नज़र मेडल पर : सुशील कुमार

परिचय

सुशील कुमार

2008 बीजिंग ओलंपिक में काँस्य पदक जीत कर पहलवान सुशील कुमार ने भारत में कुश्ती जैसे पारंपरिक और ओलंपिक खेल को एक नई पहचान दी.

दिल्ली के नजफ़गढ़ में 26 मई, 1983 को जन्मे सुशील कुमार के दादा, पिता और बड़े भाई कुश्ती करते थे. इसलिए वो भी सातवीं कक्षा से पहलवानी करने लगे. सुशील ने अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित गुरू सतपाल, यशबीर और रामफल से पहलवानी के गुर सीखे हैं.

सुनिए सुशील कुमार का परिचय

सुशील कुमार को पहली अंतरराष्ट्रीय सफलता जूनियर स्तर पर 1998 में मैनचेस्टर में वर्ल्ड कैडेट गेम्स में मिली जहाँ उन्होंने स्वर्ण पदक जीता. इस सफलता को उन्होंने अगले साल पोलैंड में भी दोहराया.

उपलब्धियां

  • 2009 स्वर्ण, जर्मन ग्रां प्री
  • 2008 कांस्य, बीजिंग ओलंपिक्स
  • 2008 कांस्य, एशियन कुश्ती चैंपियनशिप
  • 2007 स्वर्ण, राष्ट्रमंडल कुश्ती चैंपियनशिप
  • 2005 स्वर्ण, राष्ट्रमंडल कुश्ती चैंपियनशिप
  • 2003 स्वर्ण, राष्ट्रमंडल कुश्ती चैंपियनशिप
  • 2003 कांस्य, एशियन कुश्ती चैंपियनशिप

इसके बाद सुशील एक-एक कर सफलता की सीढ़ियाँ चढ़ते गए और 2008 में बीजिंग ओलंपिक में उन्होंने 66 किलोग्राम फ़्री-स्टाइल वर्ग में काँस्य पदक जीता. 1952 हेलसिंकी ओलंपिक में केडी जाधव के कुश्ती में काँस्य पदक जीतने के बाद ये दूसरा मौका था जब किसी भारतीय पहलवान ने इन खेलों में कोई पदक जीता हो.

सुशील कुमार को 2006 में अर्जुन पुरस्कार और 2009 में भारत का सर्वोच्च खेल सम्मान, राजीव गाँधी खेल रत्न मिला.

खेलों की तैयारी

कुश्ती

सुशील कुमार कहते हैं कि नई दिल्ली राष्ट्रमंडल खेलों के लिए तैयारी बहुत ज़ोर-शोर से चल रही है.

वह कहते हैं, “हमारे कोच ने खेलों को ध्यान में रखकर ही शेड्यूल बनाया है और इसका नतीजा आपको राष्ट्रमंडल खेलों में नज़र आएगा.”

सुशील कहते हैं, “कोच बहुत अच्छी तैयारियाँ करा रहे हैं. रूसी कोच रणनीति की अच्छी जानकारी देते हैं. इसके अलावा खान-पान का ध्यान रखा जा रहा है. वातानुकूलित हॉल में अभ्यास करने से थकान कम होती है और पसीना भी कम आता है. इसलिए हम तरल पदार्थ भी कम पीते हैं क्योंकि उससे भी वज़न बढ़ जाता है.”

नई दिल्ली खेलों से पहले भारतीय पहलवान मॉस्को में विश्व चैंपियनशिप में भी हिस्सा लेंगे. सुशील मानते हैं कि इसका फ़ायदा भी खिलाड़ियों को होगा क्योंकि हर टूर्नामेंट से कुछ-न-कुछ सीखने को मिलता है.

तस्वीरें

  • सुशील कुमार
    सुशील कुमार बीजिंग ओलंपिक में काँस्य पदक जीतने वाले पहलवान हैं
  • कुश्ती का अभ्यास
    सुशील का कहना है कि भारतीय कुश्ती टीम का राष्ट्रमंडल खेलों के लिए अभ्यास ज़ोर शोर से चल रहा है
  • पहलवान
    पहलवान सुशील कुमार के मुताबिक़ उनके पदक ने इस खेल के प्रति लोगों की जागरूकता बढ़ाई है
  • पहलवानी का अभ्यास
    सुशील कुमार के मुताबिक़ उनके गुरू सभी पहलवानों के अभ्यास पर नज़र रखे हैं
  • कोच
    सुशील कुमार का कहना है कि रूसी कोच उन्हें रणनीति का अभ्यास करा रहे हैं
  • पहलवान
    सुशील को ख़ुशी है कि उन्हें पदक जीतने के बाद क्रिकेटरों जैसा सम्मान मिला है

कुछ खट्टी-मीठी

सुशील कुमार

सुशील कुमार को इस बात की बेहद ख़ुशी है कि ओंलपिक पदक जीतने के बाद उन्हें भी देश में वैसा ही सम्मान मिला जैसा अधिकतर क्रिकेटरों को ही मिलता है.

वह कहते हैं, “पहले बोलते थे कि क्रिकेटर को ही हमारे देश में सम्मान मिलता है. ओलंपिक पदक जीतने के बाद मुझे लगता था कि भई चले जाएँगे, थोड़ा सम्मान होगा. लेकिन पूरे देश ने बहुत ही प्यार और सम्मान दिया. एक महीने तक तो नींद भी गाड़ी में ही पूरी की.”

सुशील कुमार अपनी सफलता का श्रेय अपने परिवार और गुरुओं को देते हैं.

वह कहते हैं, “इतनी शोहरत मिलने के बाद मुझे विज्ञापनों और ‘दस का दम’ और ‘नच बलिए’ जैसी टीवी शोज़ से ऑफ़र आए. लेकिन मेरे गुरुओं ने मेरा सही मार्गदर्शन किया और इधर-उधर नहीं जाने दिया क्योंकि मुझे जो प्यार-सम्मान मिला है वो कुश्ती से मिला है, विज्ञापनों से नहीं.”

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