जर्मनी, घाना और स्लोवेनिया जीते

पोडोलस्की
Image caption जर्मनी के हीरो रहे पोडोलस्की. पहला गोल उन्होंने ही किया.

जर्मनी ने ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ जिस तरह से फ़ुटबॉल का खेल दिखाया, उससे लग गया कि मैदान में कोई अनुभवी और चैम्पियन टीम खेल रही है.

चार गोल से जीत दर्ज करने के बावजूद अगर ये कहा जाए कि जर्मनी को कम से कम दो-चार गोल और मारने चाहिए थे, तो कोई ग़लत बात नहीं होगी.

मिरोस्लाव क्लोज़ा का भी अकाल ख़त्म हुआ.

विश्व कप से पहले ख़राब प्रदर्शन से जूझ रहे क्लोज़ा ने करिश्माई खेल दिखाया और गोल करने के कई अवसर बनाए. हालाँकि वे एक गोल ही कर पाए. लेकिन जर्मनी की ओर से खाता खोला पोडोल्स्की ने. जिन्होंने आठवें मिनट में ही अपनी टीम को बढ़त दिला दी.

फिर आई क्लोज़ा की बारी. क्लोज़ा के बाद युवा टॉम मुलर और ककाउ ने गोल करके अपनी टीम को 4-0 से बड़े अंतर से जीत दिला दी. वैसे विश्व कप का तीसरा दिन रेड कार्ड का भी दिन रहा, जब तीनों मैचों में एक-एक खिलाड़ी को रेड कार्ड दिखाया गया.

घाना का दबदबा

इससे पहले चार बार की अफ़्रीकी चैम्पियन घाना की टीम जब सर्बिया के सामने उतरी तो एक रोमांचक और संघर्ष वाले मैच की उम्मीद की जा रही थी. एक टीम को चार साल पहले की अपनी बुरी याद को धोना था, तो दूसरी टीम और आगे जाने का ख़्वाब लेकर मैदान में उतरी थी.

चार साल पहले मान्टेनिग्रो के साथ उतरी सर्बिया की टीम अपने तीनों मैच हार गई थी. जबकि घाना की टीम दूसरे दौर तक पहुँची. दोनों टीमों का एजेंडा साफ़ था. लेकिन दम दिखाया घाना की टीम ने.

Image caption घाना के असमाओ गियान ने एक मात्र गोल किया, जो विजयी गोल साबित हुआ.

घाना ने प्रभावशाली खेल दिखाया और जिस तरह के खेल का उन्होंने प्रदर्शन किया, उस हिसाब से उन्हें ज़्यादा अंतर से जीतना चाहिए था.

74वें मिनट में सर्बिया के खिलाड़ी एलेक्ज़ेंडर लूकोविच को रेड कार्ड दिखाया गया. इसके बाद भी 10 खिलाड़ियों के साथ खेल रही सर्बिया की टीम को छका कर गोल करने में घाना की टीम नाकाम रही.

लेकिन असली मौक़ा आया 85वें मिनट में जब सर्बिया के खिलाड़ी द्रावको कुज़मानोविच ने गेंद को हाथ से रोकने की कोशिश की और रेफ़री ने घाना को पेनल्टी दिया. पेनल्टी पर शॉट लिया घाना के खिलाड़ी असमाओ गियान ने. सारा स्टेडियम उस समय एकटक असमाओ के शॉट पर नज़र गड़ाए हुआ था.

और असमाओ गियान ने पेनल्टी पर आसानी से गोल करके अपनी टीम को जीत दिला दी. इस जीत के साथ घाना इस विश्व कप में जीत हासिल करने वाला पहला अफ़्रीकी देश बना.

स्लोवेनिया की जीत

एक अन्य मैच में स्लोवेनिया और अल्जीरिया की टीम आमने-सामने थी. इस मैच में दोनों टीमें इतना रक्षात्मक खेल रही थी कि कोई भी टीम गोल नहीं कर पा रही थी.

पहले हाफ़ में कुछ ख़ास नहीं हुआ, जो भी हुआ वो दूसरे हाफ़ में. 72वें मिनट में. अल्जीरिया के अब्देलकादिर गेज़ाल को रेड कार्ड मिला और उसी समय खेल बदल गया. उस समय तक दोनों टीमें बराबरी का खेल खेल रही थी, लेकिन सिर्फ़ 10 खिलाड़ियों के मैदान में रह जाने के कारण अल्जीरिया पर जैसे दबाव आ गया.

इसके बावजूद अल्जीरिया के गोलकीपर फ़ौजी चाओची सर्बिया के कप्तान रॉबर्ट कोरेन के शॉट पर गोल बचा सकते थे, लेकिन उनका आकलन सही नहीं निकला. और गेंद उनके सामने टप्पा खाकर गोलपोस्ट में घुस गई.

इस ग्रुप में स्लोवेनिया के जीत का काफ़ी महत्व है क्योंकि कल हुआ इंग्लैंड और अमरीका के बीच मैच ड्रॉ रहा था. विश्व कप में यह स्लोवेनिया की पहली जीत है. इससे पहले 2002 में उनकी टीम पहली बार विश्व कप के लिए क्वालीफ़ाई हुई थी. लेकिन उसमें वो कोई मैच नहीं जीत पाई थी.

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