हॉकी फ़ेडरेशन की मान्यता बहाल

  • 21 मई 2010
केपीएस गिल
Image caption भारतीय हॉकी पिछले कुछ साल से विवादों में घिरी रही है

दिल्ली उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को केंद्र सरकार के उस फ़ैसले को ख़ारिज कर दिया है जिसमें भारतीय हॉकी फ़ेडरेशन की मान्यता समाप्त कर दी गई थी.

वर्ष 2008 में हॉकी फ़ेडरेशन के तत्कालीन सचिव ज्योतिकुमारन को एक स्टिंग ऑपरेशन में कथित तौर पर रिश्वत लेते हुए दिखाए जाने के बाद सरकार ने फ़ेडरेशन की मान्यता रद्द कर दी थी.

अदालत ने ये फ़ैसला केपीएस गिल की अर्ज़ी पर सुनाया है. गिल 2008 में हॉकी फ़ेडरेशन के अध्यक्ष थे.

अदालत ने खेल मंत्रालय और भारतीय ओलंपिक संघ पर 10 हज़ार रुपए का जुर्माना भी लगाया है.

फ़ैसला

न्यायालय ने अपना फ़ैसला सुनाते हुए ये भी कहा कि खेल संघों की स्वायत्तता से छेड़छाड़ नहीं की जानी चाहिए.

अदालत ने खेल मंत्रालय के 12 मई 2008 के उस निर्णय को ख़ारिज कर दिया है जिसमें हॉकी फ़ेडरेशन की मान्यता रद्द कर दी गई थी.

न्यायालय ने ये भी कहा कि खेलों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हार-जीत होती रहती है और हार के लिए किसी को दोष देना ठीक नहीं. ये राष्ट्रीय खेलों के विकास में बाधक हो सकता है.

हॉकी फ़ेडरेशन के बारे में अदालत ने कहा कि अब पिछली बातें भूला कर नई शुरुआत करने की ज़रूरत है.

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