खेल संघों पर पड़ी नकेल

  • 2 मई 2010
एमएस गिल
Image caption नियों के तहत अधिकारियों का कार्यकाल निश्चित समय के लिए है

विभिन्न खेल संघों के प्रमुख पदों पर लंबे समय से रहे राजनीतिज्ञों, दफ़्तरशाहों और व्यवसायियों को अपने पदों को छोड़ना पड़ेगा.

ये कहना है खेल मंत्रालय का.

इस कदम से भारतीय ओलंपिक संघ अध्यक्ष सुरेश कलमाड़ी, तीरंदाज़ी संघ के वीके मल्होत्रा, साइकिलिंग संघ के सुखदेव सिंघ ढींढसा जैसे लोगों को नुकसान होगा और वो दोबारा चुनाव के लिए खड़े नहीं हो पाएंगे.

दरअसल खेल मंत्रालय ने 35 वर्ष पुरानी गाइडलाइंस का ज़िक्र करते हुए कहा कि इन्हें तुरंत अमल में लाया जा रहा है.

इन गाइडलाइंस के मुताबिक अधिकारियों का कार्यकाल निश्चित समय के लिए है.

खेल मंत्रालय के एक वक्तव्य के मुताबिक राष्ट्रीय खेल संघ, जिसमें भारतीय ओलंपिक संघ शामिल है, उसके प्रमुख का अधिकतम कार्यकाल 12 साल होगा.

इसके अलावा इन संघों के सचिव और कोषाध्यक्ष के पदों का कार्यकाल आठ साल लगातार से ज़्यादा नहीं होगा. अगर वो दोबारा चुनाव लड़ना चाहते हैं तो इसके लिए चार साल का अंतराल ज़रूरी होगा.

मंत्रालय के इस कदम को खेल मंत्री एमएस गिल और और सुरेश कलमाड़ी के बीच संबंधों में आए खटास के तौर पर देखा जा रहा है.

सुरेश कलमाड़ी वर्ष 1996 से भारतीय ओलंपिक संघ के अध्यक्ष पद पर हैं.

प्रतिक्रिया

खेल मंत्रालय के इस कदम पर प्रतिक्रियाएँ आनी शुरू हो गई हैं.

भारतीय कुश्ती संघ के अध्यक्ष जीएस मंदर ने समाचर एजेंसी आईएएऩएस को बताया, “क्या आप किसी सांसद को दोबारा चुनाव लड़ने से रोकते हैं? आप किसी को चुनाव लड़ने से नहीं रोक सकते.”

रायफ़ल एसोसिएशन के बलजीत सिंह सेठी का कहना है, “ये आदेश गलत समय पर आया है क्योंकि कॉमनवेल्थ खेल सिर्फ़ पाँच महीने दूर है. इस नियम से विभिन्न संघों में बेचैनी बढ़ेगी. इस कदम का कोई औचित्य नहीं है.”

जीएस मंदर कहते हैं कि संघ सभी नियमों का पालन कर रहे हैं और वो पारदर्शिता से काम कर रहे हैं.

वो कहते हैं, “पिछले दो सालों से हम निशानेबाज़ी प्रतियोगिताओं में अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं. क्या आप इसे बदलना चाहते हैं और नए लोगों को लाना चाहते हैं? क्या इससे खेल को फ़ायदा पहुँचेगा?”

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