खेल महासंघ के मुख्य कार्यकारी ने सिफ़ारिश की बात मानी

माइक हूपर
Image caption माइक हूपर ने माना कि राष्ट्रमंडल खेल महासंघ ने फ़ास्ट ट्रैक की सिफ़ारिश की थी

राष्ट्रमंडल खेल महासंघ के मुख्य कार्यकारी माइक हूपर ने माना है कि खेलों के प्रसारण अधिकार बेचने के लिए लाई गई कंपनी फ़ास्ट ट्रैक की खेल महासंघ ने सिफ़ारिश की थी.

भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक या कैग की रिपोर्ट में ज़िक्र है कि प्रसारण अधिकार बेचने के लिए दो कंपनियों स्पोर्ट्स मार्केटिंग ऐंड मैनेजमेंट एजेंसी या स्मैम और फ़ास्ट ट्रैक ने बोलियाँ दी थीं.

स्मैम 12.5 प्रतिशत के कमीशन पर और फ़ास्ट ट्रैक 15 प्रतिशत के कमीशन पर काम करने को तैयार थी मगर फ़ास्ट ट्रैक की सिफ़ारिश राष्ट्रमंडल खेल महासंघ की ओर से हुई थी.

बीबीसी हिंदी से विशेष बातचीत में हूपर ने कहा, "क्या हमने उनकी सिफ़ारिश की थी, बिल्कुल. क्या हम उनकी सिफ़ारिश फिर करेंगे, बिल्कुल."

मगर साथ ही हूपर ने कहा कि खेल महासंघ किसी भी तरह से पैसों के मोल भाव में शामिल नहीं होता इसलिए कंपनी को कितना कमीशन देना है ये सब तय करना खेलों की आयोजन समिति का काम है.

मगर हूपर ने ये कहने के बाद फिर फ़ास्ट ट्रैक की तारीफ़ करते हुए कहा कि आयोजन समिति ने ऊँचे दाम पर मगर एक बेहद अनुभवी कंपनी को ठेका दिया और इसकी वजह से काफ़ी अच्छे नतीजे भी आए.

इस बीच आयोजन समिति ने भी एक बयान जारी करके कहा कि फ़ास्ट ट्रैक की सेवाएँ लेने का फ़ायदा हुआ क्योंकि उसने टेलिविज़न प्रसारण अधिकारों के ज़रिए 120 करोड़ रुपए लाने का वायदा किया था उससे आगे बढ़कर उसने 262 करोड़ रुपए जुटाए हैं.

आयोजन समिति के बयान के मुताबिक़ दूसरी कंपनी स्मैम को प्रायोजक लाने के लिए नियुक्त किया गया मगर वे उतना अच्छा प्रदर्शन नहीं कर सके इसलिए उन्हें हटा दिया गया.

अब दोनों कंपनियों के कमीशन में जो ढाई प्रतिशत का अंतर है उसकी वजह से हुए नुक़सान को लेकर आयोजन समिति को आने वाले दिनों में जवाब देना पड़ सकता है.

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