जर्मनी, अर्जेंटीना क्वार्टर फ़ाइनल में

  • 28 जून 2010
तावेज़

अर्जेंटीना ने मेक्सिको को 3-1 से हरा कर क्वार्टर फ़ाइनल में प्रवेश कर लिया है.

और इसके साथ ही आज के पहले मैच की विजेता टीम जर्मनी के साथ उनका मुक़ाबला तय हो गया है.

पहले हाफ़ में अर्जेंटीना ने शानदार खेल का प्रदर्शन करते हुए मेक्सिको की एक न चलने दी और गेंद पर भारी क़ब्ज़ा बनाए रखा.

मध्यांतर पर अर्जेंटीना ने 2-0 की बढ़त बना रखी थी. पहला गोल तावेज़ ने 25वें मिनट में किया और फिर सात मिनट बाद हिग्वेन ने दूसरा गोल कर मेक्सिको की रक्षा पंक्ति की कमज़ोरी को उजागर कर दिया.

मैच के 52वें मिनट में तावेज़ ने एक और गोल कर मैच पर अर्जेंटीना की पूरी पकड़ बना दी. हालांकि स्टार खिलाड़ी मेसी गोल करने में सफल नहीं रहे लेकिन वे अपने रंग में नज़र आए.

लेकिन दूसरे हाफ़ में मेक्सिको ने संभाला लिया और आक्रामक खेल का प्रदर्शन किया और 71वें मिनट में एक गोल उतारने में कामियाब भी रहा.

पहला मैच

Image caption यह विश्व कप में इंग्लैंड की सबसे बुरी हार है

पहले मैच में जर्मनी ने इंग्लैंड को दिखाया कि उनकी डिफ़ेंस कितनी ख़राब है और ऐसा एक नहीं चार बार हुआ.

लेकिन इंग्लैंड की टीम को संभलने का मौक़ा नहीं मिला और मैच के पहले हाफ़ में कुछ समय के लिए टीम ने जो जज़्बा दिखाया दूसरे हाफ़ में हवा निकल गई.

दूसरी ओर जर्मनी के खिलाड़ियों ने छोटे-छोटे पास और कलात्मक फ़ुटबॉल से रही-सही कसर पूरी कर दी. जर्मनी ने 4-1 के बड़े अंतर से अपने चिर प्रतिद्वंद्वी इंग्लैंड को मात दी और क्वार्टर फ़ाइनल में जगह बनाई.

ग्रुप मुक़ाबलों में ऑस्ट्रेलिया को बड़े अंतर से हराने के बाद जर्मनी की टीम सर्बिया के हाथों पिट गई थी, घाना को भी उसने प्रभावी तरीक़े से मात नहीं दी. लेकिन इस मैच में जर्मन खिलाड़ियों ने अपना दम दिखाया.

महारथी मिरोस्लाव क्लोज़ा, युवा ओज़िल, अनुभवी टॉमस मूलर और प्रभावशाली पोडोलस्की ने इंग्लैंड के गढ़ में जाकर उन्हें चकमा दिया. और इंग्लैंड के खिलाड़ी अपनी ग़लतियों से सबक़ सीखने के बजाए बार-बार वही ग़लती करते रहे.

मैच के 20वें मिनट में स्टार खिलाड़ी मिरोस्लाव क्लोज़ा ने गोल करने का सिलसिला शुरू किया.

क्लोज़ा का क्लास

Image caption मेसी का बेहतर प्रदर्शन जारी है.

मिरोस्लाव क्लोज़ा ने मैथ्यू अप्सन को छकाया और गोलकीपर डेविड जेम्स भी कुछ ख़ास नहीं कर पाए. 32वें मिनट में एक बार फिर इंग्लैंड के डिफ़ेंस की कलई खुली, जब क्लोज़ा और मुलर ने बेहतरीन मूव बनाया और पोडोलस्की को दूसरा गोल करने में कोई परेशानी नहीं हुई.

लेकिन पाँच मिनट के अंदर इंग्लैंड ने ज़बरदस्त आक्रमण किया और फिर कप्तान स्टीवेन जिरार्ड के क्रॉस पर अप्सन का हेडर जर्मन गोलकीपर को छका गया.

यही कुछ क्षण इंग्लैंड के लिए इस मैच में याद करने लायक़ हैं. पहला गोल करने के एक मिनट के अंदर एक बार फिर इंग्लिश खिलाड़ियों ने हल्ला बोला और फ़्रैंक लैम्पार्ड का शॉट गोलपोस्ट से टकरा कर गोलक्षेत्र में गिरकर बाहर आ गया.

लेकिन इंग्लैंड के खिलाड़ी दुर्भाग्यशाली रहे और रेफ़री ने इसे गोल नहीं माना. दूसरे हाफ़ में इंग्लैंड के खिलाड़ी कहीं नहीं दिखे. मैदान में जर्मन ही जर्मन खिलाड़ी नज़र आ रहे थे.

डिफ़ेंस की दरार दूसरे हाफ़ में और चौड़ी हुई और टॉमस मुलर ने 67 मिनट में बेहतरीन गोल करके स्कोर 3-1 कर दिया.

अभी इंग्लैंड के खिलाड़ी संभल ही पाते कि एक और हमला और फिर डिफ़ेंस लाइन नदारद. दौड़ते-भागते हाँफते एक दो खिलाड़ी पहुँचे भी तो जर्मन खिलाड़ियों की तेज़ी उन्हें दग़ा दे गई. नतीजा एक और गोल..

स्कोर 4-1 पहुँचते ही इंग्लैंड के खिलाड़ियों ने जैसे हार मान ली. और जर्मनी की जीत पड़क्की हो गई. मैच समाप्त होने की सीटी बजने के साथ ही 4-1 के बड़े अंतर और भरपूर उत्साह के साथ जर्मनी की टीम क्वार्टर फ़ाइनल में पहुँच गई.

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