नज़र मेडल पर:विजेंदर

परिचय

प्रस्तुति: पवन नारा

vijender

हरियाणा के भिवानी जिले के काणुवास गाँव से निकलकर विश्व भर में पहचान बनाने वाले विजेंदर सिंह का जन्म 29 अक्तूबर 1985 को हुआ.

विजेंदर सिंह के पिता महिपाल सिंह बैनिवाल हरियाणा रोडवेज़ में ड्राईवर का काम करते हैं और उनकी माँ कृष्णा गृहिणी हैं.

विजेंदर को मुक्केबाज़ी की प्रेरणा अपने बड़े भाई मनोज से मिली जो की ख़ुद एक राष्ट्रीय स्तर के मुक्केबाज़ रह चुके हैं और फ़िलहाल भारतीय सेना में कार्यरत हैं.

भिवानी बॉक्सिंग क्लब मे अपने पहले गुरू जगदीश सिंह की देख-रेख में विजेंदर ने मुक्केबाज़ी के शुरुआती गुर सीखे.

विजेंदर ने 2001 में इटली की एक प्रतियोगिता में 54 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण पदक जीता . ये उनका पहला अंतरराष्ट्रीय पदक था जिसके बाद उन्होंने फिर कभी मुड़ कर नहीं देखा.

सुनिए विजेन्दर का परिचय

बीजिंग ओलंपिक मे विजेंदर ने काँस्य पदक जीता, इतिहास में ये पहली बार था जब भारत को मुक्केबाज़ी में कोई पदक प्राप्त हुआ.

इसके बाद इटली के मिलान शहर में हुई विश्व मुक्केबाज़ी चैंपियनशिप में विजेंदर को काँस्य पदक मिला है. ग़ौरतलब है कि इस प्रतियोगिता के इतिहास में ये पहला अवसर था जब किसी भारतीय मुक्केबाज़ को कोई पदक मिला .

विजेंदर सिंह को 2009 में प्रतिष्ठित राजीव गाँधी खेल रत्न पुरस्कार से नवाज़ा गया.

विजेंदर 2011 में एक फिल्म में अभिनय भी करने वाले हैं और मुक्केबाज़ी के प्रचार प्रसार के लिए आईपीएल की तर्ज पर एक मुक्केबाज़ी प्रतियोगिता आयोजित करना चाहते है.

विजेंदर अब 75 किलोग्राम वर्ग में दुनिया के नंबर एक मुक्केबाज़ हैं.

खेलों की तैयारियाँ

विजेंदर की ज़ुबानी

विजेंदर

एक खिलाड़ी के लिए 24 घन्टे ही शेड्यूल चलता है. वक्त पर सोना, वक्त पर खाना, वक्त पर ट्रेनिंग करना. खेल 5-6 घन्टे का काम नहीं 24 घन्टे का काम है, जिसमें आप पूरी तरह से लीन रहना पड़ता है. आप कितना आराम करते है, आप कितना ट्रेनिंग करते हैं- ये भी ज़रुरी है कि आप कितनी जल्दी चोट से उबर पाते हैं.

मैं ये सब बड़े ध्यान से करता हूँ फिर चाहे वो मुक्केबाज़ी हो, ट्रेनिंग हो या ध्यान.

सोमवार को हम लंबी दौड़ करते हैं. मंगलवार को वज़न उठाने का अभ्यास करते हैं, बुधवार को हम थोड़ी दूर की तेज़ दौड करते है, गुरुवार को फिर वज़न उठाने का अभ्यास करते हैं, शुक्रवार को हम खेलते है. हमें फ़ुटबाल खेलना बहुत पसंद है.

शनिवार को हमारा मुक्केबाज़ी का मुक़ाबला होता है.

खान-पान

फ़िलहाल मैं डायटिंग कर रहा हूँ, मैं तेल से भरपूर खाना और बाहर का खाना ज़्यादा नहीं खाता. मैं कोशिश करता हूँ कि ज्यादा कार्बोहाईड्रेट और ज्यादा प्रोटीन का खाना खा सकूं.

तस्वीरें

  • विजेंदर
    विजेंदर की नज़रें फ़िलहाल राष्ट्रमंडल खेलों पर टिकी हैं
  • विजेंदर
    विजेंदर राष्ट्रमंडल खेलों की तैयारी के लिए इन दिनों एन आई एस पटियाला में लगे कैंप में पसीना बहा रहे है
  • विजेंदर
    अभ्यास मुक़ाबले में रेलवे के खिलाडी से भिड़ते विजेंदर
  • विजेंदर
    विजेंदर कैंप में बाकी खिलाडियों के लिए प्रेरणा हैं. साथी खिलाड़ी मुकाबले के दौरान विजेंदर के मुक्कों पर नज़रें जमाए हुए हैं
  • विजेंदर
    विजेंदर अपनी तैयारियों में कोई भी कमी नहीं छोडना चाहते हैं, फिलहाल उनकी कोशिश है कि वो अपनी फिटनेस बनाए रखें.
  • विजेंदर
    बीजिंग आलंपिक में पदक जीतने के बाद विजेंदर ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा है

कुछ खट्टी- मीठी

क्या कभी स्कूल में पढ़ते वक्त किसी बच्चे को कोई मुक्का लगाया?

मैंने स्कूल में पढ़ते वक्त कभी किसी से कोई झगड़ा नही किया. मुझे शिक्षक और बच्चे सभी प्यार करते थे, मैं सबका चहेता था.

मैं इतना ज़्यादा पंगेबाज़ नहीं था. मुझे जितनी भी हताशा होती थी वो सब मुक्केबाज़ी रिंग में ही निकल जाती थी, तो बाहर मैं इतनी लड़ाई नहीं करता .

फ़ेसबुक पर आपके चाहने वालों की बहुत लम्बी कतार है, कैसे संभालते है चाहने वालों को?

फेसबुक ही नहीं, ऑरकुट है, आईबीबो है सब जगह है. मैं उनका शुक्रिया करता हूँ जो मुझे चाहते है. मै चाहता हूँ कि वो ऐसे ही मुझे चाहते रहें.

जहाँ तक प्रदर्शन का सवाल है मै आगे भी लगातार अच्छा प्रदर्शन करता रहूँगा ताकि वो मुझे ऐसे ही चाहते रहें.

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