फ़ीफ़ा प्रमुख ने मांगी माफ़ी

  • 30 जून 2010
सेप ब्लैटर
Image caption ब्लैटर ने कहा है कि गोल लाइन तकनीक पर चर्चा फिर से होगी.

जर्मनी के ख़िलाफ़ मैच में इंग्लैंड के गोल को नामंज़ूर करने और मैक्सिको के ख़िलाफ़ मैच में अर्जेंटीना के कार्लोस तेवेज़ के गोल को मान्यता देने को लेकर चल रहे विवाद के बीच फ़ीफा प्रमुख ने अपनी चुप्पी तोड़ी है.

वेबसाइट पर जारी अपने बयान में फ़ीफ़ा प्रमुख सेप ब्लैटर ने दोनों देशों के फ़ुटबॉल एसोसिएशन से माफ़ी मांगी है और गोल लाइन तकनीक पर चर्चा की बात कही है.

सोमवार को फ़ीफ़ा के प्रेस कॉन्फ़्रेंस में संस्था के प्रवक्ता को पत्रकारों की नाराज़गी झेलनी पड़ी, जब वे इस मामले पर सवालों को टाल गए.

एक पत्रकार ने तो नाराज़ होकर सेप ब्लैटर को बुलाने की मांग कर डाली. चारों ओर से हो रही आलोचनाओं के बाद ब्लैटर ने कहा है कि वे गोल तकनीक पर चर्चा करने के ख़िलाफ़ नहीं है और जुलाई में इस पर बैठक करने की बात कही.

लेकिन उन्होंने इंग्लैंड और मैक्सिको के फ़ुटबॉल एसोसिएशन से माफ़ी मांगकर मामला शांत करने की कोशिश की. 27 जून को नॉक आउट स्टेज के अहम मैच में इंग्लैंड को जर्मनी का मुक़ाबला था.

इस मैच में इंग्लैंड के खिलाड़ी फ़्रैंक लैम्पार्ड का गोल नामंज़ूर कर दिया गया था हालाँकि रीप्ले से स्पष्ट था कि गेंद गोल लाइन से पार गिरी थी. लेकिन रेफ़री ने इस गोल को नहीं माना.

चर्चा के लिए तैयार

अगर गोल मंज़ूर हो गया रहता, तो मैच का स्कोर 2-2 हो जाता. वैसे जर्मनी ने दो और गोल करके मैच 4-1 से जीता, लेकिन लैम्पार्ड समेत कई इंग्लिश खिलाड़ियों का मानना है कि गोल मंज़ूर होने के बाद स्थिति कुछ और ही होती.

गोल लाइन तकनीक के इस्तेमाल की ज़ोर-शोर से हो रही मांग के बीच ब्लैटर ने कहा, "विश्व कप में अब तक के जो अनुभव रहे हैं, उससे ये कहना अनुचित होगा कि गोल लाइन तकनीक पर चर्चा नहीं होगी."

उन्होंने कहा कि वे निजी रूप से इन ग़लत फ़ैसलों से क्षुब्ध हैं लेकिन फ़ुटबॉल में ऐसी ग़लती हो सकती है, इससे खेल नहीं ख़त्म होता.

ब्लैटर ने कहा कि उन्होंने इंग्लैंड और मैक्सिको के फ़ुटबॉल एसोसिएशन से बात की और उनसे माफ़ी मांगी. ब्लैटर ने कहा, "ज़ाहिर है , जो कुछ भी हुआ है, वे इससे ख़ुश नहीं हैं. लोग भी रेफ़री के फ़ैसले की आलोचना कर रहे हैं."

हालाँकि उन्होंने यह भी कहा कि ऐसी ग़लतियाँ फ़ुटबॉल के खेल का हिस्सा हैं.

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