ज़ाक कैलिस का निराला अंदाज़

  • 7 फरवरी 2010
कैलिस-अमला
Image caption कैलिस-अमला की साझीदारी ने गेंदबाज़ों के नाक में दम कर दिया.

ज़ाक कैलिस दुनिया के ऐसे खिलाड़ियों में शुमार हैं जिन्हें उनकी क्षमता से कम करके आँका जाता है.

उनके अपने देश दक्षिण अफ़्रीका को छोड़ दें तो ऐसे लोग कम ही हैं जो उन्हें दुनिया का नंबर वन क्रिकेटर मानते हैं.

कोई भी खिलाड़ी जिसने टेस्ट और सीमित ओवरों के खेल में आठ हज़ार से ज़्यादा रन बटोरे हों, 200 से ज़्यादा विकेट लिए हों और जिनके नाम सौ से ज़्यादा कैच हो वह क्रिकेट जगत की महान हस्तियों में ही गिना जाएगा.

इसके बावजूद उन्हें उनके लायक प्रतिष्ठा नहीं मिलती जिससे स्पष्ट है कि किसी खिलाड़ी को आँकने की प्रणाली में कितनी खामियाँ हैं.

हाँ मैं ज़रूर कहूंगा कि ऐसे पीआर (जन संपर्क) वाले हैं जो किसी छोटे खिलाड़ी का क़द बढ़ा-चढ़ा कर पेश कर सकते हैं और इंडियन प्रीमियर लीग में ऐसे खिलाड़ी भी हैं जो करनी में उनसे आधे भी नहीं लेकिन पैसा कहीं ज़्यादा पाते हैं.

निराला खिलाड़ी

Image caption 'कैलिस एक महान खिलाड़ी हैं.'

हो सकता है ऐसा इसलिए है कि वह ऐसे आक्रामक बल्लेबाज़ नहीं हैं जो गेंदबाज़ों की धज्जियाँ उड़ा कर रख देता है और बाहें ऊपर उठा कर अपनी जीत का एहसास कराते पिच पर चहलकदमी करता है.

लगातार श्रेष्ठ प्रदर्शन करने की अपनी क्षमता से क्रिकेट लेखकों को प्रभावित करने वाला यह निराला खिलाड़ी है. ऐसा खिलाड़ी बिरले ही दिखाई देता है जैसे सूर्य ग्रहण.

ड्रेसिंग रूम में साथी खिलाड़ी उनकी पीठ थपथपाते हैं जो बाहर के किसी व्यक्ति की दमदार प्रशंसा से कहीं ज़्यादा सुकून देता है.

अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों के लिए ड्रेसिंग रूम एक धर्मस्थल की तरह है. ये उस गर्भगृह की तरह है जिसकी निजता की रक्षा के लिए वो ईर्ष्यालु भी हो सकते हैं. आपको उस जगह तक अपनी पहुँच बनाने के लिए बुहत मेहनत करनी पड़ती है.

एक बार वहां चले जाएँ तो दोस्ती हो जाती है और खिलाड़ी आपसी संबंधों का आनंद उठाते हैं. उन्हें पता होता है कि जब कोई अपने देश का प्रतिनिधित्व करता है तब कितना तनाव, दबाव और उम्मीदें रहती हैं.

अमला भी उसी राह पर

Image caption ज़हीर की शुरुआती सफलता पर कैलिस-अमला ने पानी फेर दिया.

इसलिए ड्रेसिंग रूम से मिली सराहना कहीं अधिक अहम होती है और इसीलिए कोई बल्लेबाज़ अपना बल्ला सबसे पहले ड्रेसिंग रूम की ओर दिखाता है और उसके बाद ही बाक़ी दुनिया की ओर.

ये महज ड्रेसिंग रूम से मिल रही प्रशंसा को कबूल करना नहीं होता है बल्कि ये एक तरीका है कहने का कि मैं ‘ हे ये सब आप लोगों के लिए ही कर रहा हूं.’

हाशिम अमला भी कालिस के क़दमों पर चल रहे हैं. वह भी निर्बाध तरीके से बैटिंग करते हैं और अपने काम को आहिस्ता लेकिन प्रभावी तरीके से अंजाम तक पहुँचाते हैं.

जब कालिस आक्रामक होकर खेल रहे थे तब उन्हें एक तरफ़ से खूँटा गाड़ दिया. उन्होंने कालिस को यह भरोसा दिलाया कि वह उनका साथ निभाएंगे.

उन्होंने ख़ुद एक रन लेकर अपने से ज़्यादा अनुभवी बल्लेबाज़ को स्ट्राइक देने की नीति अपनाई.

चयनकर्ताओं को सबक

जब ज़हीर ने शुरू में ही दो विकेट झटक भारत को मज़बूती दी तब इन्हीं दोनों की साझीदारी का कमाल था कि गेंद दक्षिण अफ़्रीका के पाले में चली गई.

भारत को उस पिच पर एक और गेंदबाज़ की कमी खल रही थी जो बैटिंग के अनुकूल थी. और ये तब जब तीन गेंदबाज़ रिजर्व में हैं.

मैच से पहले बेवजह फुटबॉल से वॉर्म अप या कोई भी कारण हो, रोहित शर्मा को बाहर बैठना पड़ा और कोई रिज़र्व बल्लेबाज़ नहीं बचा. इसलिए रिद्धिमान साहा को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण का मौका मिला.

उम्मीद है कि वो दिखाएंगे कि विकेट के पीछे जितने वो मुस्तैद रहते हैं उसी तरीके से बल्ले से भी कामयाब होंगे.

हालाँकि भारत के चयनकर्ताओं को टीम के गठन के बारे में ज़रूर सोचना चाहिए ताकि ऐसी स्थिति दोबारा उत्पन्न न हो.

(प्रोफ़ेशनल मैनेजमेंट ग्रुप से साभार)

संबंधित समाचार