पेले-माराडोना आमने-सामने

  • 15 जून 2010
डिएगो माराडोना
Image caption कोच मेराडोना की निगरानी में अर्जेंटीना विश्व कप का पहला मैच जीत चुकी है

दक्षिण अफ़्रीका में इन दिनों ब्राज़ील की मीडिया में आ रही कुछ रिपोर्टों पर चर्चा तेज़ है.

इन रिपोर्टों में ब्राज़ील के महान खिलाड़ी पेले को माराडोना पर गंभीर आरोप लगाते हुए और यह कहते हुए बताया गया है कि उन्होंने कोच पद इसलिए स्वीकार किया क्योंकि उनके पास न तो काम है और न ही पैसे.

कोचिंग का बहुत कम अनुभव होने के बावजूद वर्ष 2008 में माराडोना को अर्जेंटीना टीम का कोच बनाया गया था. माराडोना और विवाद का साथ चोली-दामन का है. वो चाहे ड्रग लेने का मामला हो या मशहूर हैंड ऑफ़ गॉड गोल का मामला.

लेकिन अब माराडोना पर अपनी टीम को विश्व विजेता बनाने की बड़ी ज़िम्मेदारी है.

वैसे पेले और माराडोना की प्रतिद्वंद्विता भी काफ़ी पुरानी है. दोनों एक-दूसरे के ख़िलाफ़ तीखी टिप्पणियाँ करते रहे हैं.

पेले ने माराडोना को ये भी याद दिलाया कि कैसे उनके बुरे वक़्त में उन्होंने माराडोना के टीवी कार्यक्रम में हिस्सा लिया और उनके साथ फ़ुटबॉल भी खेले, क्योंकि उन्हें उस समय पैसों की आवश्यकता थी.

इस समय दक्षिण अफ़्रीका में ब्राज़ील और अर्जेंटीना के समर्थकों के बीच वाकयुद्ध चलता रहता है, लेकिन इन सबके बीच दो महान खिलाड़ियों की तकरार पर मीडिया की ख़ास नज़र है.

संदेश से ज़रूरी फ़ुटबॉल

फ़ुटबॉल का बढ़ता बुख़ार सब पर हावी होने लगा है. तभी तो वेनेज़ुएला के राष्ट्रपति ह्यूगो चावेज़ को अपना रेडियो संदेश का समय भी आगे बढ़ाना पड़ा.

अपने देश में फ़ुटबॉल की लोकप्रियता के बीच ऐसा कैसे होता कि चावेज़ का संदेश उस समय प्रसारित होता, जब दुनियाभर की निगाहें विश्व कप फ़ुटबॉल के मैचों पर है.

चावेज़ ने अपने कार्यक्रम में फेरबदल किया. आम तौर पर चावेज़ का रेडियो संदेश सुबह 11 बजे प्रसारित होता है लेकिन उन्होंने इसे बदल कर शाम छह बजे कर दिया.

चावेज़ ने अपने ट्विटर अकाउंट पर अपने संदेश प्रसारित होने के समय में बदलाव की घोषणा की. अपने संदेश में चावेज़ ने अर्जेंटीना और कोच माराडोना को बधाई भी दी है और कहा है कि आपकी टीम पाँच गोल मार सकती थी.

ज़िदान के निशाने पर फ़्रांस

Image caption दक्षिण अफ़्रीका में एक मैच देख रहे फ्रांस के पूर्व खिलाड़ी ज़िनेदिन ज़िदान

फ़्रांस के पूर्व स्टार खिलाड़ी ज़िनेदिन ज़िदान विश्व कप में अपनी टीम के प्रदर्शन से ख़ुश नहीं है. टीम के कोच रेमेंड डोमेनेच ख़ास तौर पर उनके निशाने पर हैं.

फ़्रांस की टीम उरुग्वे के ख़िलाफ़ मौजूदा विश्व कप के अपने पहले मैच में कोई गोल नहीं कर पाई थी और मैच ड्रॉ समाप्त हो गया था.

वर्ष 2006 के विश्व कप में फ़्रांस की टीम को फ़ाइनल तक ले जाने वाले और विश्व कप के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी बनने वाले ज़िदान का कहना है कि टीम एकजुट नहीं नज़र आती.

कोच डोमेनेच की कड़ी आलोचना करते हुए ज़िदान ने यहाँ तक कह दिया कि डोमेनेच कोच है ही नहीं. उन्होंने खिलाड़ियों से अपील की कि अपनी नाक की लड़ाई छोड़कर वे ख़ुद से अच्छा खेलने की ज़िम्मेदारी लें.

वर्ष 2006 के विश्व कप के फ़ाइनल में पहुँचने के बाद से फ़्रांस का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा है और थियरी ऑनरी के विवादित गोल की मदद से टीम किसी तरह विश्व कप के लिए क्वालीफ़ाई कर पाई.

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