सॉकर सिटी स्टेडियम बना जोहानेसबर्ग की शान

  • 7 जून 2010
स्टेडियम
Image caption जोहानेसबर्ग में फ़ुटबाल विश्व कप की तैयारी ज़ोर-शोर से जारी है

विश्व कप फ़ुटबॉल के लिए दक्षिण अफ़्रीका में तैयारी ज़ोर-शोर से चल रही है. तैयारियों का आख़िरी दौर चल रहा है. जोहानेसबर्ग में हर जगह इसी तरह का आलम है.

शहर के दो स्टेडियम में मैच होने हैं- सॉकर सिटी और एलिस पार्क. दोनों स्टेडियम के आसपास का नज़ारा देखने लायक है. अभी से ही ये पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं.

ख़ासकर सॉकर सिटी स्टेडियम. इसी स्टेडियम में विश्व कप का फ़ाइनल मैच खेला जाना है. दक्षिण अफ़्रीका के निवासियों के लिए यह गर्व का विषय है.

शाम ढलते ही यहाँ धीरे-धीरे लोगों की भीड़ जमा होने लगती है. ये लोग यहाँ आकर इस विशाल स्टेडियम को देर तक निहारते रहते हैं. उस समय उनकी आँखों की चमक देखने लायक़ होती है.

रंगभेद समाप्त होने के बाद दक्षिण अफ़्रीका के लिए यह बड़ा मौक़ा है. ये प्रतियोगिता उनके लिए एक माध्यम है...माध्यम अपने आपको प्रगतिशील साबित करने का.

प्रगति या दिखावा?

लेकिन क्या सचमुच दक्षिण अफ़्रीका प्रगति के पथ पर है या फिर विश्व कप फ़ुटबॉल के कारण तेज़ी देखी जा रही है.

आम लोग जहाँ विश्व कप को लेकर अपना सिर ऊँचा किए घूम रहे हैं, वहीं उनमें सरकार के प्रति बहुत हद तक उदासीनता का आलम है.

सरकारी व्यवस्था से लोगों में नाराज़गी है. स्वास्थ्य सेवाओं और सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को लेकर ग़ुस्सा भी है.

Image caption दक्षिण अफ़्रीकी राष्ट्रपति ज़ूमा अपनी शादियों को लेकर चर्चा में हैं

अपराध को लेकर भी चिंता क़ायम है. विश्व कप को देखते हुए दक्षिण अफ़्रीकी सरकार ने ज़्यादा से ज़्यादा पुलिसकर्मियों को तैनात किया है.

लेकिन बाहर से आने वाले लोग, ख़ासकर जोहानेसबर्ग शहर में, काफ़ी सावधानी बरत रहे हैं. अब आने वाले समय में ही पता चलेगा कि सरकार इतने बड़े आयोजन को सफलतापूर्वक करा पाती है या नहीं.

ज़ूमा बिन सब सूना

सरकार की बात आई, तो राष्ट्रपति जैकब ज़ूमा के बिना चर्चा अधूरी रह जाएगी. जैकब ज़ूमा की छवि गंभीर राष्ट्रपति की नहीं है.

देश में मज़बूत विपक्ष की कमी साफ़ नज़र आती है.

राष्ट्रपति ज़ूमा की इस छवि के पीछे विवाद बहुत बड़ा कारण है. उनकी कई शादियों की चर्चा अख़बारों में होती रहती है.

लेकिन विश्व कप की इस आपाधापी में भी यहाँ के कई अख़बार उनके प्रेम प्रसंगों को प्रमुखता से छापना नहीं भूलते.

इन्हीं सब वजहों से नेल्सन मंडेला और एम्बेकी के उत्तराधिकारी बने ज़ूमा लोगों के लिए गंभीर नेता नहीं बन पाए हैं.

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