ओलंपिक संघ में सरकारी अधिकारी

सुरेश कलमाडी
Image caption सुरेश कलमाडी पिछले 14 वर्षों से भारतीय ओलंपिक संघ के अध्यक्ष हैं

भारत सरकार ने खेल संघों के विवाद में हस्तक्षेप करते हुए मामले के निपटारे के लिए अपने एक वरिष्ठ अधिकारी को अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक संघ मुख्यालय में नियुक्त करने का फ़ैसला किया है.

खेल मंत्रालय की ओर से जारी एक विज्ञप्ति में कहा गया है कि सरकार ने अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक संघ के सामने, आपसी सहमति से तय तिथि से, एक वरिष्ठ अधिकारी को प्रतिनियुक्ति पर भेजने का प्रस्ताव रखा है.

भारत सरकार की ओर से ये बयान प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और भारतीय ओलंपिक संघ के अधिकारियों की मुलाक़ात के बाद सामने आया है जिसमें प्रधानमंत्री से इस मामले में हस्तक्षेप करने का आग्रह किया गया था.

बुधवार को भारतीय ओलंपिक संघ के अध्यक्ष सुरेश कलमाडी, महासचिव रंधीर सिंह और कई दूसरे खेल संघों के अधिकारियों ने प्रधानमंत्री से मुलाक़ात की जिसके बाद सुरेश कलमाडी ने कहा कि प्रधानमंत्री ने उनसे इस संबंध में हस्तक्षेप करने का वादा किया है.

भारत में खेल संघों को लेकर खेल मंत्रालय और खेल अधिकारियों के बीच टकराव की स्थिति बन गई है जिसके बाद खेल अधिकारी प्रधानमंत्री से मिलने पहुँचे.

विवाद

खेल मंत्रालय ने एक आदेश जारी किया है कि खेल संघों के पदाधिकारी 12 साल से अधिक और 70 साल की उम्र से अधिक समय इन पदों पर नहीं बने रह सकते.

इस आदेश पर खेल संघों के अधिकारियों ने सख़्त आपत्ति की और कहा कि सरकार को पदाधिकारियों के कार्यावधि और उनकी उम्र के बारे में कोई फ़ैसला नहीं थोप सकती.

अधिकारियों ने चेतावनी दी कि सरकार के इन नियमों को लागू करने से देश में खेल गतिविधियों पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है.

उल्लेखनीय है कि सुरेश कलमाडी 1996 से ही भारतीय ओलंपिक संघ के अध्यक्ष हैं. वहीं रंधीर सिंह पिछले 23 वर्षों से भारतीय ओलंपिक संघ के महासचिव हैं.

इसी तरह भारतीय जनता पार्टी के सांसद विजय कुमार मल्होत्रा 31 वर्षों से भारतीय तीरंदाज़ी संघ के अध्यक्ष हैं. पूर्व खेल मंत्री सुखदेव सिंह ढींडसा भी 14 वर्षों से साइक्लिंग संघ के अध्यक्ष हैं.

मगर खेल अधिकारियों ने खेल मंत्रालय के आदेश पर ये कहते हुए आपत्ति की है कि इससे खेल संघों की स्वायत्तता प्रभावित होगी.

इसी सिलसिले मे खेल पदाधिकारियों ने बुधवार को प्रधानमंत्री से मुलाक़ात की जिसके बाद सुरेश कलमाडी ने कहा,"यदि आप स्वायत्तता के साथ खिलवाड़ करेंगे तो परेशानी खड़ी हो जाएगी. यदि अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक संघ ने इसे लेकर प्रतिबंध लगा दिया तो देश में सारी खेल गतिविधियाँ ठहर जाएँगी."

उन्होंने ये भी कहा कि यदि इस संबंध में खेल मंत्री एम एस गिल को कोई क़दम उठाना था तो उन्हें अक्तूबर में होनेवाले कॉमनवेल्थ खेलों तक इंतज़ार करना चाहिए था.

सरकारी हस्तक्षेप

खेल पदाधिकारियों के प्रधानमंत्री से मिलने के बाद खेल मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा है कि सरकार ने खेल पदाधिकारियों की कार्यावधि के बारे में 1975 में पारित उस आदेश पर ध्यान दिया है जिसे वर्ष 2001 में एक अंतरिम आदेश से रोक दिया गया था.

विज्ञप्ति के अनुसार ये मामला संसद में भी उठा है और सभी दलों के नेताओं ने सरकार से इस आदेश को बहाल करने के लिए आग्रह किया है.

खेल मंत्रालय ने कहा है कि खेल संघों के आगामी चुनावों से पदाधिकारियों की कार्यावधि की इन सीमाओं को लागू किया जाएगा.

मंत्रालय के अनुसार अधिकतर खेल संघों के चुनाव 2011 में होने हैं.

मंत्रालय ने साथ ही साफ़-साफ़ लिखा है कि रंधीर सिंह का अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति में भारत की ओर से स्वतंत्र सदस्य रहना और साथ ही भारतीय ओलंपिक संघ का 23 वर्षों तक महासचिव बने रहना सीधे-सीधे नियमों की अवहेलना है.

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