फ़्रिस्बी बनाने वाले फ़्रेड का निधन

  • 13 फरवरी 2010
फ़्रिस्बी बनाने वाले फ़्रेड
Image caption फ़्रेड को फ़्रिस्बी बनाने का विचार कैलिफ़ोर्निया में छुट्टियाँ बिताते समय आया था

फ्रिस्बी यानि बच्चों के खेलने वाली तश्तरी का अविष्कार करने वाले वॉल्टर फ़्रेडरिक मॉरिसन का शुक्रवार को निधन हो गया है. शनिवार को यूटा के काउब्वॉय कैरोल में उनकी आत्मा की शांति के लिए एक प्रार्थना सभा का आयोजन किया गया है.

उनकी मृत्यु अमरीका के यूटा स्थित अपने घर में हुई. उन्हें कैंसर था और वे 90 वर्ष के थे.

अपने प्रशंसकों और दोस्तों के बीच फ़्रेड नाम से मशहूर वॉल्टर फ़्रेडरिक मॉरिसन को 1950 के दशक में अपनी मंगेतर लू के साथ कैलिफ़ोर्निया के बीच पर छुट्टियां मनाते समय फ़्रिस्बी बनाने का विचार आया.

केक बनाने वाली धातु के पैन को देखकर उनके दिमाग़ में उड़ने वाली तश्तरी का ख़्याल आया और फिर फ़्रेड ने दुनियाभर के बच्चों में बेहद लोकप्रिय इस एरोडायनैमिक प्लास्टिक तश्तरी की कल्पना को हक़ीकत में बदल दिया.

आज करोड़ों बच्चे हवा में घूमती तश्तरी से अपने खेलते पाए जाते हैं.

नाम का इतिहास

मॉरिसन ने अपने इस खिलौने को पहले नाम दिया प्लूटो प्लैटर. जब इसे बेचने के लिए स्थानीय बाज़ारों में उतारा गया तो इसने तहलका मचा दिया.

वर्ष 1957 में प्लूटो प्लैटर को बनाने और बेचने का अधिकार फ़्रेड ने कैलिफ़ोर्निया की एक कंपनी व्हैम-ओ को दे दिया. इस कंपनी ने प्लूटो प्लैटर का नाम बदलकर फ़्रिस्बी रखा और अपनी वेबसाइट में इसका अविष्कार करने वाले मॉरिसन को श्रेय देना भी नहीं भूली.

कंपनी ने अपनी वेबसाइट में लिखा - "‘जब तक फ़्रिस्बी तश्तरियां हवा में तैरती रहेंगी और बच्चों के चेहरे पर मुस्कान बिखेरती रहेंगी, तब तक फ़्रेड की ख्याति भी फैलती रहेगी."

कौन थे फ़्रेड?

मॉरिसन पेशे से फ़ाइटर पायलट थे. हवा में कलाबाज़ी करते हुए उनके दिमाग़ में नई-नई कल्पनाएं आकार लेती रहती थीं.

खाली वक्त को खुशगवार बनाने की हसरत उन्हें नए-नए प्रयोग के लिए प्रेरित करती थी और उनकी इसी ख़ूबी ने एक दिन फ़्रिस्बी को हक़ीकत में बदल दिया.

अपनी कल्पना को हक़ीकत में बदलने की विशेषता उन्हें अपने पिता से विरासत में मिली थी जिन्होंने आधुनिक कारों में इस्तेमाल होनेवाले हेडलाइट का अविष्कार किया था.

मॉरिसन अपने पीछे तीन बच्चों को छोड़ गए हैं। उनके बेटे वॉल्ट मॉरिसन के मुताबिक शनिवार को यूटाह के काउब्वॉय कैरोल में उनकी आत्मा की शांति के लिए एक प्रार्थना सभा का आयोजन किया जाएगा.

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