ब्राज़ील के अलावा भी हैं दावेदार

दक्षिण अफ़्रीक़ा
Image caption ब्राज़ील, अर्जेंटीना, जर्मनी, इटली, स्पेन और इंग्लैंड की टीमें विजेता की दौर में हैं.

विश्व कप फ़ुटबॉल का इतिहास इस बात का साक्षी रहा है कि पुरानी धुरंधर टीमें ही सबसे अधिक दावेदार रहती हैं, क्योंकि उन टीमों के पास बेहतरीन खिलाड़ियों का जमावड़ा होता है. उनके पास केवल 11 अच्छे खिलाड़ी ही नहीं होते बल्कि 16 से 17 बेहतरीन खिलाड़ी होते हैं.

कोई भी टीम चार से पांच बेहतरीन खिलाडियों के बल पर विश्व विजेता नहीं बन सकती. इसलिए अपने समर्थकों के उस्ताह के बीच खेलने वाली दक्षिण अफ़्रीक़ी टीम पर दबाव रहेगा. उनके पास तीन से चार अच्छे खिलाड़ी हैं जिसमें कई खिलाड़ी कुछ मैच नहीं खेल सकेंगे. इसका कारण पिला कार्ड और चोट होंगीं.

ब्राज़ील, जर्मनी, इटली, स्पेन, अर्जेंटीना और इंग्लैंड की टीमों के पास काफ़ी अच्छे खिलाड़ी हैं और इसमें से ही कोई टीम विजेता बनेगी.

लेकिन विश्व कप का इतिहास देखें तो पाते हैं कि जो टीम विजेता बनती है उसका खेल शुरू में अच्छा नहीं रहता, लेकिन हर खेल के बाद उसमें सुधार देखने को मिलता है. जैसे इटली ने वर्ष 2006 में और फ्रांस ने 1998 में दिखाया था.

दांव लगने वाली टीम नहीं

Image caption ब्राज़ील अब तक सबसे अधिक पांच बार विश्व चैंपियन बनने में कामयाब रहा है

इस बार कोई भी टीम आउट्स्टैंडिंग नहीं है जिसपर दांव लगाया जा सके कि वो टीम आगे रहेगी या बाज़ी मारेगी.

जो टीमें अब तक विश्व विजेता नहीं बन सकीं हैं उनमें हॉलैंड और स्पेन की टीमें विश्व विजेता बनने का दमखम रखती हैं.जो अब तक स्थिति दिख रही है उससे ज़ाहिर है कि दक्षिण अमरीकी या यूरोपीय टीम ही विजेता बनेगी.

ब्राज़ील की ही टीम है ऐसी है जो अपने महाद्वीप से बाहर भी विजेता बनने में कामयाब रहती है.

ब्राज़ील ने 1958 में स्वीडन (यूरोप) में चैंपियन बनी थी और जब पहली बार वर्ष 2002 में विश्व कप फ़ुटबॉल प्रतियोगिता यूरोप और दक्षिण अमरीका से बाहर कोरीया-जापान में गया तो भी ब्राज़ील ने जीत का झंडा फहराया था.

दक्षिण अमरीका की टीम भी ब्राज़ील और अर्जेंटीना तक सीमित है. अर्जेंटीना का फ़ारवर्ड लाइन काफ़ी मज़बूत है इसलिए वो किसी पर भी पारी पड़ सकती है. यह देखने वाली बात है कि माराडोना लियोनेल मेसी को किस रोल में खेलाते हैं.

यूरोप में इंग्लैंड और स्पेन की टीमें भी अच्छी हैं. स्पेन के फ़र्नान्डो टोरेस लाजवाब खिलाड़ी है उनके पास विश्व कप में भी कुछ कर दिखाने का मौक़ा है.

जर्मनी और इटली की टीमों में कुछ कमज़ोरी है. जर्मनी में बलाक नहीं हैं तो इटली की टीम नई है. हॉलैंड की भी टीम अच्छी है और वहां हमेशा प्रतिभावन खिलाड़ी रहे हैं, लेकिन वो हमेशा एक मैच में गड़बड़ कर देती है.

मौसम का असर

Image caption माना जा रहा है कि दक्षिण अफ़्रीक़ा का मौसम यूरोपीय टीमों के लिए साज़गार साबित होगा

दक्षिण अफ़्रीका़ के विश्वकप में यूरोपीय टीम को फ़ायदा होगा, क्योंकि इस समय वहां सर्दी का मौसम यानी भारत के नवंबर दिसंबर जैसी स्थिति है और वो गर्मी की कठिनाई से बच सकेंगे.

इससे ये स्पष्ट है कि जीत यूरोपीय या दक्षिण अमरीकी टीम की होगी. उम्मीद की जा रही है कि अफ़्रीक़ा की दो टीमें क्वाटर फ़ाइनल या सेमीफ़ाइनल तक पहुंच सकती हैं.

दक्षिण अमरीकी टीमों को भी मौसम की मार नहीं झेलनी पड़ेगी क्योंकि इन देशों के खिलाड़ी यूरोप में भी खेलते रहते हैं.

एक बात ग़ौर करने वाली हैं कि वर्ष 2002 में यूरोपीय टीम ने अच्छा प्रदर्शन नहीं किया था और उसकी वजह मौसम भी थी. केवल यूरोप की दो टीमें ही सेमीफ़ाइनल में थी, तुर्की और जर्मनी. अधिकतर टीमें गर्मी की वजह से अच्छा नहीं खेल सकी.

अफ़्रीक़ी टीमों को फ़ायदा होगा. दक्षिण अमरीकी टीमों पर मौसम का कोई असर नहीं पड़ेगा.

बदला फ़ुटबॉल

Image caption अर्जेंटीना की शैली सबसे अलग माना जा रही है

फ़ुटबॉल बदल रहा है और अब किसी भी टीम की कोई अलग शैली नहीं रही.

ब्राज़ील की ख़ास बात यह है कि वो खेलेंगे अच्छा लेकिन वो ख़ूबसूरती नहीं रही जो 1982 में उनके खिलाड़ियों में थी. इस समय वो चीज़ थोड़ी बहुत अर्जेंटीना में दिख रही है अगर माराडोना टीम में कुछ ख़ास बदलाव नहीं करें तो.

सबसे बड़ा उलटफ़ेर करनी वाली टीम नीदरलैंड की है और उस टीम में हमेशा प्रतिभावन खिलाड़ी रहे हैं. इस टीम में स्नाइडर, रॉबिन, कोइल और बैबेल अगर अपनी पूरी ऊर्जा के साथ खेले तो कोई भी उलटफेर हो सकता है.

फ्रांस ने बड़ी मुश्किल से क्वालीफाई किया है लेकिन सेवरा, निकोलस एनेल्का थियरी ऑनरी और फ़्रैंक रेबेरी जैसे अच्छे खिलाड़ी हैं. उनके पास एक बेहतरीन गोलकीपर लोरिस हैं. इसलिए नीदरलैंड्स और फ़्रांस डार्क होर्स टीम साबित हो सकती है.

विश्व कप जीतने के लिए एक बेहतरीन गोलकीपर की आवश्यकता होती है. इसलिए इंग्लैंड के साथ परेशानी दिखती है.

लेकिन अमरीका, पुर्तगाल और आइवरी कोस्ट की टीमें निराश कर सकती हैं.

जिन पर नज़रें होगी

Image caption इस समय लियोनेल मेसी को दुनिया का सबसे बड़ा खिलाड़ी माना जा रहा है.

स्पष्ट है सबसे अधिक नज़रें लियोनेल मेसी पर होगी और बग़ैर किसी शक के वो इस समय दुनिया के नंबर एक खिलाड़ी हैं.

मेसी बार्सिलोना के लिए जितना अच्छा खेलते हैं उतना अच्छा अर्जैंटीना के लिए नहीं खेल पाते और उसका कारण यह है कि बार्सिलोना में उन्हें अटैकिंग थर्ड में रखा जाता है जबकि वो किरदार उन्हें अर्जेंटीना की टीम में नहीं दिया जाता है, लेकिन देखने वाली बात है कि इस बार माराडोना क्या रोल देते हैं.

क्रिस्टियानो रोनाल्डो भी अपने प्रदर्शन के शीर्ष पर हैं, वेन रूनी अगर पूरी तरह से फ़िट रहे तो इंग्लैंड को काफ़ी फ़ायदा होगा. फर्नान्डो टोरेस, रोबिन्हो, लुईस फ़ेबियानो पर भी सबकी नज़रें होंगीं. काका के लिए यह आख़िरी मौक़ा है कि अपने को साबित करें.

Image caption डेविड बैकम इस बार विश्वकप का हिस्सा नहीं होंगे.

माइकल बलाक की कमी सबसे अधिक खेलगी. इस बार क्वालीफ़ाई नहीं कर सकी रूसी टीम के गोलकीपर इगोर अकंफ़ियन का मैच नहीं खेलते देखना सताएगा, क्योंकि वो दुनिया के नंबर एक गोलकीपर हैं.

आर्सेनल से खेलने वाले आंद्रे एसविन का नहीं होना भी खलेगा. अर्जेंटीना की टीम में ज़ाविया जेनेती का नहीं लिया जाना बहुत ही दुख की बात. डेविड बेकम की भी कमी खलेगी.

(बीबीसी संवाददाता पंकज प्रियदर्शी से बातचीत पर आधारित)

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