स्वारेज़ के पास 'भगवान का हाथ'

घाना
Image caption आख़िरी क्षण में घाना को गोल करने का सुनहरा अवसर मिला लेकिन टींम अवसर से चूक गई

घाना की टीम जिस तरह विश्व कप से बाहर हुई, उससे लोगों का हैरत में आना स्वाभाविक है. अतिरिक्त समय के आख़िरी क्षण में घाना को गोल करने का सुनहरा अवसर मिला.

लेकिन उरुग्वे की गोल लाइन पर खड़े स्टार खिलाड़ी लुईस स्वारेज़ ने हाथ से गेंद रोक दी और गोल नहीं हो पाया. हालाँकि स्वारेज़ को रेड कार्ड दिखाकर मैदान से बाहर कर दिया गया.

और घाना को पेनाल्टी मिला. लेकिन असामाओ जियान ने पेनाल्टी क्या गँवाया, मैच घाना के हाथ से निकल गया. क्योंकि पेनाल्टी शूट आउट में टीम की भद्द पिट गई.

उरुग्वे के स्टार खिलाड़ी क्षणभर में हीरो से ज़ीरो बन सकते थे. रेड कार्ड मिलने के बाद वे रोते हुए मैदान से बाहर गए. लेकिन अभी वे मैदान से बाहर निकले ही थे कि जियान पेनल्टी पर मौक़ा चूक गए और रो रहे स्वारेज़ उछलने-कूदने लगे.

अब लुईस स्वारेज़ हाथ से गोल रोकने को वर्ष 2010 का हैंड ऑफ़ गॉड मान रहे हैं. स्वारेज़ कहते हैं- हम तो विश्व कप से बाहर हो गए थे. लेकिन पासा पलट गया. मेरे पास भी हैंड ऑफ़ गॉड है.

वर्ष 1986 में अर्जेंटीना के डिएगो माराडोना ने इंग्लैंड के ख़िलाफ़ एक विवादित गोल किया था. बाद में उन्होंने उसे हैंड ऑफ़ गॉड कहा था. उस समय माराडोना ने हाथ से गोल किया था और इस बार स्वारेज़ के हाथ ने न सिर्फ़ गोल बचाया बल्कि आख़िरकार टीम की लाज भी बच गई.

Image caption ब्राज़ील की टीम जिस तरह हारी, उससे डूंगा पर सवाल उठ रहे हैं

अब डूंगा की बारी

नीदरलैंड्स के हाथों क्वार्टर फ़ाइनल में मिली हार के बाद ब्राज़ील के कोच डूंगा पद पर रहेंगे या नहीं, इस पर चर्चा गरम है. वैसे इस विश्व कप के बाद कई टीमों के कोच ने पद छोड़ दिए हैं.

ख़िताब की प्रबल दावेदार मानी जा रही ब्राज़ील की टीम जिस तरह हारी, उससे डूंगा पर सवाल उठ रहे हैं. डूंगा की नकारात्मक रणनीति की भी चर्चा हो रही है.

आपको बता दें कि वर्ष 2006 में भी ब्राज़ील की टीम विश्व कप के क्वार्टर फ़ाइनल में फ़्रांस से हारकर बाहर हो गई थी. उस समय टीम के कोच अल्बर्टो कार्लोस परेरा था, जो इस विश्व कप में मेज़बान दक्षिण अफ़्रीक़ी टीम के कोच थे.

उस विश्व कप के ठीक बाद परेरा की जगह डूंगा को कमान सौंपी गई थी. अगला विश्व कप ब्राज़ील में ही होना है और ब्राज़ील का टीम प्रबंधन पूरी तैयारी के साथ उस विश्व कप में उतरना चाहेगा. ऐसी स्थिति में डूंगा का जाना तय माना जा रहा है. अब देखना ये है कि डूंगा ख़ुद जाते हैं या फ़ेडरेशन उन्हें हटाता है.

कोक के बदले पेप्सी

विश्व कप जैसी बड़ी प्रतियोगिता में प्रायोजकों का बड़ा पैसा लगा है. अब उन्हें कितना नफ़ा-नुक़सान हुआ, उसका तो आकलन बाद में होगा. लेकिन विश्व कप के दौरान आधिकारिक प्रायोजक कोक के बदले पेप्सी बँटने का मामला ख़ूब चर्चा में है.

दरअसल डरबन में विश्व कप से जुड़े कुछ स्वयंसेवकों को कोक के बदले पेप्सी बँट गई. अब आयोजक इस मामले पर स्पष्टीकरण देने में लगे हैं कि ऐसा कैसे हो गया.

इन स्वयंसेवकों को विश्व कप आयोजकों की ओर से प्रतिदिन मुफ़्त भोजन मिलता है और भोजन के साथ शीतल पेय भी. अब चूँकि आधिकारिक प्रायोजक कोक है तो उन्हें कोक की बोतलें मिलनी चाहिए थी.

लेकिन उन्हें मिली पेप्सी. अब कोक वाले इसमें कोई बड़ी साज़िश की बात करें, तो हैरान मत होइएगा. लेकिन इनसे अलग इन स्वयंसेवकों से जबरन पेप्सी की बोतलें ज़रूर छीन ली गई. अब इसमें स्वयंसेवकों की क्या ग़लती.

संबंधित समाचार