फ़ुटबॉल के रोमांच का इंतज़ार है

Image caption फ़ुटबॉल विश्व कप शुरु होने जा रहा है

इनदिनों क्रिकेट की दुनिया को समझना बहुत मुश्किल हो गया है. क्रिकेट आए दिन किसी न किसी विवाद में घिरा रहता है.

हम सब को लगता है था कि मैच फ़िक्सिंग का जिन्न बोतल से दोबारा नहीं निकलेगा लेकिन ये जिन्न दोबारा अपना जाल बिछाता नज़र आ रहा है.

क्रिकेट ही केवल वो खेल नहीं है जो मैदान के बजाय बाहर ज़्यादा सुर्खियाँ बटोर रहा है.

भारत में ओलंपिक खेलों पर अपना नियंत्रण जमाने को लेकर अधिकारी तमाम तरह के नाटक कर रहे हैं.ये अधिकारी चाहते हैं कि वे अपने-अपने खेल संघ के बॉस बने रहें- इंच भर भी हिलने को तैयार नहीं है.

दरअसल ये उन अधिकारियों के अस्तित्व की लड़ाई बन गई है जो इस काम से दशकों से कमाई कर रहे हैं. ये बात मुझे टीवी पर हुई एक बहस के दौरान समझ में आई.

इस चर्चा के दौरान उन लोगों पर कई तरह के आरोप लगाए गए जो चाहते हैं कि सिस्टम में पारदर्शिता और जवाबदेही हो. कुछ आरोप तो मानहानी के दायरे में थे.

सिस्टम की ख़ामियों का फ़ायदा उठाते हुए बहुत से लोग दशकों से जमे हुए हैं. अगर उनके ख़िलाफ़ लड़ाई जीतनी हैं तो या तो किसी दैव्य शक्ति की ज़रूरत है या हठ और साहस की.

ऐसे मुद्दों के बारे में सोच-सोच कर दिमाग़ सन्न हो जाता है, ख़ासकर गर्मी के इस मौसम में.

बेमिसाल नडाल

साल का ये वो समय है जब आप हाथ में ठंडी बियर का गिलास पकड़ मैदान पर कोई बेहतरीन खेल या मुकाबला देखना चाहते हैं- न कि लोगों के बीच वाक युद्ध होते देखना चाहते हैं.

शुक्र है कि फ़ुटबॉल विश्व कप शुरु होने के साथ ही ऐसे कई दिलचस्प मुकाबले देखने को मिलेंगे.

और जब तक विश्व कप शुरु नहीं हो जाता तब तक मैं फ़्रेंच ओपन में फ़ेडरर और नडाल के मैच देख रहा हूँ – कुछ उसी उत्सुकता से जैसी स्कूल की छुट्टियाँ शुरु होने से पहले बच्चे के मन में होती है.

मेड्रिड ओपन के फ़ाइनल में नडाल और फ़ेडरर ने जिस बेहतरीन टेनिस का प्रदर्शन किया था उसे देखकर तो इनके मुकाबले देखने की हसरत और बढ़ गई है.

नडाल के खेल को देखकर लगता है कि फ़िटनेस से जुड़ी दिक्कतों से वे निजात पा चुके हैं, वे शिकारी की तरह भाग रहे हैं और अपने दमदार फ़ोरहैंड से प्रतिदंद्वियों को परेशान कर रहे हैं.

फ़ेडरर ने पूरी कोशिश की थी कि वो इस सुपरह्मूमन डाइनमो के स्ट्रोक का मुकाबला कर सकें लेकिन वे नडाल को मात नहीं दे सके.

तीन सेट के इस मुकाबले की अवधि इतनी नहीं थी कि खेल प्रेमियों को खेल के चरम तक ले जाए.

अब एक हफ़्ते बाद फ़्रेंच ओपन का फ़ाइनल होगा. उम्मीद है कि ये फ़ाइनल खेल प्रेमियों को रोमांच का एहसास दिला सकेगा- वो रोमांच जहाँ लगता है कि

मानो समय रुक गया हो, जब लगे कि इस लम्हे के पहले या बाद ज़िंदगी थी ही नहीं और न होगी.

(लेखक हिंदुस्तान टाइम्स के खेल सलाहकार हैं)

संबंधित समाचार