विश्व कप में 'फ़िक्सिंग'

नाइजीरियाई टीम
Image caption नाइजीरिया की टीम विश्व कप के पहले ही दौर में हार कर बाहर हो गई थी.

बीबीसी के चर्चित कार्यक्रम न्यूज़नाइट की एक रिपोर्ट के बाद अफ़्रीकी मीडिया में हलचल मची हुई है.

दरअसल बीबीसी को ये पता चला था कि फ़ीफ़ा को इस विश्व कप से पहले ये चेतावनी दी गई थी कि नाइजीरियाई टीम मैच फ़िक्सरों को निशाना बन सकती है.

न्यूज़नाइट के मुताबिक़ यूरोपीय फ़ुटबॉल संघ के एक जाँचकर्ता ने विश्व कप से पहले ये चिंता जताई थी. इस रिपोर्ट में यह भी बताया गया था कि इस जाँचकर्ता को विश्व कप के क्वालीफ़ाइंग राउंड के दौरान ही इसका संदेह हुआ था.

आपको बता दें कि नाइजीरिया की टीम विश्व कप के पहले ही दौर में हार कर बाहर हो गई थी. इसके बाद नाइजीरिया के राष्ट्रपति ने टीम को निलंबित कर दिया था, लेकिन फ़ीफ़ा के हस्तक्षेप के बाद उन्होंने इस फ़ैसले को वापस ले लिया.

फ़ीफ़ा ने इससे इंकार किया है कि विश्व कप के दौरान मैच फ़िक्सिंग की कोई घटना हुई है, लेकिन उसने भी चेतावनी मिलने की बात से इंकार नहीं किया है.

पहले ही संकट से जूझ रही अफ़्रीकी टीमों के लिए यह ख़बर चिंता की बात है और यहाँ की मीडिया में यह ख़बर छाई हुई है.

चूक गए क्लोज़ा

Image caption मिरोस्लाव क्लोज़ा इस विश्व कप में गोल्डन बूट हासिल करने वालों की होड़ में भी थे

जर्मनी के स्ट्राइकर मिरोस्लाव क्लोज़ा के लिए यह विश्व कप बहुत अच्छा नहीं साबित हुआ है.

एक ओर तो ख़िताब जीतने का सपना सँजो रही उनकी टीम को तीसरे स्थान से ही संतोष करना पड़ा, तो दूसरी ओर ब्राज़ील के रोनाल्डो के रिकॉर्ड की बराबरी या फिर उसे तोड़ने का मौक़ा उन्हें नहीं मिल पाया.

पीठ में दर्द के कारण क्लोज़ा उरुग्वे और जर्मनी के बीच तीसरे स्थान के लिए हुए मैच में नहीं खेल पाए. मिरोस्लाव क्लोज़ा इस विश्व कप में गोल्डन बूट हासिल करने वालों की होड़ में भी थे.

लेकिन उरुग्वे के ख़िलाफ़ मैच में वे नहीं खेले. हालाँकि उनके लिए संतोष की बात ये रही कि उनकी टीम उरुग्वे को हराकर तीसरे स्थान पर रही. पिछले विश्व कप में भी जर्मनी की टीम चौथे स्थान पर रही थी. लेकिन उस विश्व कप में क्लोज़ा को गोल्डन बूट मिला था.

सफल या विफल?

Image caption अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति ने राष्ट्रपति जैकब ज़ूमा से मिलकर आयोजन की सराहना की है

एक ओर जहाँ दक्षिण अफ़्रीका में हुए पहले विश्व कप की सफलता का डंका पीटा जा रहा है, वहीं कुछ जानकार मैचों के स्तर को देखते हुए इस विश्व कप से प्रभावित नहीं.

लेकिन जहाँ तक आयोजन की बात है, दक्षिण अफ़्रीका को हर जगह से वाहवाही मिल रही है. अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति के अध्यक्ष ज़ाक रोख़े ने राष्ट्रपति जैकब ज़ूमा से मुलाक़ात की और उनकी सराहना की.

उन्होंने कहा कि रग्वी और क्रिकेट विश्व कप के बाद फ़ुटबॉल विश्व कप के सफल आयोजन से दक्षिण अफ़्रीका ने पूरे अफ़्रीकी महादेश का सिर गर्व से ऊँचा किया है.

लेकिन दूसरी ओर कई लोगों का मानना है कि ये विश्व कप पिछले विश्व कप की तुलना में न वो रोमांच पैदा कर पाया है और न ही उस तरह का कोई क्लासिकल मैच ही हो पाया.

तर्क अपनी, लेकिन मैचों के क्लासिकल न होने का आयोजन से क्या संबंध. आयोजक तो दुनियाभर से मिल रही वाहवाही से गदगद हैं.

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