निशानेबाज़ तेजस्विनी सावंत से बात-चीत

तेजस्विनी सावंत अपने माता-पिता के साथ

विश्व शूटिंग चैंपियनशिप 2010 में भारत की तेजस्विनी सावंत ने स्वर्ण पदक जीत इतिहास रचा और वह विश्व चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला बन गईँ.

सावंत ने 50 मीटर राइफल प्रोन मुक़ाबले में 597 अंक बनाकर विश्व रिकॉर्ड की बराबरी भी की. राष्ट्रमंडल खेलों को लेकर उनसे बीबीसी की एक ख़ास मुलाक़ात.

तेजस्विनी जी आप क्या कहेंगी अपने इस विश्व रिकार्ड की बराबरी करने के कारनामे पर?

मैं अपनी इस कामियाबी पर बहुत ख़ुश हूं. मेरी टीम ने जो काम किया इससे ज़ाहिर है कि हम सही ट्रैक पर जा रहे हैं. वे सभी ख़ुश हैं और मैं ज़रा ज़्यादा ख़ुश हूं.

इस साल बालाजीत सिंह संधु, रंजन सिंह सोढी और अब आप. क्या आपको ऐसा नहीं लगता कि निशानेबाज़ी में भारतीय खिलाड़ियों ने जितना अच्छा प्रदर्शन किया है शायद किसी और खेल में नहीं?

भारतीय निशानेबाज़ों को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सराहा जा रहा है. कहा जा रहा है कि भारतीय निशानेबाज़ बड़ी तेज़ी से आगे आ रहे हैं. मुझे लगता है कि ये शूटिंग के लिए बहुत अच्छी बात है.

अभी दिल्ली में राष्ट्रमंडल शूटिंग चैंपियनशिप हुई थी तो उसका कितना लाभ मिला?

सही मायनों में मैं उस वक़्त सही फ़ॉर्म में नहीं थी. मेरी मानसिक स्थिति उतनी मज़बूत नहीं थी. मेरे पिता आईसीयू में थे तो उस समय की कोई बात मैंने अपने दिमाग़ में नहीं रखी क्योंकि वह सारा मेरे ख़राब प्रदर्शन का दौर था.

क्या आपको नहीं लगता कि इस कठिन समय ने आपको अच्छी ख़ासी मानसिक मज़बूती दी है?

ये ज़रूर है कि मैं उससे काफ़ी मज़बूत और टफ़ हो चुकी हूँ. उस ख़राब दौर से मुझे ये लाभ मिला कि मैं बुनियादी ट्रेनिंग करने पर मजबूर हो गई. और मैंने दो महीने तक बुनियादी प्रशिक्षण पर पूरा ध्यान दिया जिससे मुझे इस मेडल के जीतने में काफ़ी फ़ायदा हुआ.

मुक़ाबला कितना सख़्त था?

मुक़ाबला बहुत ही सख़्त था वहां पर क्योंकि जिस शूटर को सिल्वर मेडल मिला उसका भी स्कोर 597 ही था यानी हम दोनों के स्कोर बराबर थे और हम दोनों के नाम विश्वरिकॉर्ड में शामिल हैं. लेकिन जब मेडल का सवाल आया तो हमारे इनर टेंस देखे गए जो मेरे ज़्यादा थे.

कज़ाकिस्तान की शूटर ओलगा को तीसरा स्थान मिला और वह पहले भी दो बार विश्व-रिकॉर्ड की बराबरी कर चुकी हैं. इसलिए हम कह सकते हैं कि कॉंपेटिशन बहुत मुश्किल था.

Image caption तेजस्विनी ने जर्मनी में हुई विश्व चैंपियनशिप में विश्व-रिकॉर्ड की बराबरी की और स्वर्ण पदक जीता.

जब आपने लगातार तीन बार सौ निशाने सही लगाए तो आपको कहीं से ये नहीं लगा कि आप वहीं तेजस्विनी सावंत हैं या कुछ और?

नहीं, नहीं मुझे पता था कि मैं वहीं तेजस्विनी सावंत हूँ. मैंने आपको थोड़ी देर पहले कहा था कि मैंने अपने बेसिक्स पर काफ़ी मेहनत की थी, दो वर्ल्ड कप को छोड़ कर मैंने अपने प्रोग्राम पर काम किया था. इसलिए मुझ पता था कि मैं ये कर सकती हूँ, इसलिए मैं बहुत आसानी से वह कर रही थी.

तेजस्विनी सावंत तो वही है लेकिन क्या आपको नहीं लगता कि कल और आज में दुनिया थोड़ी सी बदल गई है?

हां, कल और आज में दुनिया थोड़ी सी बदल गई है.

इस कामियाबी के बाद राष्ट्रमंडल खेलों को लेकर आपके हौसले कितने बुलंद हुए हैं?

स्पष्ट रूप से मेरा कॉंफ़िडेंस लेवेल बहुत बढ़ गया है. लेकिन मैं अपनी ओर से बेहतरीन प्रदर्शन करने की कोशिश करूंगी न कि मेडल पर ध्यान दुंगी.

क्या आपको नहीं लगता कि ये विश्व चैंपियनशिप का स्वर्ण पदक आपके लिए बहुत ही ख़ास है?

जी हाँ, ये मेरे लिए बहुत ही स्पेशल है क्योंकि ये सारा मेरे डैड (पिता) का सपना था इसलिए ये मेरे लिए बहुत ही स्पेशल है.

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