उरुग्वे ने दक्षिण अफ़्रीका को हराया

क्या मेज़बान दक्षिण अफ़्रीका का विश्व कप का सफ़र जल्द ही ख़त्म होने वाला है? यही सवाल लेकर निराश दक्षिण अफ़्रीकी फ़ैन प्रीटोरिया के मोजेज मबिदा स्टेडियम से बाहर निकले.

उरुग्वे के ख़िलाफ़ मैच में दक्षिण अफ़्रीकी टीम की दुगर्ति बन गई. इस हार के बाद उनके विश्व कप के दूसरे दौर में जाने की संभावना को तगड़ा झटका लगा है.

दक्षिण अफ़्रीका की टीम नहीं चाहती कि उस पर ये तमग़ा लगे कि वो पहला ऐसा मेज़बान देश है, जिसे दूसरे दौर में प्रवेश नहीं मिला.

इस मैच में उरुग्वे के स्टार स्ट्राइकर डेविड फ़ोरलैन छाए रहे, उनके साथ स्वारेज़ और कवानी ने एक के बाद एक कई आक्रमण किए. लेकिन 24वें मिनट में जिस शानदार शॉट पर फ़ोरलैन ने पहला गोल किया, वो दर्शनीय शॉट था.

फ़ोरलैन के शानदार गोल की मदद से उरुग्वे ने बढ़त तो बनाई, लेकिन आक्रामक खेल नहीं छोड़ा. उसके तीनों स्टार स्ट्राइक दक्षिण अफ़्रीकी गोल पर हमला करते रहे.

दूसरी ओर दक्षिण अफ़्रीकी खिलाड़ियों ने कई अच्छे मूव बनाए, लेकिन वे उरुग्वे के डिफ़ेंस को भेंद नहीं पाए.

नतीजा ये हुआ कि खिलाड़ी दबाव में आए और आख़िरकार वही हुआ जो किसी खिलाड़ी के लिए बहुत दुर्भाग्यपूर्ण होता है. गोलकीपर खुने को रेड कार्ड मिला और उरुग्वे को पेनल्टी.

एक बार फिर डेविड फ़ोरलैन ने पेनल्टी पर गोल करके अपनी टीम को 2-0 से बढ़त दिला दी.

दक्षिण अफ़्रीका की हालत उस समय और पस्त हो गई, जब मैच के आख़िरी क्षणों में परेरा ने एक और गोल करके अपनी टीम को 3-0 से जीत दिला दी.

अब दक्षिण अफ़्रीका का आख़िरी ग्रुप मैच फ़्रांस के साथ होगा. इस बीच फ़्रांस और मैक्सिको के बीच होने वाले मैच के नतीजे पर भी आगे का समीकरण निर्भर करेगा.

स्विट्जरलैंड-स्पेन

इससे पहले विश्व कप का अब तक का सबसे बड़ा उलटफेर करते हुए स्विट्ज़रलैंड ने स्पेन को हरा दिया.

एक यूरोपियन चैम्पियन और दुनिया की नंबर दो टीम. टीम में कई स्टार खिलाड़ी. सामने स्विट्ज़रलैंड की टीम, जिसकी फ़ीफ़ा रैंकिंग 24वीं है और जो टीम यूरो कप के पहले ही दौर से बाहर हो चुकी थी. लेकिन नतीजा क्या हुआ, स्पेन हार गया.

खेल पर नियंत्रण स्पेन का ही था, लेकिन उसके स्टार खिलाड़ी स्कोर नहीं कर पाए. 52 मिनट में स्पेन के डिफेंस को शर्मसार करते हुए स्विट्ज़रलैंड के गेल्सन फ़र्नांडीस ने लंबे पास पर मिली गेंद गिरते-पड़ते गोल में डाल दी.

स्पेन के समर्थक हक्के-बक्के, खिलाड़ी हक्के-बक्के. लेकिन स्विट्ज़रलैंड के कैंप में ख़ुशी की लहर दौड़ गई.

स्पेन के प्रतिष्ठित क्लब बार्सिलोना से खेलने वाली ज़ावी, इनिएस्टा और डेव विला की तिकड़ी स्विट्ज़रलैंड के गोल का जवाब नहीं ढूँढ़ पाई.

हताश टीम के कोच ने टोरेस, नेवास और पेड्रो को फ़्रंट पर खेलने भेजा. लेकिन कुछ भी नतीजा नहीं निकला. बीच में स्विट्ज़रलैंड को एक और गोल करने का मौक़ा मिला, लेकिन गेंद गोल पोस्ट से टकरा गई.

मैच के आख़िरी कुछ मिनटों में स्पेन ने अपना सब कुछ झोंक दिया. लेकिन गोल नहीं हो पाया. स्पेन के लिए अब रास्ता काफ़ी मुश्किल हो गया है क्योंकि अगर टीम ग्रुप में दूसरे स्थान पर रही, तो दूसरे दौर में ही उसका मुक़ाबला ब्राज़ील से हो सकता है.

चिली-होंडूरास

दिन के पहले मैच में अपेक्षा के अनुरूप चिली ने होंडूरास को एक गोल से हरा दिया. चिली ने 48 साल बाद विश्व कप में कोई जीत हासिल की है.

वर्ष 1962 के बीच चिली की टीम कोई मैच नहीं जीत पाई थी. लेकिन इस विश्व कप में मार्चेलो बिसला की टीम काफ़ी तैयारी से आई है और माना ये भी जा रहा है कि ग्रुप एच से स्पेन के साथ चिली की टीम ही क्वालीफ़ाई करेगी.

चिली ने इस विश्व कप में अपने अभियान की शुरुआत भी जीत के साथ की है और दूसरे दौर का अपना दावा मज़बूत किया है.

चिली के खिलाड़ियों ने छोटे-छोटे पास की मदद से कई अच्छे मूव बनाए लेकिन 34वें मिनट में उन्हें सफलता मिली.

जाँ बोसेजूर ने गोल एरिया में आकर अच्छा गोल किया. लेकिन चिली की ओर से बेहतरीन खेल का प्रदर्शन किया एलेक्सी सांचेज़ ने. दूसरी ओर होंडूरास की टीम में एकजुटता और अनुशासन की कमी दिखी.

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