विश्व कप में रविवार को तीन मुक़ाबले

  • 13 जून 2010

विश्व कप में रविवार को पहला मैच पोलोकवाने में अल्जीरिया और स्लोवेनिया क बीच खेला जाएगा.

दोनों टीमों ने अपेक्षा के उलट विश्व कप के लिए क्वालीफ़ाई किया है.

न तो अल्जीरिया ने और न ही स्लोवेनिया ने आज तक नॉक आउट स्टेज तक जगह बनाई है.

जानकार अब भी उन्हें इंग्लैंड और अमरीका से ऊपर नहीं मान रहे.

स्लोवेनिया की टीम भले ही चर्चित न हो लेकिन काफ़ी संतुलित मानी जाती है दूसरी ओर अल्जीरिया की टीम में काफ़ी बदलाव किए गए हैं.

जब से टीम ने विश्व कप के लिए क्वालीफ़ाई किया है, तब से टीम में नई जान फूँकने की कोशिश की गई है.

नौ खिलाड़ी को इस साल से पहले कोई अंतरराष्ट्रीय मैच भी नहीं खेले थे.

अल्जीरिया के कोच राबा सदाने ने ख़राब फ़ॉर्म में चल रहे कप्तान याज़िद मंसूरी को टीम से हटा दिया है और कप्तानी करेंगे याहिया.

स्लोवेनिया की टीम में कप्तान रॉबर्ट कोरेन और स्टार स्ट्राइकर मिलिवोजे नोवाकोविच की मौजूदगी से काफ़ी मज़बूती आई है.

सर्बिया-घाना

दूसरा मैच सर्बिया और घाना के बीच प्रीटोरिया में खेला जाएगा.

आकलन तो यहाँ तक किया जा रहा है कि सर्बिया इस प्रतियोगिता में डार्क हॉर्स साबित हो सकती है.

एक अलग राष्ट्र के रूप में सर्बिया का ये पहला विश्व कप है, हालाँकि यूगोस्लाविया की टीम के रूप में वो नौ बार विश्व कप के लिए क्वालीफ़ाई कर चुकी है.

और सर्बिया मॉन्टिनिग्रो के रूप में एक बार वर्ष 2006 में. सर्बिया-मॉन्टिनिग्रो की टीम 2006 के विश्व कप में बुरी तरह हारी थी और अर्जेंटीना ने तो उसे छह गोल से हराया था.

लेकिन नेमान्जा विदिच और ब्रेनिस्लाव इवानोविच के रहते अब ऐसा संभव नहीं दिखता.

वर्ष 2006 में पहला विश्व कप खेलने वाली घाना की टीम दूसरे दौर में पहुँची थी और इस बार भी टीम कारनामा दोहराने के लिए तैयार है.

घाना की टीम बेहतरीन युवा खिलाड़ियों से भरी हुई है.

घाना की अंडर 20 टीम ने अक्तूबर में ही विश्व कप जीता था. उस अंडर 20 टीम के कई सदस्य राष्ट्रीय टीम में शामिल किए गए हैं.

माइकल एसियन टीम में नहीं हैं, लेकिन स्टीफ़ेन एपिया, जॉन मेनसा और सुले मुन्तरी के रहते टीम किसी मायने में कम नहीं लगती.

जर्मनी-ऑस्ट्रेलिया

तीसरा मैच जर्मनी और ऑस्ट्रेलिया के बीच डरबन में खेला जाएगा.

1974 में अपना पहला विश्व कप खेलने वाली ऑस्ट्रेलिया की टीम में काफ़ी परिवर्तन आ चुका है और टीम काफ़ी परिपक्व हो चुकी है.

ऑस्ट्रेलिया की टीम ने अपने डिफ़ेंस पर ज़्यादा ध्यान दिया है और उसके गोलकीपर मार्क स्वार्ज़र दुनिया के बेहतरीन गोलकीपरों में से हैं.

जर्मनी की मुश्किल कुछ और है. उनके स्ट्राइकर मिरोस्लाव क्लोज़ा इस समय अच्छे फ़ॉर्म में नहीं हैं लेकिन कोच जोकिम लो उन्हें लेकर कोई जोखिम नहीं उठाना चाहते यानी क्लोज़ा को खेलने का मौक़ा मिलने की पूरी संभावना है.

इसके अलावा जर्मनी की टीम जेरोम बोटेंग और मीटरसैकर पर भी भरोसा करेगी. माइकल बलाक की जगह सैमी खेदिरा को मौक़ा मिल सकता है.

दूसरी ओर ऑस्ट्रेलिया की टीम के कोच हैरी किवेल और जेसन कुलिना को मैदान पर उतारेंगे. टिम काहिल के भी फ़िट होने की उम्मीद है.

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