शानदार साझेदारी से भारत मज़बूत

  • 16 फरवरी 2010
सचिन-सहवाग
Image caption सचिन सहवाग ने ज़बर्दस्त बल्लेबाज़ी करते हुए भारत को मज़बूत स्थिति में ला खड़ा किया है.

भारत के चार बल्लेबाज़ों ने एक ही पारी में आखिरी बार शतक 2007 में बांग्लादेश के ख़िलाफ़ बनाया था.

बांग्लादेश के ख़िलाफ़ इतने रन बनाने को ख़ास महत्व नहीं दिया जाता है लेकिन अगर इतने रन किसी ऐसी टीम के ख़िलाफ़ बनाए जाएं जिसके पास नंबर वन गेंदबाज़ हो और दुनिया की अच्छी टीमों को उन्होंने परेशान किया हो, तो फिर भारतीय बल्लेबाज़ों की दाद दी जानी चाहिए.

भारतीय बल्लेबाज़ इडेन गार्डन में जिस तरह से दक्षिण अफ्रीकी गेदबाज़ों पर हावी रहे वो उनकी बल्लेबाज़ी में पारंपरिक और गैर पारंपरिक स्टाईल का मिश्रण दर्शाता है.

सहवाग और तेंदुलकर जब बल्लेबाज़ी कर रहे तो यह देखना अद्भुत था कि बल्लेबाज़ किस तरह से बैकफुट पर चले गए थे. जहां सहवाग ताबड़तोड़ बल्लेबाज़ी कर रहे थे वहीं सचिन का धैर्य देखते ही बनता था.

अगर सहवाग चौके छक्के लगाकर बल्लेबाज़ों की धुनाई कर रहे थे तो सचिन अपने मास्टर स्ट्रोक्स के ज़रिए विपक्षी टीम को उतना ही नुकसान पहुंचा रहे थे लेकिन अपने स्टाईल में.

ऐसा लग रहा था मानो एक रॉक म्यूज़िक बजा रहा है तो दूसरा धीमे धीमे रुमानी संगीत. अगर एक किताबों में लिखे गए शॉट्स लगा रहा है तो दूसरा अपने शॉट्स की किताब खुद लिख रहा था.

यही बातें टेस्ट मैच को ख़ास बनाती हैं. एकदिवसीय मैचों से अलग टेस्ट में अलग अलग तरीकों से बल्लेबाज़ी हो सकती है. वनडे मैचों में तो आपको ताबड़तोड़ बल्लेबाज़ी ही करनी पड़ती है चाहे अनचाहे.

अगर तेंदलुकर लेग स्टंप के लाइन पर फेंक गेंद पर लैप शॉट लगाते हैं तो सहवाग उसी गेंद पर रिवर्स में लैप शॉट लगा कर दिखाते हैं कि वो भी ऐसे शॉट अपने तरीके में खेल सकते हैं.

कुछ ऐसी ही लय ताल धोनी और लक्ष्मण की बल्लेबाज़ी के दौरान भी देखने को मिली. लक्ष्मण के शॉट्स देखें तो लगता है कि वो गेंद का भी ख़्याल रखते हैं वहीं धोनी जब शॉट लगाते हैं तो लगता है कि वो गेंद की धुनाई करने के मूड में हैं.

जो बाकी बल्लेबाज़ों के लिए लिए गुड लेंग्थ बॉल होती है वो लक्ष्मण के ऑफ साइड ड्राइव के लिए सटीक गेंद बन जाती है. ऑफ साइड पर नहीं तो मिडविकेट पर लक्ष्मण उसे फ्लिक कर देते हैं.

ऐसे मैच बार बार कम ही देखने को मिलते हैं और ईडेन गार्डन के क्रिकेट दीवानों को स्वर्ग में बैठे होने का आनंद ज़रुर मिला होगा.

नागपुर में द्रविड़ और लक्ष्मण के नहीं होने की कमी सभी को महसूस हुई होगी जिसे ईडेन गार्डन में लक्ष्मण और धोनी ने पूरा कर दिया.

बात सिर्फ़ खुद रन बनाने या शतक लगाने की नहीं होती बल्कि दूसरे छोर पर खड़े बल्लेबाज़ को इससे कितना आराम मिलता है यह भी ज़रुरी होता है. लक्ष्मण ने द्रविड़ के साथ ऐसी कितनी ही पारियां खेली हैं जहां लक्ष्मण लगातार बड़े स्ट्रोक लगा रहे हों और यह जानते हुए कि द्रविड़ दूसरे छोर पर स्कोर को धीरे धीरे आगे बढ़ाते रहेंगे.

धोनी के साथ लक्ष्मण को पता था कि उन्हें थोड़ा अधिक दौड़ना पड़ेगा क्योंकि धोनी रन चुराने में माहिर माने जाते हैं.

इन दोनों साझेदारियों (सचिन-सहवाग और धोनी-लक्ष्मण) ने भारत को मैच जीतने का स्वर्णिम मौका दिया है जहां से वो शृंखला बराबर कर सकते हैं और टेस्ट क्रिकेट में नंबर वन पर बने रह सकते हैं.

बस अब भारत को गेंदबाज़ी में भी ज़हीर खान, हरभजन सिंह, ईशांत शर्मा और अमित मिश्रा से ऐसी ही साझेदारी की उम्मीद है. अगर ऐसा होता है तो भारत की जीत होगी और वो भी पूरे शान से..

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