'अंधविश्वासी' कोच

खेल और अंधविश्वास का अनोखा नाता होता है. जब कोई चीज़ आपके हक़ में जा रही हो, तो अंधविश्वास कुछ ज़्यादा ही बढ़ जाता है. लेकिन ऐसा किसी एक खेल में नहीं होता बल्कि हर खेल और क़रीब-क़रीब हर खिलाड़ी कुछ न कुछ अंधविश्वास के क़रीब होता है.

क्रिकेट में कोई खिलाड़ी अपनी जेब में कोई ख़ास चीज़ रखना नहीं भूलता, तो कोई खिलाड़ी मैदान पर घुसने से पहले सूरज की ओर देखता है.

फ़ुटबॉल में कोई खिलाड़ी ख़ास नंबर की जर्सी पहनता है, तो मैदान पर आने से पहले ज़मीन को चूमना नहीं भूलता.

चलिए विश्व कप की बात करें और विश्व कप में ख़िताब की सबसे बड़ी दावेदार जर्मनी की टीम की ओर रुख़ करते हैं. जर्मनी की टीम के कोच जोकिम लो स्पेन के ख़िलाफ़ सेमी फ़ाइनल के दौरान वही ब्लू स्वेटर पहनकर मैदान में आएँगे, जिसे वे अक्सर पहनते हैं.

हालाँकि जोकिम लो कहते हैं कि वे अंधविश्वासी नहीं है. लेकिन उनका कोचिंग स्टाफ़ चाहता है कि वे इसी स्वेटर को पहनें, क्योंकि जब भी वे ब्लू स्वेटर में आते हैं, टीम जीतती है और बड़े अंतर से जीतती है.

उन्होंने कहा कि उन्हें ये स्वेटर धोने भी नहीं दिया जा रहा है. जोकिम लो का कहना है कि शायद विश्व कप के बाद वे ये स्वेटर पहने ही नहीं. लेकिन टीम को अगर विश्व कप मिल गया, तो शायद जोकिम लो इस स्वेटर को सहेज कर रखना चाहेंगे.

घाना का स्वागत

घाना की टीम भले ही बहादुरीपूर्वक विश्व कप से बाहर हो गई हो, लेकिन पूरे अफ़्रीकी महादेश में उसका समर्थन कम नहीं हुआ है.

और तो और दुनिया के कई देशों के लोग भी ये मानते हैं कि घाना की टीम जिस तरह विश्व कप से बाहर हुई, वो विश्व कप का अब तक का सबसे दुर्भाग्यपूर्ण क्षण है.

एक दिन पहले केपटाउन में हुए बीबीसी के एक विशेष कार्यक्रम में जैसे ही एक व्यक्ति ने घाना का नाम लिया. वहाँ बड़ी संख्या में मौजूद लोग खड़े हो गए और देर तक टीम के सम्मान में तालियाँ बजाते रहे.

कुछ ऐसा ही दृश्य घाना में था, जब राष्ट्रीय टीम स्वदेश पहुँची. टीम का ऐसा स्वागत हुआ जैसे वो विश्व कप जीत कर आई हो. हज़ारों लोगों ने अपनी टीम का स्वागत किया.

हालाँकि कुछ लोग निराश भी थे, लेकिन ज़्यादातर का यही मानना था कि टीम ने बहादुरीपूर्वक मैच खेला और पूरे अफ़्रीकी महादेश का नेतृत्व किया.

पर्यटकों की संख्या बढ़ी

दक्षिण अफ़्रीका के गृह मंत्रालय के मुताबिक़ एक जून से एक जुलाई के मध्य देश में रिकॉर्ड संख्या में पर्यटक पहुँचे हैं. देश में इसी महीने विश्व कप भी हुआ है.

मंत्रालय के मुताबिक़ एक जून से एक जुलाई के बीच 10 लाख से ज़्यादा लोग दक्षिण अफ़्रीका में आए हैं, जो पिछले साल इसी समय की तुलना में 25 प्रतिशत ज़्यादा है.

मंत्रालय के आँकड़ों के मुताबिक़ इस दौरान देश में 10,20,321 लोग आए जबकि पिछले साल इसी समय ये संख्या 8,19,495 थी. सरकार का ये भी मानना है कि सेमी फ़ाइनल और फ़ाइनल के दौरान पर्यटकों की संख्या और बढ़ेगी.

दक्षिण अफ़्रीकी सरकार ये मानती है कि विश्व कप ने उसे ये मंच दिया है कि पर्यटकों को देश के प्रति और जागरुक किया जाए और आने वाले दिनों में इसका असर औऱ दिखे.

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