फ़ीफ़ा ने नहीं फ़ेसबुक ने दी राहत?

  • 7 जुलाई 2010
gudluck jonathan

विश्व कप के बाद नाइजीरिया के राष्ट्रपति गुडलक जोनाथन ने अपनी टीम को दो साल के लिए निलंबित कर दिया था. लेकिन फ़ीफ़ा ने इस फ़ैसले पर कड़ी आपत्ति उठाई और नाइजीरियाई सरकार को चेतावनी दी.

फ़ीफ़ा शुरू से ही ऐसे मामलों पर कड़ा रुख़ अपनाता है. फ़ीफ़ा ने इसे राजनीतिक दखलंदाज़ी बताते हुए फ़ैसले को तुरंत वापस लेने को कहा और अल्टीमेटम भी दे दिया.

नाइजीरिया के राष्ट्रपति ने समय रहते अपना फ़ैसला वापस ले लिया. लेकिन अब इसकी वजह फ़ीफ़ा का अल्टीमेटम है या कुछ और.

राष्ट्रपति महोदय की मानें तो सोशल नेटवर्किंग साइट फ़ेसबुक पर सैकड़ों पोस्ट के कारण उन्हें अपना फ़ैसला बदलने पर मजबूर होना पड़ा.

राष्ट्रपति का कहना है कि फ़ेसबुक पर संदेश भेजकर लोगों ने उनसे फ़ैसले पर फिर से विचार करने की अपील की थी. नाइजीरिया ने विश्व कप में बेहद घटिया प्रदर्शन किया था और टीम दूसरे दौर में भी नहीं पहुँच पाई थी.

अब फ़ैसला वापस लेने की वजह फ़ीफ़ा हो या फ़ेसबुक- नाइजीरियाई टीम को तो राहत मिल ही गई.

उरुग्वे के साथ 'न्याय'

उरुग्वे की टीम घाना के ख़िलाफ़ एक संघर्षपूर्ण और विवादित क्वार्टर फ़ाइनल में जीती थी. टीम के खिलाड़ी लुईस स्वारेज़ ने मैच के आख़िरी क्षण में हाथ से गेंद रोककर गोल बचाया था.

बाद में उन्होंने उसे भगवान के हाथ की संज्ञा दी थी. लेकिन सेमी फ़ाइनल में टीम नीदरलैंड्स के हाथों पिट गई. स्वारेज़ निलंबित होने के कारण इस मैच में नहीं खेल पाए थे.

नीदरलैंड्स और उरुग्वे के बीच हुए इस सेमी फ़ाइनल मैच के दौरान बड़ी संख्या में घाना समर्थक भी मौजूद थे, जिन्होंने इस उम्मीद में इस मैच के लिए टिकट ख़रीदी थी कि उनकी टीम सेमी फ़ाइनल में पहुँची थी.

घाना और मेज़बान दक्षिण अफ़्रीकी समर्थक नीदरलैंड्स का समर्थन कर रहे थे. ये हाल सिर्फ़ केपटाउन का नहीं, पूरे अफ़्रीका का था. मैच के बाद इन समर्थकों की ख़ुशी का ठिकाना नहीं था.

एक समर्थक ने कुछ यूँ अपनी ख़ुशी जताई- स्वारेज़ भले ही ये कहे कि उस दिन उनके पास भगवान का हाथ था, लेकिन अब ये स्पष्ट हो गया है कि उनके पास भगवान का साथ नहीं...पूरे अफ़्रीका के साथ उस दिन धोखा हुआ था. अब भगवान ने न्याय कर दिया.

माराडोना के सम्मान में स्मारक!

अर्जेंटीना की टीम भले ही विश्व कप से बाहर हो गई है, लेकिन कोच माराडोना का क्रेज कम नहीं हुआ है. अर्जेंटीना में माराडोना को लेकर समर्थन जुटाने की मुहिम चल रही है.

लेकिन अब भी कोच के रूप में माराडोना का भविष्य निश्चित नहीं है और देश के फ़ुटबॉल फ़ेडरेशन ने कहा है कि फ़ैसला माराडोना को करना है. इन सबके बीच जिस ख़बर ने ख़ूब सुर्ख़ियाँ बटोरी है, वो है एक सांसद का माराडोना के सम्मान में एक स्मारक बनाने के लिए एक विधेयक का प्रस्ताव.

इस प्रस्ताव में कहा गया है कि माराडोना देश की संस्कृति का एक अहम हिस्सा हैं. एक और ख़बर जिसकी दक्षिण अफ़्रीकी मीडिया में ख़ूब चर्चा है, वो है अर्जेंटीना की टीम का राष्ट्रपति का बुलावा नामंज़ूर करने की ख़बर.

अर्जेंटीना की राष्ट्रपति क्रिस्टीना कर्चनर ने टीम को राष्ट्रपति भवन में आने का न्यौता दिया, लेकिन टीम ने ये कहते हुए इससे इनकार कर दिया कि वे इसके हक़दार नहीं है.

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