नागपुर टेस्ट बचाना बेहद मुश्किल

डेल स्टीन
Image caption स्टीन को साथी गेंदबाज़ों से भी मदद मिली.

जिस तरह दक्षिण अफ़्रीका ने पहली पारी में भारत का बोरिया बिस्तर 233 रनों पर समेट दिया और दूसरी पारी में दोनों ओपनर सस्ते में चलते बने, वो पहले टेस्ट में भारतीय टीम की ख़स्ताहाली बयान करती है.

अगर दो या तीन बल्लेबाज़ कोई यादगार पारी नहीं खेलते हैं तो यह टेस्ट बचाना भारत के लिए मुश्किल है.

भारत ने ऐसा कारनामा वर्ष 2001 में कोलकाता के ईडन गार्डन्स पर कर दिखाया था लेकिन उस जीत के सूत्रधार दोनों खिलाड़ी इस बार घायलों की सूची में शामिल हैं और अपनी टीम को बचाने के लिए मैदान पर नहीं है.

दक्षिण अफ़्रीकी गेंदबाज़ों ने शानदार गेंदबाज़ी की, ख़ास कर डेल स्टीन ने अपने प्रयासों से ये पूरी तरह साबित किया कि टेस्ट क्रिकेट में वे नंबर वन गेंदबाज़ क्यों हैं.

उन्हें साथी गेंदबाज़ों का पूरा समर्थन मिला जिन्होंने दूसरे छोर से कसी हुई गेंदबाज़ी की और आसानी से रन नहीं दिए.

घटिया बल्लेबाज़ी

Image caption सहवाग-बद्रीनाथ को छोड़ सिर्फ़ गंभीर ही दहाईं का आँकड़ा पार कर सके.

भारतीय प्रदर्शन बेहद साधारण श्रेणी का दिखा. जब बल्लेबाज़ कोई शॉट नहीं खेले और बोल्ड हो जाए तो ये संकेत देता है कि उन्हें इस बात का भरोसा नहीं कि कौन सा शॉट खेला जाए. यह गेंदबाज़ों से डरने का संकेत है.

हाँ, वीरेंदर सहवाग ने पहली पारी में आक्रामक अंदाज़ में शतक ठोका और पहला मैच खेल रहे बद्रीनाथ ने क्रीज़ पर मज़बूती दिखाई लेकिन इन दोनों के अलावा गौतम गंभीर ही ऐसे बल्लेबाज़ थे जो दहाई का आँकड़ा पार कर सके.

जो टीम चुन कर दी गई उसे लेकर भारतीय टीम प्रबंधन मजबूर हो गई और लचीलेपन की कोई गुंजाइश नहीं बची.

कोई विकेटकीपर किसी बल्लेबाज़ की जगह कैसे ले सकता है? अगर साहा दूसरी पारी में सेंचुरी भी लगा दें तो भी इस टीम का गठन बढ़िया नहीं हो जाएगा.

टीम चयन पर सवाल

ख़ास कर भारत में जब टीम चुनी जाती है तब चयनकर्ताओं को पता होता है कि बैटिंग लाइन अप क्या रहने वाला है. असमंजस हमेशा तीन तेज़ गेंदबाज़ों या दो स्पिनरों के साथ उतरने को लेकर होता है.

इसिलए कोई ये समझ सकता है कि रिज़र्व में एक स्पिनर और एक तेज़ गेंदबाज़ को रखा जाए लेकिन जब दो तेज़ गेंदबाज़ों को रिज़र्व में रखा जाए और वो भी भारतीय पिचों के लिए तो ये मैच की सुबह समस्या को आमंत्रण दे सकता है और यही उन्होंने किया.

अगर लक्ष्मण कुछ दिनों में फ़िट भी हो जाने वाले हों तो भी तीन गेंदबाज़ों और रिज़र्व विकेटकीपर को बाहर बिठाना चाहिए था.

अब अगर भारत बड़े अंतर से मैच गँवा देता है तो ये देखना रोचक होगा कि चयनकर्ताओं का फ़ुटवर्क कैसा रहता है.

वैसे आम तौर पर वे अच्छा काम करते रहे हैं और इसीलिए मौजूदा टीम का चयन चौंकाने वाला है जो इतनी अहम सिरीज़ के लिए चुनी गई जिसे टेस्ट क्रिकेट का विश्व चैम्पियनशिप कहा जा रहा है.

(प्रोफ़ेशनल मैनेजमेंट ग्रुप से साभार)

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