निशाने पर रेफ़री

  • 19 जून 2010
जर्मनी की टीम
Image caption रेफ़री के गलत फ़ैसले की वजह से जर्मनी को सर्बिया के खिलाफ हार का मुंह देखना पड़ा

दक्षिण अफ़्रीक़ा में विश्व कप के आयोजन की भले ही सराहना हो रही है, लेकिन कई मैचों के दौरान रेफ़रियों की भूमिका की कड़ी आलोचना हो रही है.

ताज़ा मामला अमरीका और स्लोवेनिया के बीच मैच का है. अमरीका की टीम एक समय दो गोल से पिछड़ रही थी. लेकिन मैच में वापसी करते हुए उसने न सिर्फ़ स्कोर बराबर किया बल्कि जीत के दरवाज़े तक पहुँच गई.

लेकिन मैच ख़त्म होने के पाँच मिनट पहले एक फ़्री किक पर किया गया अमरीकी गोल रेफ़री ने नामंज़ूर कर दिया. कमेंटेटर हों या अमरीकी समर्थक या फिर अमरीकी खिलाड़ी सब सकते में थे कि ऐसा हुआ क्यों.

बाद में टीवी-रीप्ले से यह पता चला कि फ़ाउल तो स्लोवेनिया के खिलाड़ियों ने किया था. लेकिन सज़ा मिली अमरीकी खिलाड़ियों को. इस नामंज़ूर गोल के अलावा जर्मनी के स्टार खिलाड़ी मिरोस्लाव क्लोज़ा को रेड कार्ड दिखाने की भी आलोचना हो रही है.

जानकारों का कहना है कि क्लोज़ा को रेड कार्ड दिखाने की कोई वजह नहीं थी. रेफ़री उस मैच में अपने कार्ड से कुछ ज़्यादा ही खेल रहे थे. जर्मनी को इसका नुक़सान भी हुआ और वो सर्बिया से हार गई.

सांबा करेंगे बफ़ाना समर्थक?

अगर मेज़बान दक्षिण अफ़्रीक़ा की टीम विश्व कप के दूसरे दौर में नहीं पहुँच पाई, तो दक्षिण अफ़्रीक़ी समर्थक क्या करेंगे. उन्हें निराशा तो होगी, लेकिन क्या वे ख़ामोश बैठ जाएँगे.

Image caption दक्षिण अफ़्रीकी लोगों में ब्राज़ील की टीम के प्रति सहानुभूति भी है

ऐसा लगता तो नहीं और न ही ये लगता है कि विवादित वुवुज़ेला की आवाज़ ही थम जाएगी. तो क्या करेंगे दक्षिण अफ़्रीकी, किस देश के लिए जी-जान लगाएँगे. सवाल सौ टके का है.

लेकिन इसका जवाब ब्राज़ीलियाई अधिकारियों के पास है. केपटाउन पहुँचे कुछ ब्राज़ीलियाई अधिकारियों ने दक्षिण अफ़्रीक़ी फ़ैन्स को सलाह दी है कि अगर उनकी टीम दूसरे दौर में नहीं पहुँच पाती, तो उन्हें ब्राज़ील का समर्थन करना चाहिए.

वैसे देखा जाए तो दक्षिण अफ़्रीक़ी लोगों में ब्राज़ील के प्रति सहानुभूति भी है. लेकिन देखने वाली बात तो ये है कि ब्राज़ील अपना विश्व कप अभियान कैसे आगे जारी रखता है.

ब्राज़ील का अगला मैच मज़बूत आइवरी कोस्ट की टीम से है और इसी मैच के नतीजे पर विश्व कप में ब्राज़ील का भविष्य निर्भर करता है.

बेकम की खीझ

इंग्लैंड के ग्लैमरस और स्टार खिलाड़ी डेविड बेकम इस समय भले ही राष्ट्रीय टीम का हिस्सा न हों, लेकिन खिलाड़ियों और अधिकारियों के साथ उनकी मौजूदगी ये ज़रूर बताती है कि इंग्लैंड का फ़ुटबॉल एसोसिएशन उन्हें लेकर ज़रूर कोई योजना बना रहा है.

Image caption इंग्लैंड के स्टार खिलाड़ी डेविड बेकम अपनी टीम के प्रदर्शन से काफी निराश हैं

बेकम टीम के साथ दक्षिण अफ़्रीक़ा में मौजूद हैं और उन्हें टीम के अभ्यास सत्र में भी देखा जा सकता है. इंग्लैंड और अल्जीरिया के बीच हुए मैच के दौरान भी बेकम खिलाड़ियों और अधिकारियों के साथ हर पल मौजूद रहे.

ज़ाहिर है इंग्लैंड का ख़राब प्रदर्शन उन्हें भी रास नहीं आ रहा था. गोल के लिए तरसती उनकी टीम की हालत उनसे देखी नहीं जा रही थी. तभी तो बेकम कभी मुँह छिपाते तो कभी नाराज़ होते.

उनकी खीझ का आलम ये था कि वे अपनी सीट से उठकर चिल्ला भी रहे थे. अब बेकम टीम में रहते तो क्या होता, ये तो बहस का विषय है. लेकिन इतना तो तय है कि बेकम की खीझ से सभी इंग्लैंड फ़ैन्स सहमत होंगे. उनकी टीम ने इतना ख़राब जो प्रदर्शन किया.

बीबीसी न्यूज़ मेकर्स

चर्चा में रहे लोगों से बातचीत पर आधारित साप्ताहिक कार्यक्रम

सुनिए

संबंधित समाचार