मुसोलिनी के इटली का विश्व कप

1934 का विश्व कप

1934 में फ़ुटबॉल विश्व कप की मेजबानी मिली इटली को. मेजबानी की दौड़ में इटली और स्वीडन ही शामिल थे और मौक़ा मिला इटली को.

लेकिन फ़ीफ़ा के इस फ़ैसले पर आश्चर्य भी व्यक्त किया गया क्योंकि उस समय इटली की बागडोर थी मुसोलिनी के हाथों में.

यहाँ तक कहा गया कि मुसोलिनी ने विश्व कप को अपने प्रचार-प्रसार के लिए इस्तेमाल किया. आरोप तो यहाँ तक लगाए जाते हैं कि इटली के मैचों में रेफ़री तक मुसोलिनी के कहने पर नियुक्त हुए.

कहा तो यहाँ तक जाता है कि स्वीडन के जिस रेफ़री ने सेमी फ़ाइनल और फ़ाइनल मैच कराया था, उसने पहले मुसोलिनी से मुलाक़ात की थी. कुछ रेफ़री ने तो इटली के पक्ष में इतने फ़ैसले दिए कि बाद में उनके देशों ने उन्हें हटा दिया.

विवादों की छाया में हुए इस विश्व कप में ऐसा पहली बार हुआ कि पिछली चैम्पियन टीम ने प्रतियोगिता में हिस्सा नहीं लिया.

उरुग्वे ने यह कहते हुए इटली आने से इनकार कर दिया कि पिछले विश्व कप में कम ही यूरोपीय देशों ने हिस्सा लिया था.

क्वालीफ़ाइंग राउंड

यह पहला विश्व कप था, जिसमें टीमों को हिस्सा लेने के लिए क्वालीफ़ाइंग राउंड खेलना पड़ा. मेजबान इटली भी इसमें शामिल था.

कुल मिलाकर 16 टीमें इस प्रतियोगिता में खेलीं. इस विश्व कप में पहले राउंड से नॉक आउट स्टेज तक यूरोप की आठ टीमें पहुँचीं. ये टीमें थीं- ऑस्ट्रिया, चेकोस्लोवाकिया, जर्मनी, हंगरी, इटली, स्पेन, स्वीडन और स्विट्ज़रलैंड.

क्वार्टर फ़ाइनल में पहली बार ऐसा हुआ जब मैच दोबारा खेला गया. इटली और स्पेन के बीच मैच अतिरिक्त समय तक खिंचा, लेकिन स्कोर रहा 1-1. मैच दोबारा खेला गया और इटली ने स्पेन को 1-0 से हरा दिया.

सेमी फ़ाइनल में मेजबान इटली ने ऑस्ट्रिया को 1-0 से हराकर फ़ाइनल में जगह बनाई. जबकि दूसरे सेमी फ़ाइनल में चेकोस्लोवाकिया ने जर्मनी को 3-1 से हराया.

फ़ाइनल में 70 मिनट तक चेकोस्लोवाकिया की टीम 1-0 से आगे थी. लेकिन मैच ख़त्म होने से पहले किसी तरह इटली की टीम एक गोल करने में सफल रही.

मैच 1-1 से बराबर हो गया. इसके बाद फ़ाइनल अतिरिक्त समय में गया, जहाँ इटली की टीम ने गोल करके ख़िताब पर क़ब्ज़ा कर दिया.

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