कई विवादों में घिरे रहे हैं ललित मोदी

ललित मोदी
Image caption आईपीएल टीमों में निवेश पर भारतीय मीडिया में अनेक सवाल उठाए गए हैं

इंडियन प्रीमियर लीग के कमिश्नर ललित मोदी की कार्यशैली, फ़ैसलों और गतिविधियों पर काफ़ी समय से विवाद रहा है. लेकिन आजकल मीडिया रिपोर्टों में छाए हुए ललित मोदी आख़िर कौन हैं? राजस्थान क्रिकेट संघ और राजनीतिक नेताओं से उनका क्या संबंध है?

राजस्थान में वसुंधरा राजे की भाजपा सरकार के कार्यकाल के दौरान अनेक बार ललित मोदी का नाम राजनीति के गलियारों में उछला और अनेक पर्यवेक्षकों ने तो उन्हें उस समय सियासत की धुरी बताया.

वसुंधरा राजे सरकार के कार्यकाल के दौरान राजस्थान क्रिकेट संघ के कर्ताधर्ता रहे ललित मोदी, राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद क्रिकेट संघ में अपनी कुर्सी नहीं बचा सके. इसके उलट उन्हें कम से कम तीन मामलो में पुलिस द्वारा दर्ज प्राथमिकी का सामना करना पडा है.

राजस्थान के ललित मोदी का नाम वर्ष 2005 में सामने आया था जब भाजपा के राजस्थान में सता में आने के बाद वे यकायक क्रिकेट संघ के अध्यक्ष बने.

खंडन के बावजूद अनेक आरोप

उनके विरोधियों का आरोप है कि तत्कालीन भाजपा सरकार ने क्रिकेट संघ में मोदी की ‘ताजपोशी’ के लिए स्पोर्ट्स क़ानून बदला और फिर मोदी वर्षों से स्थापित रुंगटा गुट को हटाकर क्रिकेट संघ में अपना प्रभुत्व कायम करने में कामयाब हुए. जब सत्ता बदली तो उन पर आरोप की बोछार शुरु हुई. एक ऐसा समय भी आया जब पुलिस ने उनसे पूछताछ की.

विपक्ष में रहते हुए कांग्रेस नेता अशोक गहलोत ने मोदी पर ख़ूब प्रहार किए और उन्हें ऐसे प्रस्तुत किया जैसे कि वो एक संवैधानिक सत्ता का केंद्र हो. ये जंग इतनी तेज़ हुई कि मोदी का नाम महज़ क्रिकेट के प्रशासक के तौर पर ही नहीं, बल्कि क्रिकेट में प्रभावशाली लोगों के कामकाज की शैली का मुहावरा बन गया.

कांग्रेस ने अपने पूरे चुनाव अभियान में मोदी को इस तरह पेश किया जैसे कि तत्कालीन मुख्य मंत्री वसुंधरा राजे की निकटता का मोदी नाजायज़ फ़ायदा उठा रहे हों. गहलोत की मानें तो मोदी तत्कालीन भाजपा सरकार तक पहुँचने का एक ज़रिया थे. ललित मोदी ने कई बार इन सभी आरोपों का खंडन करते हुए इन्हें निराधार और ग़लत ठहराया है.

Image caption फ़िल्मी सितारों के आईपीएल टीमों के साथ जुड़ने के बाद जनता में आईपीएल के प्रति ख़ासी उत्सुकता है

उनके विरोधीओ ने मोदी के राजस्थान के निवासी होने पर सवाल उठाया और नागौर में मोदी के विरुद्ध एक प्राथमिकी दर्ज करवाई. ये मामला अब तक पुलिस के पास विचाराधीन है. क्रिकेट संघ का अधिकारी बनने के लिए मोदी को राजस्थान का मूल निवासी होना ज़रूरी था. लेकिन उनके विरोधियों ने उनके नागौर का बाशिंदा होने के दावे पर सवाल उठाए हैं. मोदी इन आरोपों को निराधार बताते हैं.

जयपुर के एक संगठन ने मोदी पर जयपुर धमाकों के प्रभावितों को सहायता के लिए मदद का झूठा वादा करने का आरोप लगाया है. शिकायतकर्ता ने जयपुर के ज्योति नगर थाने में मोदी के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराई कि मोदी ने प्रभावितों को छह करोड़ की सहायता देने की घोषणा की लेकिन मदद के लिए दिया गया चैक बाउंस हो गया. मोदी ने इस आरोप को बेबुनियाद बताया है.

मोदी को एक और पुलिस जाँच का सामना करना पड़ रहा है जिसमें आरोप है कि वर्ष 2007 में एक क्रिकेट मैच के दौरान जयपुर के एसएमएस स्टेडियम में शराब परोसी गई. ये भी आरोप लगा है कि एक अतिथि को तिरेंगे को मेज़पोश की तरह इस्तेमाल करते देखा गया. इस मामले की अभी जाँच चल रही है.

जाँच समिति का काम पर रोक

राजस्थान में दिसंबर 2008 में जब कांग्रेस की सरकार बनी तो मुख्य मंत्री गहलोत ने सेवानिव्रत न्यायाधीश एनएन माथुर की अध्यक्षता में तीन सदस्यों की एक जाँच समिति गठित कर भाजपा सरकार के कार्यकाल में हुए जमीन के सौदों और पर्यटन स्थल आमेर में संपत्तियों की कथित ख़रीद की जाँच का काम सौंपा गया.

इस समिति को वर्ष 2004 से 2008 के बीच लगे आरोपों की जाँच का आदेश दिया गया. लेकिन ये समिति अपने काम को अंजाम तक नहीं पहुंचा सकी. राजस्थान हाई कोर्ट ने इस समिति के काम पर रोक लगा दी. इसके बाद ये मामला सुप्रीम कोर्ट पहुँच गया जब राजस्थान सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय में रोक हटाने के लिए अपील दायर की, लेकिन ये मामला अभी विचाराधीन है.

मोदी जब राजस्थान क्रिकेट संघ के सर्वे-सर्वा बने तो जयपुर का स्टेडियम क्रिकेट तक महदूद होकर रह गया. वैसे तो इस पर राज्य खेल परिषद का अधिकार है और ये अन्य खेलों के लिए भी इस्तेमाल होता रहा है. अन्य खेलों के ख़िलाड़ियों ने महसूस किया कि उनकी खेलों का गला घुट रहा है और उन्होंने जयपुर में प्रदर्शन कर इस ओर ध्यान आकर्षित करने की कोशिश भी की है.

वैसे तो खेल के मैदान या स्टेडियम परिसर में कोई व्यापारिक गतिविधि नहीं कर सकता लेकिन स्टेडियम पर एक होटल बनाकर खड़ा कर दिया गया है.

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