अभी और मेहनत की ज़रूरत-साइना

  • 4 जुलाई 2010
साइना नेहवाल
Image caption साइना को अब भी विश्वास नहीं हो पा रहा है कि उन्होंने बैडमिंटन में चीन के प्रभुत्व वाले किले को भेद दिया है

लगातार तीन सुपर सीरिज़ जीतने वाली भारत की बैडमिंटन स्टार साइना नेहवाल को लगता है कि इस एक हफ़्ते के ब्रेक में वो शायद आधा खेल भूल चुकी हैं.

इंडियन ओपन, सिंगापुर ओपन और इंडोनेशियन ओपन जीतने के बाद घर लौटी साइना इन दिनों एक हफ़्ते के लिए आराम कर रही हैं.

बीबीसी हिंदी के साप्ताहिक कार्यक्रम संडे के संडे के लिए हैदराबाद में अपने घर पर एक विशेष बातचीत में साइना ने माना कि इतने अच्छे प्रदर्शन के बावजूद उन्हें खेल में अपने डिफ़ेंस या रक्षात्मक शैली पर और मेहनत करने की ज़रूरत है.

वह कहती हैं, “मैं अगर एक-दो दिन भी न खेलूँ तो कुछ स्ट्रोक्स भूल जाती हूँ. एक हफ़्ते के ब्रेक में शायद मैं आधा खेल भूल चुकी हूँ. वैसे मेरे स्ट्रोक्स अभी इतने पैने नहीं हैं और मुझे उन पर काम करने की ज़रूरत है.”

तीनों टूर्नामेंट जीतने के बाद भारत में साइना का जिस तरह का स्वागत हुआ है उससे वो ख़ासी उत्साहित हैं. साथ ही वह ये भी कहती हैं कि अभी जितना सम्मान मिल रहा है या नाम मिल रहा है वो पहले भी मिल सकता था.

साइना के अनुसार, “ये सब पहले भी हो सकता था मगर भारत में दूसरे खेल वालों को कुछ ख़ास करना पड़ता है तभी वो ऊपर आ पाते हैं. फिर भी मैं ख़ुश हूँ.”

उन्हें अब भी विश्वास नहीं हो पा रहा है कि उन्होंने बैडमिंटन में चीन के प्रभुत्व वाले किले को भेद दिया है और वो वरीयता में तीसरी पायदान पर जा पहुँची हैं.

तीन अहम चुनौतियां

अब साइना ने अपने सामने तीन चुनौतियाँ रखी हैं और वो हैं अगले तीन अहम टूर्नामेंट. उन्हें अगस्त में विश्व चैंपियनशिप में, अक्तूबर में राष्ट्रमंडल खेलों में और नवंबर में एशियाई खेलों में हिस्सा लेना है. इसके साथ ही वो वरीयता में पहली पायदान पर भी आना चाहती हैं.

अब साइना को जिस तरह की पहचान मिल रही है या जिस तरह का उनका भारत लौटने पर स्वागत हुआ उससे वह ख़ुश तो हैं मगर साथ ही अब उनके लिए बाहर जाकर शॉपिंग करना मुश्किल हो गया है.

साइना कहती हैं, “अब बाहर जाना मुश्किल हो गया है, कभी शॉपिंग के लिए जाओ तो लोग ऑटोग्राफ़ लेने के लिए घेर लेते हैं और शॉपिंग तो हो ही नहीं पाती.”

इसलिए अब साइना घर पर बैठती हैं और उनके लिए शॉपिंग करने जाते हैं उनके मम्मी पापा.

बचपन

बचपन का ज़िक्र करते हुए साइना ने बताया कि जब वो आठ-नौ साल की थीं तो उस समय सुबह चार-साढ़े चार बजे उठकर ट्रेनिंग के लिए अकादमी जाना होता था. उस समय वो रास्ते में ही सो जाती थीं.

वह फिर वहीं से स्कूल जाती थीं और तब कुछ समय स्कूल के रास्ते में सो लेती थीं. इतना ही नहीं साइना का कहना है कि स्कूल में वह कुछ पीरियड में भी सो जाया करती थीं.

साइना स्कूल से लौटकर फिर ट्रेनिंग के लिए जाती थीं और आकर खाना खाकर सो जाती थीं. यही दिनचर्या उनकी कई वर्षों तक रही.

मगर इन सबके बावजूद उनके मन में कभी ये नहीं आया कि बस अब और नहीं ट्रेनिंग करनी. वह कहती हैं, “ये सब रोज़ करते रहना मुश्किल तो होता है पर जब आपको किसी से प्यार हो जाता है तो आप सब करते हैं.”

वह बहुत ख़ुश हैं कि इस पूरे दौरान उन्हें मम्मी-पापा का समर्थन मिलता रहा. साइना ने साथ ही पढ़ाई पर भी ध्यान दिया और कुछ ही समय पढ़कर भी उनके 60-70 प्रतिशत तक अंक आ जाते थे.

वह बताती हैं कि उनके इस प्रदर्शन की वजह से स्कूल में दूसरों को डाँट पड़ती थी जब अध्यापक कहते थे कि- पढ़ाई पर कम समय देने के बावजूद साइना के इतने अच्छे नंबर आए हैं और तुम लोग ध्यान नहीं देते हो.

साइना बताती हैं कि वह हैदराबाद से ही दूसरी नामी खिलाड़ी सानिया मिर्ज़ा से कई बार मिली हैं और जब भी मिलती हैं तो खेल पर बात होती है. साइना के अनुसार सानिया ने देश में टेनिस को एक अलग पहचान देने में मदद की है.

वह मानती हैं कि कई बार लोग उन्हें सानिया के नाम से बुला देते हैं मगर अब उन्हें लोगों की इस ग़लती की आदत हो चुकी है.

मुश्किलों से न घबराएं

साइना की सभी उभरते हुए खिलाड़ियों को सलाह है कि उन्हें अपना एक लक्ष्य तय कर लेना चाहिए और फिर रास्ते में कितनी भी मुश्किलें आएँ उनसे घबराना नहीं चाहिए.

खिलाड़ियों को लगने वाली चोट के बारे में वह कहती हैं, “जब भी दर्द हो तो ब्रेक लेना चाहिए, उसका इलाज कराना चाहिए और खेलते समय आपको चौकन्ना रहना चाहिए. कभी अगर अनमने ढंग से खेलेंगे तो चोट लगने की संभावना ज़्यादा होती है इसलिए फ़ोकस बने रहना चाहिए.”

क्रिकेट में सचिन तेंदुलकर की फ़ैन साइना नेहवाल को क्रिकेट देखने का ज़्यादा समय तो नहीं मिल पाता मगर इंडियन प्रीमियर लीग में डेकन चार्जर्स की ब्रैंड अंबेसडर होने के नाते उन्होंने उस टीम के ज़्यादातर मैच देखे थे. वैसे अभी उनकी सचिन तेंदुलकर से मुलाक़ात होनी बाक़ी है.

साथ ही साइना को फ़िल्मों का शौक़ है और फ़िल्म 'दिलवाले दुल्हनिया ले जाएँगे' की शाहरुख़ ख़ान और काजोल की जोड़ी ही उनके पसंदीदा कलाकार हैं. हाल ही में 'राजनीति' फ़िल्म देखने वाली साइना इस एक हफ़्ते के ब्रेक के दौरान कोई और फ़िल्म भी देखना चाहती हैं.

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