आयोजन समिति के तीन अधिकारी निलंबित

  • 5 अगस्त 2010
क्वींस बैटन रिले कार्यक्रम, लंदन
Image caption पिछले साल हुए इस कार्यक्रम के आयोजन में भारी आर्थिक अनियमितताओं के आरोप लगे हैं

भ्रष्टाचार और अनियमितता के आरोपों के बीच राष्ट्रमंडल खेलों की आयोजन समिति ने गुरुवार को अपने तीन अधिकारियों को निलंबित कर दिया है.

जिन अधिकारियों को निलंबित करने की घोषणा की गई है उनमें आयोजन समिति के संयुक्त निदेशक टीएस दरबारी, लेखा विभाग के संयुक्त निदेशक एम जयचंद्रन और समिति के सलाहकार संजय महेंद्रू हैं.

इसके साथ ही उस ऑस्ट्रेलियाई कंपनी स्पोर्ट्स मार्केटिंग एंड मैनेजमेंट (स्मैम) के साथ क़रार ख़त्म कर दिया गया है जिस पर प्रायोजक लाने की ज़िम्मेदारी थी.

आयोजन समिति ने ये कार्रवाई जाँच समिति की रिपोर्ट के बाद दी है.

इस तीन सदस्यीय जाँच समिति का गठन आयोजन समिति के अध्यक्ष सुरेश कलमाड़ी ने भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद किया था.

कहा गया है कि इस समिति की रिपोर्ट अंतरिम रिपोर्ट है और आगे इस मामले की जाँच प्रवर्तन निदेशालय को सौंपी जा रही है.

इसके अलावा आयोजन समिति ने केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) से कहा है वह अपने किसी संयुक्त सचिव स्तर के अधिकारी से इस मामले की जाँच करवाए.

इससे पहले टेनिस के ठेकों को लेकर आरोपों के बाद आयोजन समिति के कोषाध्यक्ष अनिल खन्ना ने इस्तीफ़ा दे दिया था जिसे स्वीकार कर लिया गया है.

उनके स्थान पर एके मट्टू को नया कोषाध्यक्ष नियुक्त किया गया है.

कार्रवाई

आयोजन समिति के महासचिव ललित भानोट ने यह घोषणा करते हुए बताया कि जाँच समिति को पिछले साल लंदन में हुई क्वींस बैटन रिले के कार्यक्रम में अनियमितता की जाँच करने को कहा गया था.

उन्होंने बताया कि गुरुवार को हुई आयोजन समिति की कार्यकारिणी समिति की बैठक में यह रिपोर्ट पेश की गई और इस पर चर्चा हुई.

उन्होंने बताया कि इसके अलावा खेलों के लिए प्रायोजनों का इंतज़ाम करने वाली कंपनी स्मैम के बारे में और आयोजन के लिए साजोसामान मुहैया कराने के मामले पर चर्चा हुई.

उन्होंने बताया, "क्वींस बैटन रिले के मामले में बोर्ड ने इससे जुड़े तीनों अधिकारियों को निलंबित करने का फ़ैसला किया है."

उन्होंने कहा कि आयोजन समिति के संयुक्त निदेशक टीएस दरबारी और लंदन के कार्यक्रम के समय समिति के सलाहकार रहे संजय महेंद्रू और उस समय वित्त और लेखा विभाग के संयुक्त निदेशक रहे एम जयचंद्रन को निलंबित करने का फ़ैसला किया है.

उन्होंने बताया कि इस मामले की आगे की जाँच का काम प्रवर्तन निदेशालय को सौंपने का निर्णय लिया गया है.

स्मैम का मामला

Image caption निर्माण कार्य से लेकर साजोसामान जुटाने तक सभी मामलों में अनियमितताओं की ख़बरें हैं

खेलों के लिए प्रायोजक जुटाने का काम ऑस्ट्रेलिया की कंपनी स्मैम को दिया गया था. हाल ही में इस कंपनी के बारे में ख़बरें प्रकाशित हुई थीं कि इस कंपनी को कमिशन के रूप में मोटी रकम देने का क़रार किया गया है.

आयोजन समिति के महासचिव ने बताया कि समिति पिछले छह महीनों से कंपनी के कामकाज की समीक्षा कर रही थी.

उनका कहना है कि इस कंपनी के प्रदर्शन और उससे क़रार ख़त्म करने के बारे में समिति ने क़ानूनी सलाह भी ली थी.

उनका कहना था, "क़ानूनी सलाह के मुताबिक़ हम क़रार अगस्त से पहले ख़त्म नहीं कर सकते थे."

इस पर ललित भानोट ने कहा, "ये फ़ैसला कंपनी के परिणाम न दे पाने की वजह से लिया गया है."

कलमाडी़ नहीं आए

Image caption भाजपा ने कलमाड़ी से इस्तीफ़े की मांग की है

माना जा रहा था कि जाँच समिति की रिपोर्ट के आधार पर किए गए फ़ैसलों की जानकारी देने के लिए भारतीय ओलंपिक समिति के अध्यक्ष सुरेश कलमाड़ी ख़ुद आएँगे लेकिन वे नहीं आए.

इस बारे में भानोट ने कहा, "जब ज़रुरत होगी वे आ जाएँगे. मैं समिति का प्रवक्ता हुँ इसलिए यह जानकारी देने मैं आपके सामने उपस्थित हूँ."

जब यह पूछा गया कि जब अनियमितता के आरोपों के बाद अधिकारियों को निलंबित किया जा रहा है तो नैतिक आधार पर सुरेश कलमाड़ी को भी इस्तीफ़ा नहीं दे देना चाहिए, उन्होंने कहा, " आयोजन समिति में 1500 कर्मचारी काम करते हैं और वे हर किसी के काम के लिए ज़िम्मेवार नहीं हो सकते."

उन्होंने सफ़ाई देते हुए कहा कि शीर्ष अधिकारी पैसों के लेनदेन से सीधे नहीं जुड़ा हुआ है उसके लिए अलग विभाग हैं बड़े अधिकारियों के पास सिर्फ़ आपातकालीन मामलों में ही वित्तीय फ़ैसला लेने का आधार है.

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