहा कि हमें अपना बकाया पैसा चाहिए. वो बोले कि पैसा नहीं है. तो जब घर में पैसा नहीं है तो हम अपना पैसा लगाएंगे और विश्व कप में हिस्सा लेंगे. ये नई बात नहीं है. न्यूज़ीलैंड की जूनियर टीम ऐसा कर चुकी है. हम भी ऐसा कर सकते हैं.''

खिलाड़ियों का कहना था कि जब वो बातचीत के लिए हॉकी इंडिया के पास गए तो उन्हें कहा गया कि प्रबंधन के पास 2011 तक पैसा ही नहीं है और कोई आश्वासन भी नहीं दिया गया है.

इससे पहले हॉकी इंडिया के अध्यक्ष एके मट्टू ने कहा था, "खिलाड़ियों के नहीं आने की स्थिति में अभ्यास शिविर कुछ दिन के लिए बंद कर दिया जाएगा और नए संभावित खिलाड़ियों की सूची जारी की जाएगी."

मट्टू का कहना था कि नए खिलाड़ियों को प्रशिक्षित करके विश्व कप के लिए तैयार किया जा सकता है.

उनके अनुसार खिलाड़ियों ने दिखा दिया है कि उनके लिए प्राथमिकता पैसा है न कि देश के लिए खेलना.

मट्टू के अनुसार हॉकी इंडिया का गठन ही मई 2009 में हुआ है जिसके बाद से उन लोगों के पास इतना समय और पैसा नहीं रहा है कि वे खिलाड़ियों की माँगें पूरी कर सकें.

उनका कहना था, "हमने खिलाड़ियों से कहा था कि हमें समय दीजिए और हम उनकी माँगों पर बात करेंगे."

हॉकी इंडिया के अध्यक्ष के अनुसार संगठन के पास इतना पैसा नहीं है कि वो खिलाड़ियों की माँगें तुरंत पूरी कर सकें क्योंकि पुरुष खिलाड़ियों की माँगें मानने का मतलब होगा उसी अनुरूप महिला खिलाड़ियों और जूनियर खिलाड़ियों को भी पैसा देना होगा.

उनका कहना था कि हॉकी खिलाड़ी प्रति खिलाड़ी साढ़े चार लाख रुपए माँग रहे हैं और हॉकी इंडिया के पास इतना पैसा नहीं है.

इस मौक़े पर अंतरराष्ट्रीय हॉकी महासंघ के उपाध्यक्ष अंतोनियो वॉन ओंदार्ज़ा भी मौजूद थे और उन्होंने भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उन्होंने हॉकी खिलाड़ियों का ऐसा व्यवहार कहीं नहीं देखा.

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