पेले का नया अवतार

रॉबिनियो

सफलता किसी के लिए बहुत कुछ लेकर आती है. कुछ समय पहले तक ब्राज़ील के रॉबिनियो न सिर्फ़ अपने फ़ॉर्म से जूझ रहे थे बल्कि पहले रियाल मैड्रिड और फिर मैनचेस्टर सिटी से उनका पत्ता कट गया.

लेकिन ब्राज़ील के मौजूदा कोच डूंगा ने रॉबिनियो में आस्था दिखाई और इस विश्व कप में रॉबिनियो का सितारा बुलंदी पर है.

अपने करियर के शुरुआती दौर में रॉबिनियो को पेले का उत्तराधिकारी कहा जाने लगा था.

कहा जाता है कि ख़ुद पेले ने 15 वर्ष की उम्र में रॉबिनियो की प्रतिभा को पहचाना था.

रॉबिनियो की शुरुआत भी अच्छी रही. लेकिन न तो रियाल मैड्रिड के साथ वे स्पैनिश लीग में चले और न ही मैनचेस्टर सिटी के साथ इंग्लिश प्रीमियर लीग में.

नतीजा ये हुआ कि यूरोपीय लीग में विफलता उन्हें भारी पड़ी. उन पर आरोप लगा कि वे टीम प्लेयर नहीं है.

लेकिन आज कहानी दूसरी है. डूंगा के अधीन रॉबिनियो ने अपनी प्रतिभ सँवारी है और नतीजा देखिए इस विश्व कप में उन्होंने गोल तो एक ही किया है लेकिन दूसरे खिलाड़ियों के लिए गोल के कई अवसर बनाए.

तो इस विश्व कप के बाद यूरोप का कोई प्रतिष्ठित क्लब रॉबिनियो में रुचि दिखाए, तो हैरत नहीं होती.

अख़बार की साज़िश?

इंग्लैंड की टीम के जर्मनी के हाथों हारने के बाद एक फ़ैन का इंग्लिश ड्रेसिंग रूम में घुसने का मामला अब तूल पकड़ने लगा है और आरोप-प्रत्यारोप का गंदा दौर शुरू हो गया है.

एक ब्रितानी पत्रकार पर ये आरोप लगा है कि उन्होंने इस फ़ैन की एंट्री ड्रेसिंग रूम में कराने में मदद की. लेकिन दक्षिण अफ़्रीका के पुलिस प्रमुख ने सबसे चौंकाने वाला आरोप लगाया है.

जनरल बेकी सेले को संदेह है कि इसमें इस ब्रितानी टेबलॉयड अख़बार की साज़िश हो सकती है और ऐसा इसलिए किया गया हो सकता है ताकि दक्षिण अफ़्रीका की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठे और अख़बार को मुनाफ़ा भी हो.

लेकिन सेले के इन आरोपों को सवालों के घेरे में आए ब्रितानी रिपोर्टर पचा नहीं पाए और उन्होंने सेले को झूठा तक कह दिया है. इन सबके बीच ब्रितानी पत्रकार को विशेष अदालत के सामने भी पेश होना पड़ा है.

चिंतित फ़ीफ़ा

नाइजीरिया की मौजूदा टीम को निलंबित करने और फ़्रांस की टीम के ख़राब प्रदर्शन की जाँच से फ़ीफ़ा दुखी है. अब आप सोचेंगे फ़ीफ़ा को इससे क्या आपत्ति हो सकती है.

Image caption नाइजीरियाई फ़ुटबॉल फ़ेडरेशन में उठापटक से फ़ीफ़ा चिंतित है

दरअसल अंतरराष्ट्रीय फ़ुटबॉल की सर्वोच्च संस्था किसी भी देश के फ़ुटबॉल फ़ेडरेशन के मामलो में राजनीतिक दखलंदाज़ी के ख़िलाफ़ है.

फ़ीफ़ा को लगता है कि चाहे को नाइजीरिया की टीम को निलंबित करने का मामला हो या फिर फ़्रांसीसी टीम की जाँच का मुद्दा, ये राजनीतिक दखल है.

दरअसल फ़्रांस के मामले में तो राष्ट्रपति निकोला सार्कोज़ी और कई अन्य राजनेताओं की खुलेआम टिप्पणी भी फ़ीफ़ा को रास नहीं आई है.

एक दिन पहले ही फ़ीफ़ा ने फ़्रांस को चेतावनी दी थी कि अगर फ़्रांसीसी टीम के मामले में राजनीतिक हस्तक्षेप बढ़ा, तो फ़ीफ़ा वहाँ के फ़ुटबॉल फ़ेडरेशन पर प्रतिबंध लगा सकता है.

अभी फ़ीफ़ा की चेतावनी पर कोई असर होता, इससे पहले नाइजीरियाई सरकार ने दो क़दम आगे बढ़ते हुए पूरी टीम को ही निलंबित कर दिया. अब देखना होगा कि फ़ीफ़ा इन सब मामलों पर क्या करती है.

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