फ़ुटबॉल के महानायक

  • 29 मई 2010
ज़िदान

फ़ुटबॉल का खेल जितना रोमांचक होता है, उतने ही रोमांचक होते हैं खिलाड़ी. मैदान पर अपने खेल से पूरी दुनिया का मन मोहने वाले खिलाड़ियों की पूरी जमात है. इस जमात में से कुछ को चुनना काफ़ी कठिन है. फिर भी हम आपके लिए कुछ खिलाड़ियों के बारे में जानकारी लेकर आए हैं.

एयोसेबियो

मोज़ाम्बिक में जन्मे एयोसेबियो ने 19 वर्ष की उम्र में बेनफ़ीका क्लब की ओर से खेलना शुरू किया और पहले ही मैच में पांव के ज़ादूगर समझे जाने वाले पेले के क्लब सैन्टूस के ख़िलाफ़ उन्होंने तीन गोल दाग़ दिए.

वर्ष 1962 के यूरोपियन कप फ़ाइनल में एयोसेबियो ने रियाल मैड्रिड के ख़िलाफ़ दो गोल ठोक कर अपनी टीम को जीताने में अहम भूमिका निभाई. पुर्तगाल की ओर से वर्ष 1966 के विश्व कप में ख़ेलते हुए एयोसेबियो ने सर्वाधिक नौ गोल किए.

इस समय तक वे 'ब्लैक पर्ल' के नाम से मशहूर हो चुके थे. 1968 में उन्हें यूरोप में सबसे ज़्यादा गोल करने वाले खिलाड़ी बनने पर 'गोल्डन बूट' मिला.

पेले

फुटबाल इतिहास के महानतम ख़िलाड़ियों में से एक पेले पहली बार ब्राज़ील की ओर से अर्जेंटीना के ख़िलाफ़ मैदान में उतरे और 1958 के विश्व कप में पहले दो मैचों से अलग रहने के बाद रूस के ख़िलाफ उन्हें ख़ेलने का मौका मिला.

विश्व कप का पहला गोल पेले ने क्वार्टर फ़ाइनल मैच में वेल्स के विरुद्ध ठोका.

सेमी फ़ाइनल में फ़्रांस के ख़िलाफ उन्होंने है-ट्रिक जमाई और फ़ाइनल में मेजबान स्वीडन के विरुद्ध विजयी गोल दाग़ कर 17 साल की उम्र में पहले ऐसे खिलाड़ी बने, जो विश्व विजेता टीम का सदस्य था.

1970 के विश्व कप में उन्होंने ब्राज़ील को तीसरी बार ख़िताबी जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई.

बेकनबॉवर

पश्चिम जर्मनी के बेकनबॉवर उत्कृष्ट कप्तान और आक्रमण पंक्ति के बेहद ख़तरनाक ख़िलाड़ी साबित हुए.

1966 के विश्व कप में उन्होंने अपनी राष्ट्रीय टीम की ओर से चार गोल किए. इसके अगले विश्व कप में बेकनबॉवर ने क्वार्टर फ़ाइनल में इंग्लैंड के ख़िलाफ़ टीम को जीत दिलाने में मुख्य भूमिका निभाई.

कप्तान के रूप में उन्होंने 1974 में पश्चिमी जर्मनी को विश्व कप का ख़िताब दिलाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया.

वर्ष 1977 में अंतरराष्ट्रीय फ़ुटबॉल से रिटायर होने के बाद वे 1984 में टीम के कोच नियुक्त हुए. कोच के रुप में बेकनबॉवर ने टीम को 1986 और 1990 के विश्व कप फ़ाइनल में पहुँचाने में मुख्य भूमिका निभाई.

गरिंचा

जब गरिंचा का जन्म हुआ तो वे चलने-फिरने में असमर्थ थे. ऑपरेशन के बाद वे चलने में समर्थ हुए. लेकिन उनका बायाँ पैर हमेशा के लिए टेढ़ा हो गया.

इसके बावज़ूद गरिंचा ने फ़ुटबॉल को करियर बनाया. ब्राज़ील को शीर्ष टीम का दर्ज़ा दिलाने में मुख्य भूमिका निभाई.

वर्ष 1958 के विश्व कप में पहले दो मैचों से बाहर रहने के बाद उन्होंने फ़ाइनल में दो गोल दाग़े.

इसके अगले विश्व कप में पेले के चोटिल होने के बाद उन्हें खेलने का मौक़ा मिला. 'लिटिल बर्ड' के नाम से मशहूर इस खिलाड़ी ने मैदान से बाहर भी सुर्ख़ियाँ बटोरी.

वर्ष 1963 में उन्होंने अपनी पत्नी और आठ बच्चों को छोड़ कर एक स्थानीय गायिका से शादी कर ली.

मिशेल प्लातिनी

फ़्रांस में आकर बसे एक इतालवी परिवार में जन्मे प्लातिनी ने 1955 में नैन्सी क्लब के साथ करियर की शुरुआत की.

1976 के ओलंपिक खेलों में उन्होंने फ़्रांस की ओर से अंतरराष्ट्रीय करियर का आगाज़ किया.

1984 में यूरोपीय चैम्पियनशिप में उन्होंने फ़्रांस का प्रतिनिधित्व किया जिसमें उन्होंने दो है-ट्रिक समेत नौ गोल दाग़े.

1985 में प्लातिनी को तीसरी बार सर्वश्रेष्ठ यूरोपीय ख़िलाड़ी के ख़िताब से नवाज़ा गया. उन्होंने पहला विश्व कप 1978 में खेला और इसके अगले विश्व कप में फ़्रांस को चौथा स्थान दिलाने में अपना योगदान किया.

प्लातिनी ने 1987 में अंतरराष्ट्रीय फ़ुटबॉल से संन्यास ले लिया.

ज़ीको

ब्राजील में ज़न्में ज़ीको फ़ुटबॉल खेलने वाले अपने पांच भाइयों में सबसे छोटे थे. उन्होंने 1973 में फ्लेमिंगो की ओर से लीग करियर की शुरुआत की और इसके तीन वर्ष बाद से वे अंतरराष्ट्रीय मैचों में नज़र आने लगे.

पहले दो सीज़न में ही उन्होंने 100 गोल दाग़ कर सर्वश्रेष्ठ दक्षिण अमरीकी ख़िलाड़ी होने का गौरव प्राप्त किया.

1978 के विश्व कप में वे चोट की समस्या से जूझते रहे. इसके अगले विश्व कप में अपना जलवा बिख़ेरते हुए बोलीविया के ख़िलाफ़ है-ट्रिक जड़ कर टीम को फ़ाइनल में पहुँचा दिया.

1986 के विश्व कप में ज़ीको सिर्फ़ तीन मैच खेल पाए. फ़्रांस के विरुद्ध उन्होंने अपना आख़िरी मैच खेला.

रूड गुलिट

हालैंड के गुलिट मैदान में कोई भी ज़िम्मेदारी निभाने में सक्षम थे. आक्रमण पंक्ति के साथ-साथ वे रक्षा पंक्ति के भी बेहतरीन ख़िलाड़ी समझे जाते हैं.

अस्सी के दशक में एसी मिलान की ओर से खेलते हुए उन्होंने काफ़ी नाम कमाया. गुलिट 1995 में चेल्सी क्लब में शामिल हुए.

1996 में ग्लेन होडल के मैनेजर पद छोड़ देने पर उन्होंने चेल्सी के मैनेजर की भी भूमिका निभाई. एक साल बाद वे एफ़ए कप जीतने वाले सबसे युवा मैनेजर बने. ऐसा करने वाले वे पहले ग़ैर-ब्रितानी थे.

योहान क्रीफ़

25 अप्रैल 1947 को जन्मे क्रीफ़ का परिवार आयैक्स के स्टेडियम के पास ही रहता था. इसलिए जब 10 साल की उम्र में उन्होंने आयैक्स की जूनियर टीम के साथ करियर का आगाज़ किया, तो किसी को आश्चर्य नहीं हुआ.

उन्होंने हमेशा 14 नंबर की जर्सी पहनने पर ज़ोर दिया. हॉलैंड की टीम के साथ ख़ेलते हुए वे पहले ऐसे ख़िलाड़ी भी बने जिन्हें एक वर्ष के लिए टीम से निलंबन झेलना पड़ा.

एक और बदनुमा दाग क्रीफ़ के करियर पर 1974 के विश्व कप के दौरान लगा ज़ब वे हाफ़ टाइम के समय चेतावनी पाने वाले पहले खिलाड़ी बने. लेकिन इसके बावजूद 70 के दशक में यूरोपीय फ़ुटबॉल में उनकी तूती बोलती थी.

बास्टेन

मार्को वैन बास्टेन ने 1982 में डच लीग चैम्पियनशिप में आयैक्स की ओर से करियर की शुरुआत की.

दो साल बाद उन्होंने एम्सटर्डम की ओर से 26 मैचों में 28 गोल दाग़ कर अपनी धाक ज़माई. इसी समय उन्हें हॉलैंड की राष्ट्रीय टीम में स्थान मिला.

अगले सत्र में उन्होंने 26 मैच में 37 गोल मारे. इसका पुरस्कार उन्हें गोल्डन बूट के साथ मिला. उन्होंने हॉलैंड में रहते हुए 129 मैचों में 127 गोल मारे.

अपनी टीम को उन्होंने तीन लीग ख़िताब और एक यूरोपीय कप दिलवाया. 1987 में वे सान सीरो क्लब से जुड़े और बाद में मिलान से हाथ मिलाया.

चोट की समस्या से लंबे अरसे तक जूझने के बाद उन्होंने 1995 में फ़ुटबॉल को अलविदा कह दिया.

डिएगो माराडोना

महज 16 वर्ष की उम्र में उन्हें अर्जेंटीना की राष्ट्रीय टीम के साथ खेलने का मौक़ा मिला. दो साल बाद वे विश्व विजेता जूनियर टीम के कप्तान बने.

माराडोना को 1979 और 1980 में दक्षिण अमरीका का सर्वश्रेष्ठ ख़िलाड़ी चुना गया. वर्ष 1982 में वे मोटी रक़म लेकर बार्सिलोना क्लब से जुड़े.

1988 में माराडोना की अगुआई में अर्जेंटीना ने दूसरी बार विश्व कप जीता. इस विश्व कप में उन्होंने पांच गोल दाग़े जिसमें एक गोल काफ़ी विवादास्पद रहा.

वहीं दूसरा गोल इतिहास के पन्नों में दर्ज़ हो गया. 1994 के विश्व कप में नाइजीरिया के ख़िलाफ मैच के दौरान प्रतिबंधित दवाओं के सेवन के मामले ने उनके करियर के अंत का रास्ता साफ़ कर दिया.

रोबर्तो बैजियो

इटली की ओर से ख़ेलने वाले रोबर्तो बैजियो 90 के दशक में फुटबॉल के मैदान पर छाए रहे. वर्ष 1988-89 में उन्होंने इतालवी लीग मैचों में 24 गोल दाग़ कर अपनी प्रतिभा साबित कर दी.

1990 में विश्व कप से ठीक पहले वे युवेन्टस से जुड़े. विश्व कप में उनके दो गोलों की मदद से इटली को तीसरा स्थान मिला.

इटली सेमी फ़ाइनल में अर्जेंटीना के हाथों हार गया था. पांच वर्षों तक युवेन्टस से जुड़े रहे बैजियो को 1993 में दुनिया और यूरोप का सर्वश्रेष्ठ ख़िलाड़ी चुना गया.

उनके लिए 1994 का विश्व कप सबसे दमदार साबित हुआ. हालांकि फ़ाइनल में ब्राज़ील के ख़िलाफ़ वे पेनल्टी शूट आउट में चूक गए और ब्राज़ील को ख़िताबी जीत मिली.

स्टेनले मैथ्यूज़

मैदान के दाहिने छोर से विपक्षी रक्षा पंक्ति के भेदने में सक्षम इंग्लैंड के मैथ्यूज़ की गिनती उन महानतम खिलाड़ियों में होती है, जो ड्रिबलिंग में माहिर थे.

उन्हें 1965 में नाइटहुड की उपाधि दी गई. ये उपाधि पाने वाले वे ब्रिटेन के पहले खिलाड़ी थे.

वर्ष 1931 में करियर शुरू करने वाले मैथ्यूज़ स्टोक सिटी और ब्लैकपूल की ओर से ख़ेले. इसके सात वर्षों के बाद उन्हें राष्ट्रीय टीम में जगह मिली.

1965 में रिटायर होने से पहले मैथ्यूज़ ने 54 अंतरराष्ट्रीय मैच ख़ेले. सत्रह साल की उम्र में उन्होंने स्थानीय फ़र्स्ट डिविज़न प्रोफ़ेशनल लीग में स्टोक सिटी की ओर से खेलना शुरू किया था.

अल्फ्रेडो डी स्टीफ़ानो

स्टीफ़ानो की गिनती अपने आप में एक पूर्ण फ़ुटबॉल ख़िलाड़ी के रूप में होती है. यह भी एक विडंबना है कि उन्हें किसी विश्व कप में ख़ेलने का मौक़ा नहीं मिला.

एक और नायाब रिकॉर्ड उनके नाम है- तीन देशों की ओर से खे़लने का. अर्जेंटीना में स्टीफ़ानो ने अपने आपको आक्रमण पंक्ति के ख़िलाड़ी के रुप में तराशा.

इसके बाद वे प्रतिबंधित कोलंबियाई लीग की ओर से खेले और औसतन हर मैच में गोल किया. एक अनूठा अनुबंध भी उनके नाम है.

वे रियाल मैड्रिड और बार्सिलोना की ओर से एक साथ ख़ेले. एक सीजन रियाल के साथ और अगला बार्सिलोना के साथ.

ज़िनेदिन ज़िदान

अल्जीरियाई मूल के इस फ़्रांसीसी ख़िलाड़ी को बेहतरीन मिडफ़ील्डरों में एक माना जाता है. ज़िदान ने अपना फ़ुटबॉल करियर फ़्रांसीसी क्लब बोर्दो की ओर से शुरू किया था.

चार सीजन यहाँ से फ़ुटबॉल खेलने के बाद वे फ़्रांस की ओर से खेलने वाले अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी बने. 1996 में ज़िदान मिलान से युवेन्टस गए.

यहाँ उन्होंने युवेन्टस को कई महत्वपूर्ण प्रतियोगिताओं में जीत दिलाई. 1998 में 16वें विश्व कप की मेज़बानी फ़्रांस ने की.

इसमें ज़िदान ने चमकदार ख़ेल दिख़ाते हुए फ़ाइनल में ब्राज़ील के ख़िलाफ़ दो गोल दाग़ कर फ़्रांस को विश्व कप जिताने में अहम भूमिका निभाई.

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