शरद पवार बने आईसीसी अध्यक्ष

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के पूर्व अध्यक्ष और वर्तमान में कृषि मंत्री शरद पवार ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) के अध्यक्ष का पद संभाल लिया है.

वे आईसीसी के सातवें अध्यक्ष हैं और दो साल तक इस पद पर रहेंगे.

वो डेविड मॉर्गन से ये कमान संभाल रहे हैं जिन्होंने इंग्लैंड और वेल्स क्रिकेट बोर्ड के अध्यक्ष के तौर पर पाँच साल तक काम किया है.

शरद पवार ये पद संभालने वाले दूसरे भारतीय हैं. इससे पहले जगमोहन डालमिया आईसीसी के अध्यक्ष रह चुके हैं.

आईसीसी

आईसीसी के 104 देश सदस्य हैं मगर इसकी शुरुआत 1909 में इंपीरियल क्रिकेट कॉन्फ़्रेंस के नाम से हुई थी. उस समय इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ़्रीका के बीच त्रिकोणीय क्रिकेट श्रृंखला आयोजित करने और उससे जुड़े नियम-क़ायदे बनाने के लिए वो बोर्ड बनाया गया था.

इस बोर्ड की 1926 तक बैठकें काफ़ी अनियमित रहीं और जब इंग्लैंड में इंपीरियल क्रिकेट कॉन्फ़्रेंस की बैठक हुई. वेस्ट इंडीज़, न्यूज़ीलैंड और भारत के प्रतिनिधि उसमें शामिल हुए.

उसी साल आईसीसी की दूसरी बैठक हुई जिसमें तय हुआ कि उन ब्रितानी साम्राज्य वाले देशों को इसकी सदस्यता दी जाए जो अपनी टीम इंग्लैंड भेजते हैं या इंग्लैंड की टीम वहाँ जाती है.

इस नियम का नतीजा ये हुआ कि अमरीका इस संस्था से अलग हो गया जबकि उससे पहले तक वहाँ इंग्लैंड की टीम जाती रही थी और वो भी अपनी टीम इंग्लैंड भेजता था.

इस तरह अब तीन देशों को टेस्ट खेलने वाले देश के तौर पर मान्यता मिल गई. वेस्टइंडीज़ ने 1928 में, न्यूज़ीलैंड ने 1929-30 में और भारत ने 1932 में पहला टेस्ट खेला.

शामिल हुआ पाकिस्तान

उसके बाद से आईसीसी की बैठक लगभग हर साल होने लगी. इन बैठकों का उद्देश्य टेस्ट दौरे तय करना होता था.

इसके बाद 28 जुलाई 1952 को पाकिस्तान को आईसीसी में शामिल किया गया और अक्तूबर में पाकिस्तान ने पहला टेस्ट खेला. 1961 में दक्षिण अफ़्रीका ने राष्ट्रमंडल की सदस्यता वापस कर दी और उसके बाद से वह आईसीसी का सदस्य नहीं रह गया.

पाकिस्तान ने 1964 में प्रस्ताव रखा कि आईसीसी की सदस्यता उन देशों को भी दी जाए जिन्हें टेस्ट खेलने वाले देश का दर्जा हासिल नहीं है. उस साल जुलाई में संगठन का नाम इंटरनेशनल क्रिकेट कॉन्फ़्रेंस कर दिया गया और पाकिस्तान की सलाह पर अमरीका, सीलोन और फ़िजी को सदस्य बनाया गया.

आईसीसी की 1971 में हुई बैठक में विश्व कप आयोजित करने का प्रस्ताव रखा गया और 1973 में सहमति के बाद 1975 में इंग्लैंड में पहला क्रिकेट विश्व कप आयोजित हुआ.

फिर 1989 में एक और बैठक आयोजित हुई जिसमें ये तय किया गया कि जो खिलाड़ी दक्षिण अफ़्रीका से खेल संबंध रखेंगे उन पर प्रतिबंध लगाया जाएगा. उसी साल जुलाई में संगठन ने नाम बदलकर इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल यानी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद कर लिया.

अब इस संगठन को और अधिकार भी दिए गए और वो सिर्फ़ ऐसी संस्था नहीं रह गई जो सलाह भर देती हो बल्कि वो बाध्यकारी फ़ैसले भी ले सकती थी.

बदला स्वरूप

दक्षिण अफ़्रीका को 1991 के जुलाई में वापस पूर्ण सदस्य के तौर पर आईसीसी में शामिल कर लिया गया.

संगठन की स्थापना के बाद 1993 में आईसीसी के मुख्य कार्यकारी का पद बनाया गया और ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट बोर्ड के प्रमुख डेविड रिचर्ड्स उस पद पर नियुक्त हुए.

अगले कुछ वर्षों में आईसीसी ने खेल में तकनीक के इस्तेमाल को बढा़वा दिया. लॉर्ड काउड्रे और सर क्लाइड वॉलकॉट आईसीसी के पहले दो चेयरमैन थे.

मगर 1996 में ये तय नहीं हो पाया कि वॉलकॉट के बाद कौन चेयरमैन होगा. तब आईसीसी का नया ढाँचा तय किया गया और जगमोहन डालमिया इस तरह आईसीसी के पहले अध्यक्ष बने और उनका कार्यकाल तीन साल का रहा.

जब 2000 में डालमिया का कार्यकाल पूरा हुआ तो ऑस्ट्रेलिया के मैल्कम ग्रे अध्यक्ष बनेऔर जुलाई 2001 में मैल्कम स्पीड ने डेविड रिचर्ड्स से मुख्य कार्यकारी का पद लिया.

पवार को मिली सत्ता

ग्रे के बाद एहसान मनी, पर्सी सॉन और रे माली आईसीसी के अध्यक्ष रहे. 2008 में शरद पवार और डेविड मॉर्गन के बीच इस बात को लेकर विवाद हुआ कि अगला अध्यक्ष कौन बनेगा और तब दोनों के बीच सहमति हुई कि पहले 2010 तक मॉर्गन ये कार्यभार सँभालेंगे और फिर 2010 से शरद पवार.

पवार के लिए ये ठीक भी था क्योंकि 2011 में भारतीय उपमहाद्वीप में ही क्रिकेट का विश्व कप आयोजित होना था.

शरद पवार ने 2001 में क्रिकेट के प्रशासन में क़दम रखा था जबकि उन्होंने अजित वाडेकर को हराकर महाराष्ट्र क्रिकेट असोसिएशन के अध्यक्ष पद पर क़ब्ज़ा किया था.

भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड या बीसीसीआई के अध्यक्ष पद तक का पवार का सफ़र आसान नहीं था क्योंकि तत्कालीन बीसीसीआई अध्यक्ष जगमोहन डालमिया से उनका मुक़ाबला था.

उस समय डालमिया के समर्थन से रणवीर सिंह महेंद्रा ने पवार को बीसीसीआई के चुनाव में हरा दिया था और किसी भी चुनाव में पवार को मिली शायद वो एकमात्र हार थी.

मगर 2005 के चुनाव में पवार ने महेंद्रा को हरा दिया और डालमिया को आगे चलकर बोर्ड से निलंबित भी कर दिया.

पवार 2005 से 2008 तक बोर्ड के अध्यक्ष रहे थे और उसके बाद शशांक मनोहर भले ही अभी बीसीसीआई के अध्यक्ष हों मगर सलाह मशविरे के लिए वो अब भी पवार का ही रुख़ करते हैं.

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