'काश कोई महिला आईपीएल भी होता'

झूलन गोस्वामी

पश्चिम बंगाल के नदिया ज़िले में स्थित चाकदा के एक मध्यमवर्गीय परिवार से निकल कर भारतीय महिला क्रिकेट टीम की कमान संभालने वाली झूलन कामयाबी की एक मिसाल है.

तेज गेंदबाज़ के रूप में 2002 में भारतीय महिला टीम में अपना करियर शुरू करने वाली झूलन ने उसके बाद पीछे मुड़ कर नहीं देखा. आज वे दुनिया की सबसे तेज महिला गेंदबाजों में शुमार हैं.

आईसीसी की महिला गेंदबाजों की सूची में झूलन पहले नंबर पर हैं. झूलन ने महिला क्रिकेट, आगामी टी-20 विश्वकप और कुछ अन्य मुद्दों पर कोलकाता में बातचीत की

क्रिकेट में दिलचस्पी कैसे पैदा हुई ?

मध्यवर्गीय बंगाली परिवार की तरह मेरे घरवाले भी चाहते थे कि मैं पढ़ाई पर ज्यादा ध्यान दूं. लेकिन मुझे बचपन से ही फुटबाल, क्रिकेट, वालीबाल, बैडमिंटन और बास्केटबाल जैसे खेल अच्छे लगते थे.

बारह साल की उम्र में गेंदबाजी करते हुए मैं धीमी गेंद फेंकती थी जिन पर विरोधी टीम के सदस्य खूब छक्के मारते थे. लड़के मुझसे कहते थे कि मैं गेंदबाजी करना छोड़ दूं क्योंकि मेरी गेंदें काफी धीमी होती हैं. उसके बाद ही मैंने तेज गेंदबाज़ी का अभ्यास करने का फ़ैसला किया.

वर्ष 1997 में यहाँ ईडेन गार्डेन में ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड के बीच महिला विश्वकप का फाइनल देखने के बाद मैंने क्रिकेट को करियर बनाने का फ़ैसला कर लिया.

पढ़ाई और क्रिकेट में टकराव नहीं हुआ ?

यह तो होना ही था. दोनों एक साथ नहीं चल सकते थे. इसलिए मैंने क्रिकेट के लिए पढ़ाई छोड़ दी. एमआरएफ फाउंडेशन में बिताए समय ने मुझे निखारा. वहाँ महान गेंदबाज डेनिस लिली ने मुझे गेंदबाजी के कई गुर बताए.

आपके जीवन की सबसे अहम उपलब्धि क्या रही ?

भारतीय महिला क्रिकेट टीम के लिए चुना जाना मेरी सबसे बड़ी उपलब्धि रही है. इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया को दो-दो बार उसी की ज़मीन पर हराना और इंग्लैंड में सिरीज जीतना भी बड़ी उपलब्धि है.

भारत में महिला क्रिकेट की मौजूदा हालत से आप संतुष्ट हैं ?

इस क्षेत्र में अभी सुधार की काफी गुंजाइश है. अब भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड भी महिला क्रिकेट को गंभीरता से ले रहा है.

अंतरराष्ट्रीय मैचों के लिए अपने हुनर को निखारने के लिए हमें और ज्यादा घरेलू मैच खेलने चाहिए. उभरती महिला क्रिकेटरों की प्रतिभा को निखारने के लिए ज़मीनी स्तर पर बहुत कुछ किया जा सकता है.

इसके लिए और प्रशिक्षण केंद्रों की स्थापना ज़रूरी है. भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड और औद्योगिक घरानों के समर्थन से अधिक से अधिक लड़कियां क्रिकेट को करियर बनाने के लिए आगे आएँगी.

देश में महिला क्रिकेटरों को अब भी कई बाधाओं से जूझना पड़ता है. मुझे भी जूझना पड़ा था.

इंडियन प्रीमियर लीग के बारे में आपकी क्या राय है ?

क्रिकेट को और लोकप्रिय बनाने और नई प्रतिभाओं को उभारने में इसकी अहम भूमिका रही है. स्थानीय खिलाड़ी आईपीएल मैचों में अंतरराष्टच्रीय खिलाड़ियों के साथ खेलते हुए बहुत कुछ सीख सकते हैं. काश ! महिला क्रिकेटरों के लिए भी कोई आईपीएल होता.

Image caption झूलन को टी-20 विश्व कप में पुरुष टीम के 2007 का करिश्मा दोहराने की उम्मीद है.

टी-20 विश्वकप से पहले तैयारी कैसी रही है ?

हमारी तैयारी बहुत अच्छी रही है. आईपीएल के तीसरे सीजन में खासकर सचिन तेंदुलकर की बल्लेबाजी से हमें काफी प्रेरणा मिली है. सचिन ने अकेले अपने बूते टीम को फ़ाइनल में पहुँचा दिया. इस बार हमारी टीम अच्छी है. इसमें अनुभवी और युवा प्रतिभाओं का बोहतर संतुलन है. इसलिए विश्वकप में कामयाबी मिलनी तय है.

वेस्ट इंडीज में पिच कितनी मददगार होगी ?

वहाँ की पिचें स्पिनरों की काफी मदद करेगी. वहाँ कामयाबी में अबकी स्पिनरों की भूमिका काफी मह्त्वपूर्ण होगी. लेकिन टी-20 मैचों में कुछ कहना मुश्किल है. ऐसे टूर्नामेंट में कामयाबी के लिए लगातार बेहतर प्रदर्शन जरूरी है. इसमें किसी भी टीम को कमजोर आंकना ग़लत होगा.

धोनी की अगुवाई वाली भारतीय टीम का प्रदर्शन कैसा रहने की उम्मीद है ?

धोनी की अगुवाई में टीम अबकी 2007 का इतिहास दोहरा सकती है. यह टीम काफी मज़बूत है.

संबंधित समाचार