फ्रांस की फुटबॉल टीम निलंबित

फ्रांस की फुटबॉल टीम
Image caption विश्व कप में फ्रांसीसी खिलाड़ियों के व्यवहार की आलोचना हुई थी

फ्रांस के फुटबॉल महासंघ ने देश की 23 सदस्यों वाली उस टीम को अगले खेलों के लिए निलंबित कर दिया है जिसने हाल ही में दक्षिण अफ्रीका में हुए विश्व कप में हिस्सा लिया था.

फ्रांस के नए फुटबॉल कोच लॉरेंट ब्लैंक ने गुज़ारिश की थी कि इस टीम का कोई भी सदस्य अगस्त में नॉर्वे के साथ होने वाले मैचों के लिए नहीं चुना जाना चाहिए. ये मैच 11 अगस्त को ओस्लो में होना है.

विश्व कप में फ्रांस की टीम तीन ग्रुप मैचों में से एक भी नहीं जीत पाई थी.

फ्रांस के एक खिलाड़ी निकोला अनेल्का ने कोच रेमंड डोमिनिक का अपमान किया था जिसकी वजह से उसे टीम से निकालकर स्वदेश वापिस भेज दिया गया था. टीम के बाक़ी खिलाड़ियों ने निकोला के समर्थन में प्रशिक्षण सत्रों का बहिष्कार किया था.

अब इन प्रतिबंधों का मतलब है कि इन 23 में से किसी भी एक खिलाड़ी सितंबर में तब मौक़ा मिल सकता है जब 2012 में होने वाली यूरो चैम्पियनशिप के लिए होने वाले क्वालिफ़ायर शुरू होने वाले हैं.

कोच ब्लैंक ने कहा है, "जो कुछ दक्षिण अफ्रीका में हुआ, उसे नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता है. उन तमाम घटनाओं पर मुझे बहुत दुख हुआ है. मैं खेल के नतीजों को देखकर बहुत निराश हुआ हूँ और कुछ खिलाड़ियों के ख़राब व्यवहार से मुझे सदमा पहुँचा है."

लेकिन कोच डोनिमिक की जगह ख़ुद की नियुक्ति के अवसर पर ब्लैंक ने कहा, "इन प्रतिबंधों के बारे में फ़ैसला करने का अधिकार मुझे नहीं है. अगर मुझे लगता है कि ये खिलाड़ी अपने-अपने स्थानों पर अच्छा खेल रहे हैं तो उन्हें टीम में वापिस ले लिया जाएगा."

इस बीच गोलकीपर हूगो लॉरिस ने स्वीकार कर लिया है कि हड़ताल करने का उनका फ़ैसला "पूरी तरह से मूर्खतापूर्ण" था.

एक फ्रांसीसी अख़बार के साथ बातचीत में उन्होंने कहा, "हम कुछ ज़्यादा ही हदें पार कर गए थे. बड़े अजीब से हालात पैदा हो गए थे और हम बड़ी ग़लती कर बैठे. वो हालात बिल्कुल मूर्खतापूर्ण बन गए थे. लेकिन समस्याएँ भी बहुत सी हो गई थीं."

हूगो लॉरिस ने कहा है कि हम सभी को नए सिरे से शुरूआत करनी चाहिए क्योंकि आख़िरकार फुटबॉल टीम देश का एक प्रतिष्ठित संस्थान है.

उन्होंने कहा कि उनकी बड़ी इच्छा है कि जो कुछ दक्षिण अफ्रीका में हुआ वो कहीं भी फिर से ना दोहराया जाए.

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