तेज़ गेंदबाज़ों का भविष्य अधर में

इमरान खान
Image caption इमरान खान अपने ज़माने के सबसे घातक तेज़ गेंदबाज़ों में से एक रहे हैं.

पाकिस्तान के पूर्व कप्तान और तेज़ गेंदबाज़ इमरान खान को डर है कि अगर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट शेड्यूल ऐसे ही व्यस्त रहा तो तेज़ गेंदबाज़ डायनासोर की तरह लुप्तप्राय हो जाएंगे.

57 वर्षीय इमरान ने लार्ड्स में वार्षिक काउड्रे लेक्चर देते हुए कहा कि तेज़ गेंदबाज़ों पर बढ़ रहे ‘अभूतपूर्व’ दबाव को कम करने के लिए एकदिवसीय क्रिकेट की बलि दी जा सकती है.

उन्होंने कहा, ‘‘हो सकता है शायद हम 50 ओवर के क्रिकेट को बिल्कुल ख़त्म कर दें और सिर्फ़ टेस्ट और ट्वेंटी-20 खेलें.’’

इमरान ने कहा, ‘‘मुझे नहीं लगता कि टेस्ट क्रिकेट का स्टैंडर्ड अब भी पहले जैसा है.’’

1992 में पाकिस्तान ने इमरान खान की कप्तानी में विश्व कप जीता था. इसके बाद वो रिटायर हो गए लेकिन वो कमेंटेटर और विशेषज्ञ की तरह क्रिकेट से जुड़े रहे.

इमरान का कहना था कि शाहिद आफरीदी एक ऐसा उदाहरण है जो ट्वेंटी-20 में बेहतरीन खेल सकता है लेकिन टेस्ट में वो सफल नहीं हो सकता.

वो कहते हैं, ‘‘किसी क्रिकेटर की असली परीक्षा टेस्ट मैच में होती है. उसकी तकनीक की परीक्षा वहीं होती है. अगर आप बहुत टैलेंटेड हैं तो आप टी-20 में सफल होते हैं लेकिन ज़रुरी नहीं है कि ऐसे क्रिकेटर टेस्ट में सफल हों.’’

इमरान का कहना था कि क्रिकेट के तीन फार्मों में सबसे अधिक दबाव तेज़ गेंदबाज़ों पर भी पड़ता है और उनके समय में चीज़ें बिल्कुल अलग थी.

उन्होंने कहा, ‘‘आप आराम कर सकते थे. एक ओवर में ख़राब गेंदे कर सकते थे.अब वनडे मैचों ने दबाव डाल दिया है.गेंदबाज़ों पर बहुत दबाव डाला है. ये अभूतपूर्व दबाव है. आप एक भी ख़राब गेंद नहीं कर सकते.’’

वो कहते हैं, ‘‘तेज़ गेंदबाज़ों पर दबाव बहुत है.बिना तेज़ गेंदबाज़ों के क्रिकेट वैसी नहीं रह जाएगी क्योंकि बिना तेज़ गेंदबाज़ के बैट्समैन की परीक्षा ही नहीं होगी.’’

इमरान ने क्रिकेट में अंपायरिंग के स्तर के बारे में अपना रुख स्पष्ट किया और कहा कि न्यूट्रल अंपायर के आने से स्तर बहुत अच्छा हुआ है.

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